Class 11 History Solutions Chapter 17 यूरोपीयों का भारत में आगमन तथा सर्वोच्चता के लिए संघर्ष

अध्याय का विस्तृत अध्ययन

(विषय-सामग्री की पूर्ण जानकारी के लिए)

प्रश्न-यूरोपीय पृष्ठभूमि के सन्दर्भ में भारत में पुर्तगाली, डच, अंग्रेज़ व फ्रासीसी कम्पनियों की स्थापना व मुख्य गतिविधियों की चर्चा करें।
उत्तर-भारत में सर्वप्रथम पुर्तगाली आए। पुर्तगाली नाविक वास्कोडिगामा ने 1498 ई० में भारत का नवीन मार्ग खोजा। इसके बाद पुर्तगालियों ने भारत से व्यापार आरम्भ कर दिया। पुर्तगालियों को उन्नति करते देखकर यूरोप की अन्य जातियों जैसेअंग्रेज़, डच, डैनिश तथा फ्रांसीसियों ने भी भारत के साथ व्यापार करने के लिए अपनी व्यापारिक कम्पनियां स्थापित कर ली। इन कम्पनियों का वर्णन इस प्रकार है-

I. पुर्तगाली कम्पनी-

भारत तथा युरोप के देशों में प्राचीनकाल से ही व्यापार होता था। भारत के सूती कपडे, रेशमी कपड़े, गर्म मसाले आदि की यूरोप की मण्डियों में बड़ी मांग थी। अतः यूरोप के देश भारत के साथ अपने व्यापारिक सम्बन्ध स्थापित करने के बड़े इच्छुक थे। सबसे पहले 1498 ई० में पुर्तगाल के एक नाविक वास्कोडिगामा ने भारत का एक नया समुद्री मार्ग खोज निकाला। इसके कुछ समय बाद ही पुर्तगालियों ने भारत के साथ व्यापार करना आरम्भ कर दिया। धीरे-धीरे उन्होंने भारत में अपने अनेक उपनिवेश स्थापित कर लिए। 1509 ई० में अल्बुकर्क पुर्तगेजों का गवर्नर बनकर भारत आया। वह भारत में पुर्तगेजी राज्य स्थापित करना चाहता था। थोड़े ही समय में उसने बीजापुर तथा मलाया पर अपना अधिकार कर लिया। उसने गोवा को अपनी राजधानी बनाया। पुर्तगेज़ों ने बड़ी तेज़ी से अपनी शक्ति को आगे बढ़ाया। सोलहवीं शताब्दी में उन्होंने हिन्द-महासागर की अनेक बन्दरगाहों पर अपना अधिकार कर लिया। 1515 ई० में फारस की खाड़ी की उर्मज़ बन्दरगाह पर उनका अधिकार हो गया। इसके पश्चात् उन्होंने बसीन, मुम्बई और दियों पर नियन्त्रण स्थापित कर लिया। 1580 में पुर्तगाल स्पेन के साथ मिल गया। स्पेन ने पुर्तगाल के उपनिवेशों की ओर कोई ध्यान नहीं दिया। इसका परिणाम यह हुआ कि गोवा, दियू और दमन को छोड़कर शेष सभी उपनिवेश उनसे छीन गए। धीरे-धीरे उनकी शक्ति का पूरी तरह पतन हो गया।

II. डच ईस्ट इण्डिया कम्पनी –

डच व्यापारी हॉलैण्ड के निवासी थे। वे पुर्तगाल से पूर्वी देशों का माल खरीदते थे और उसे उत्तरी यूरोप में बेचकर काफ़ी धन कमाते थे। उनके व्यापार की मुख्य वस्तु गर्म मसाले थे। कुछ समय पश्चात् पुर्तगाल को स्पेन ने अपने देश में मिला लिया। फलस्वरूप डच व्यापारियों को पुर्तगाल से माल मिलना बन्द हो गया और उन्हें गर्म मसाले प्राप्त करने के लिए अन्य साधन ढूंढने पड़े। 1595 ई० में चार डच जहाज़ आशा अन्तरीप के मार्ग से भारत पहुंचने में सफल हो गए और उनको व्यापार की आशा फिर से बन्ध गई। _

1602 ई० में डचों ने डच ईस्ट इण्डिया कम्पनी की स्थापना की। डच संसद् ने इस कम्पनी को व्यापार करने के साथसाथ दुर्ग बनाने, युद्ध तथा सन्धि करने और प्रदेश जीतने का अधिकार भी दे दिया। इस प्रकार भारत में डच शक्ति के विस्तार का आरम्भ हुआ। वे इण्डोनेशिया के गर्म मसाले के द्वीपों-जावा और सुमात्रा में अधिक रुचि लेने लगे। उन्होंने पुर्तगालियों को इण्डोनेशिया से मार भगाया और वहां के व्यापार पर अपना अधिकार स्थापित कर लिया। 1623 ई० में जब अंग्रेजों ने पूर्वी द्वीपों में बसने पर प्रयत्न किया तो डचों ने उसे विफल बना दिया। इस प्रकार डच शक्ति बढ़ती गई और उन्होंने सूरत, भड़ौच, कोचीन, अहमदाबाद, नागापट्टम तथा मसौलीपट्टम में भी अपने व्यापारिक केन्द्र स्थापित कर लिए। बंगाल और बिहार में भी उन्होंने अपने केन्द्र स्थापित किए। वे भारत से कपड़ा, रेशम, शोरा, अफ़ीम तथा नील खरीद कर यूरोप के देशों में बेचने लगे। इस प्रकार भारत में उनकी शक्ति काफ़ी बढ़ गई। परन्तु कुछ एक कारणों से थोड़े ही वर्षों के पश्चात् भारत में उनका पतन हो गया।

III. अंग्रेजी व्यापारिक कम्पनी

पुर्तगाली लोग भारत के व्यापार से खूब धन कमा रहे थे। उन्हें व्यापार करते देखकर अंग्रेज़ों के मन में भी भारत से व्यापार करने की इच्छा उत्पन्न हुई। 1600 ई० में लन्दन के कुछ व्यापारियों ने इंग्लैण्ड की महारानी एलिज़ाबेथ प्रथम से भारत के साथ व्यापार करने का आज्ञा-पत्र प्राप्त किया। आज्ञा -पत्र मिलने पर उन्होंने एक व्यापारिक कम्पनी बनाई और उसका नाम ईस्ट इण्डिया कम्पनी रखा। इस कम्पनी ने जहांगीर के शासन काल में भारत में अपना व्यापार करना आरम्भ कर दिया। इस व्यापार से कम्पनी को खूब धन मिलने लगा और इसकी शक्ति बढ़ने लगी। कुछ ही समय में इसने सूरत, कालीकट, मछलीपट्टम, मुम्बई, कासिम बाज़ार, हुगली, कलकत्ता (कोलकाता) आदि स्थानों पर अपनी व्यापारिक कोठिया स्थापित कर लीं। इस प्रकार भारत में अंग्रेजी ईस्ट इण्डिया कम्पनी का व्यापार दिन प्रतिदिन बढ़ने लगा।

IV. फ्रांसीसी ईस्ट इण्डिया कम्पनी

पुर्तगालियों, डचों तथा अंग्रेजों को भारत के साथ व्यापार करता देखकर फ्रांसीसियों के मन में भी इस व्यापार से लाभ उठाने की लालसा जागी। अतः उन्होंने भी 1664 ई० में अपनी व्यापारिक कम्पनी स्थापित कर ली। इस कम्पनी ने सूरत और मसौलीपट्टम में अपनी व्यापारिक बस्तियां बसा लीं। उन्होंने भारत के पूर्वी तट पर पांडीचेरी नगर बसाया और उसे अपनी राजधानी बना लिया। उन्होंने बंगाल में चन्द्रनगर की नींव रखी। 1721 ई० में मारीशस तथा माही पर उनका अधिकार हो गया। इस प्रकार फ्रांसीसियों ने पश्चिमी तट, पूर्वी तट तथा बंगाल में अपने पांव अच्छी तरह जमा लिए और वे अंग्रेजों के प्रतिद्वन्दी बन गए।

1741 ई० में डुप्ले भारत में फ्रांसीसी क्षेत्रों का गवर्नर जनरल बनकर आया। वह बड़ा कुशल व्यक्ति था और भारत में फ्रांसीसी राज्य स्थापित करना चाहता था। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए अंग्रेजों तथा फ्रांसीसियों के बीच संघर्ष होना आवश्यक था। अत: 1744 ई० से 1764 ई० तक के बीस वर्षों में भारत में फ्रांसीसियों और अंग्रेजों के बीच छिड़ गया। यह संघर्ष कर्नाटक के युद्धों के नाम से प्रसिद्ध है। इन युद्धों में अन्तिम विजय अंग्रेजों की हुई। फ्रांसीसियों के पास केवल पांच बस्तियां- पांडिचेरी, चन्द्रनगर, माही, थनाओ तथा मारीशस ही रह गईं। इन बस्तियों में वे अब केवल व्यापार ही कर सकते थे।

महत्त्वपूर्ण परीक्षा-शैली प्रश्न

I. वस्तुनिष्ठ प्रश्न

1. उत्तर एक शब्द से एक वाक्य तक

प्रश्न 1. यूरोप में भारत की मुख्यतः कौन-सी दो वस्तुओं की मांग अधिक थी ?
उत्तर-कपड़ा तथा गर्म मसाले।

प्रश्न 2. डच लोग किस देश के रहने वाले थे ?
उत्तर-हालैंड के।

प्रश्न 3. कर्नाटक की लड़ाइयां किन दो यूरोपीय कम्पनियों के बीच हुई ?
उत्तर-अंग्रेज़ी तथा फ्रांसीसी कम्पनियों के बीच।

प्रश्न 4. बक्सर की लड़ाई के बाद बंगाल के दो कठपुतली नवाबों के नाम बताओ।
उत्तर-मीर जाफर तथा नज़ामुद्दौला।

प्रश्न 5. सिराजुद्दौला कहां का नवाब था ?
उत्तर-बंगाल का।

2. रिक्त स्थानों की पूर्ति

(i) पुर्तगाल के लोग ईसाई धर्म के ……….. सम्प्रदाय के अनुयायी थे।
(ii) फ्रांसीसी सेनाओं ने ………….. को कर्नाटक में तथा ………….. को हैदराबाद में गद्दी दिलवाई।
(iii) बुसे एक …………. कमाण्डर था।
(iv) अंग्रेजों को ………….. ई० में बंगाल की दीवानी मिली।
(v) प्लासी की लड़ाई में ……………… की विजय हुई।
उत्तर-
(i) कैथोलिक
(ii) चन्दा साहिब, मुज़फ़्फ़र जंग
(iii) फ्रांसीसी
(iv) 1765
(v) अंग्रेज़ों।

3. सही गलत कथन

(i) यूरोप के व्यापारी भारत में अपना माल बेचने और बदले में यहां से सोना-चांदी लेने आए थे। — (x)
(ii) अंग्रेज़ और फ्रांसीसी कम्पनियां भारत में तभी लड़ती थीं जब यूरोप में इंग्लैंड और फ्रांस के बीच लड़ाई होती थी। — (√)
(iii) यूरोप की कम्पनियों ने अपनी स्वार्थ-साधना के लिये भारत के राजनीतिक मामलों में हस्तक्षेप करना शुरू किया। — (√)
(iv) मीर कासिम प्लासी की लड़ाई के बाद बंगाल का नवाब बना। — (x)
(v) मुग़ल बादशाह और अवध तथा बंगाल के नवाबों ने इलाहाबाद में ईस्ट इण्डिया कम्पनी के साथ संधि पर हस्ताक्षर किए। — (√)

4. बहु-विकल्पीय प्रश्न

(i) किस लड़ाई के पश्चात् बंगाल पर पूरी तरह अंग्रेजों का अधिकार हो गया ?
(A) प्लासी की लड़ाई
(B) कर्नाटक की तीसरी लड़ाई
(C) पानीपत की तीसरी लड़ाई
(D) बक्सर की लड़ाई।
उत्तर-(D) बक्सर की लड़ाई।

(ii) भारत में अंग्रेजी राज्य का संस्थापक किसे माना जाता है ?
(A) क्लाइव
(B) लॉर्ड वेलेजली
(C) लॉर्ड डल्हौज़ी
(D) लॉर्ड कार्नवालिस।
उत्तर-(A) क्लाइव

(iii) डुप्ले कौन था ?
(A) अंग्रेज गवर्नर-जनरल
(B) फ्रांसीसी गवर्नर-जनरल
(C) डच गवर्नर-जनरल
(D) पुर्तगाली गवर्नर-जनरल।
उत्तर-(B) फ्रांसीसी गवर्नर-जनरल

(iv) प्लासी की लड़ाई के बाद बंगाल का नवाब बना-
(A) सिराजुद्दौला
(B) अली वर्दी खां
(C) मीर जाफर
(D) क्लाइव।
उत्तर-(C) मीर जाफर

(v) फैक्ट्री से अभिप्राय है-
(A) व्यापारिक केन्द्र
(B) विशाल बाज़ार
(C) बड़ा रेलवे प्लेटफार्म
(D) लगान वसूली केन्द्र।
उत्तर-(A) व्यापारिक केन्द्र

॥. अति छोटे उत्तर वाले प्रश्न

प्रश्न 1. भारत में यूरोपीयों की व्यापारिक तथा राजनीतिक गतिविधियों के बारे में जानकारी के चार मुख्य स्रोतों के नाम बताएं।
उत्तर-भारत में यूरोपीयों के व्यापारिक तथा राजनीतिक गतिविधियों के बारे में जानकारी हमें यूरोपीय कम्पनियों के रिकार्डों, यूरोपीय यात्रियों के वृत्तान्तों, व्यापारिक बस्तियों की इमारतों तथा तस्वीरों से प्राप्त होती है।

प्रश्न 2. अंग्रेजी ईस्ट इण्डिया कम्पनी के व्यापारिक रिकार्ड किस नाम से जाने जाते हैं तथा ये कहां उपलब्ध
उत्तर-अंग्रेज़ी ईस्ट इण्डिया कम्पनी के व्यापारिक रिकार्ड फैक्टरी रिकार्ड के नाम से जाने जाते हैं। ये भारत तथा इंग्लैण्ड में उपलब्ध हैं।

प्रश्न 3. यूरोप में भारत की मुख्यतः किन दो वस्तुओं की मांग थी ?
उत्तर-यूरोप में भारत के सूती कपड़े तथा गर्म मसाले की बहुत मांग थी।

प्रश्न 4. यूरोप तथा भारत में स्थलमार्ग कितना लम्बा था तथा भूमध्य सागर किस देश के व्यापारियों के नियन्त्रण में था ?
उत्तर-यूरोप तथा भारत में स्थल मार्ग दस हजार किलोमीटर से भी अधिक लम्बा था। भूमध्य सागर पर इटली के नगर वेनिस के व्यापारियों का नियन्त्रण था।

प्रश्न 5. जहाजरानी के लिए विशेष विद्यालय यूरोप के किस देश में स्थापित किया गया ? अफ्रीका के दक्षिणी इलाके से होता हुआ कौन-सा यूरोपीय कप्तान हिन्द महासागर में पहुंचा ?
उत्तर-जहाजरानी के लिए विशेष विद्यालय पुर्तगाल में स्थापित किया गया। बार्थोलोम्यू डायज अफ्रीका के दक्षिणी किनारे से होता हुआ हिन्द महासागर में पहुंचा।

प्रश्न 6. भारत के पश्चिमी तट पर पहुंचने वाला पहला यूरोपीय कौन था तथा वह कब और कहाँ पहुँचा ?
उत्तर- भारत के पश्चिमी तट पर पहुंचने वाला पहला यूरोपीय वास्कोडिगामा था। वह 1498 में कालीकट पहुंचा।

प्रश्न 7. पुर्तगाल के लोग ईसाई धर्म के किस सम्प्रदाय के अनुयायी थे तथा वे किसको अपना धार्मिक नेता मानते थे?
उत्तर-पुर्तगाल के लोग रोमन कैथोलिक सम्प्रदाय के अनुयायी थे। वे पोप को अपना धार्मिक नेता मानते थे।

प्रश्न 8. पोप ने 1454 की घोषणा द्वारा विश्व को किन दो यूरोपीय देशों में बाँट दिया ?
उत्तर-पोप ने 1454 की घोषणा द्वारा विश्व को पुर्तगाल और स्पेन में बाँट दिया।

प्रश्न 9. भारत में पुर्तगालियों के चार महत्त्वपूर्ण केन्द्रों के नाम बताओ।
उत्तर-भारत में पुर्तगालियों के चार महत्त्वपूर्ण केन्द्र गोआ, दीव, दमन तथा दादर थे।

प्रश्न 10. पुर्तगालियों ने भारत से बाहर कौन-से चार व्यापारिक केन्द्र स्थापित किए थे ?
उत्तर-पुर्तगालियों ने भारत से बाहर लाल सागर में सकोत्रा, ईरान की खाड़ी में उरमज, दक्षिणी-पूर्वी एशिया में मलक्का तथा चीन में मकाओ नामक व्यापारिक केन्द्र स्थापित किए हुए थे।

प्रश्न 11. किस महाद्वीप में कौन-से देश की खोज से पुर्तगालियों की भारत में रुचि कम हुई ?
उत्तर-दक्षिणी अमेरिका में ब्राजील की खोज से पुर्तगालियों की रुचि भारत में कम हो गई।

प्रश्न 12. डच लोग किस देश के रहने वाले थे और उनका बेड़ा दक्षिणी-पूर्वी एशिया में कब पहुंचा ?
उत्तर- डच लोग हॉलैण्ड के रहने वाले थे। 1595 में उनका बेड़ा दक्षिणी-पूर्वी एशिया में पहुंचा।

प्रश्न 13. डच लोगों के व्यापारिक संगठन का क्या नाम था तथा यह कब बना ?
उत्तर- डच लोगों के व्यापारिक संगठन का नाम यूनाइटिड ईस्ट इण्डिया कम्पनी था। यह संगठन 1602 में बना था।

प्रश्न 14. डच लोगों ने भारत में कौन-से चार व्यापारिक केन्द्र स्थापित किए ?
उत्तर- डच लोगों ने भारत में कोचीन, सूरत, नागपट्टम, पुलीकट नामक व्यापारिक केन्द्र स्थापित किए।

प्रश्न 15. अंग्रेजों के व्यापारिक संगठन का नाम क्या था तथा यह कब बना ?
उत्तर- अंग्रेजों के व्यापारिक संगठन का नाम ईस्ट इण्डिया कम्पनी था। यह संगठन 1600 में बना।

प्रश्न 16. भारत आने से पहले अंग्रेजों ने अपना व्यापार कहां आरम्भ किया तथा किस विशेष घटना के बाद उन्होंने भारत की ओर अधिक ध्यान दिया ?
उत्तर-भारत में आने से पहले अंग्रेजों ने अपना व्यापार दक्षिणी-पूर्वी एशिया में आरम्भ किया। अंबोओना की अंग्रेज़ी फैक्टरी पर डचों का अधिकार होने तथा अंग्रेजों की हत्या होने के पश्चात् अंग्रेजों ने भारत की ओर अधिक ध्यान दिया।

प्रश्न 17. मुग़ल बादशाह जहांगीर के दरबार में किस अंग्रेज़ प्रतिनिधि ने तथा कब व्यापारिक छूट को प्राप्त करने का असफल प्रयत्न किया ?
उत्तर- मुग़ल बादशाह जहांगीर के दरबार में कप्तान विलियम हाकिन्ज ने 1607-11 में व्यापारिक छूट प्राप्त करने का असफल प्रयत्न किया।

प्रश्न 18. अंग्रेजी कम्पनी का कौन-सा प्रतिनिधि किस मुगल बादशाह से किस वर्ष में व्यापारिक छूट प्राप्त करने में सफल रहा ?
उत्तर-अंग्रेज़ प्रतिनिधि सर टामस रो 1618 में मुगल बादशाह जहांगीर से व्यापारिक छूट प्राप्त करने में सफल रहा।

प्रश्न 19. फैक्टरी से क्या अभिप्राय है तथा अंग्रेजों ने अपनी आरम्भिक फैक्टरियां किन चार स्थानों में स्थापित की ?
उत्तर-फैक्टरी से अभिप्राय व्यापारिक केन्द्र से है। अंग्रेजों ने आरम्भिक फैक्टरियां सूरत, अहमदाबाद, अड़ौच तथा आगरा में स्थापित की।

प्रश्न 20. अंग्रेज़ कम्पनी का प्रमुख कार्यालय पहले कहां स्थापित हुआ तथा बाद में इसे किस स्थान पर बना दिया गया ?
उत्तर-अंग्रेज़ कम्पनी का प्रमुख कार्यालय सूरत में स्थापित हुआ था। परन्तु बाद में इसे बम्बई (मुम्बई) में बना दिया गया।

प्रश्न 21. अंग्रेज कम्पनी की मद्रास (चेन्नई) व कलकत्ता (कोलकाता) की फैक्टरियां कब स्थापित हुई ? उत्तर-1640 में मद्रास (चेन्नई) की फैक्टरी तथा 1690 में कलकत्ता (कोलकाता ) की फैक्टरी स्थापित हुई।

प्रश्न 22. अंग्रेज़ भारत से किन चार वस्तुओं को बाहर भेजते थे ?
उत्तर-अंग्रेज़ नील, चीनी, गर्म मसाला तथा अफ़ीम भारत से बाहर भेजते थे।

प्रश्न 23. अंग्रेज़ यूरोप से भारत में कौन सी-चार वस्तुएं बेचने के लिए लाते थे ?
उत्तर-अंग्रेज़ कलई, सिक्का, पारा तथा कपड़ा यूरोप से भारत में बेचने के लिए लाते थे।

प्रश्न 24. अंग्रेजों को बंगाल में बिना महसूल व्यापार करने का अधिकार किस मुगल बादशाह से तथा कब मिला ?
उत्तर-18वीं शताब्दी के दूसरे दशक में मुगल बादशाह फर्रुखसियर ने अंग्रेजों को बंगाल में बिना कर दिए व्यापार करने का अधिकार दे दिया था।

प्रश्न 25. किस यूरोपीय देश ने सबसे अन्त में तथा कब अपनी व्यापारिक कम्पनी स्थापित की ?
उत्तर-यूरोपीय देशों में सबसे अन्त में फ्रांस ने व्यापारिक कम्पनी स्थापित की। यह कम्पनी 1664 में स्थापित हुई।

प्रश्न 26. फ्रांसीसियों की मुख्य दो फैक्टरियां कौन-सी थीं तथा ये कब स्थापित की गईं ?
उत्तर-फ्रांसीसियों ने अपनी दो मुख्य फैक्टरियां 1674 में पांडिचेरी में तथा 1690 में चन्द्रनगर में स्थापित की।

प्रश्न 27. 1725 के बाद फ्रांसीसियों ने भारत में अन्य कौन-सी दो बस्तियां स्थापित की ?
उत्तर-1725 के बाद फ्रांसीसियों ने माही तथा कारीकल के स्थान पर बस्तियां स्थापित की।

प्रश्न 28. फ्रांसीसी कम्पनी ने किन दो महत्त्वपूर्ण अफ़सरों के अधीन उन्नति की तथा इनमें कौन तथा कब कम्पनी का गवर्नर जनरल बना ?
उत्तर-फ्रांसीसी कम्पनी ने डूमा तथा डुप्ले के अधीन बहुत उन्नति की। 1741 में डुप्ले कम्पनी का गवर्नर-जनरल बना।

प्रश्न 29. यूरोप में किस देश के राज्य सिंहासन के युद्ध के साथ कर्नाटक की पहली लड़ाई आरम्भ हुई तथा यह यूरोप में किस सन्धि द्वारा समाप्त हुई ?
उत्तर- यूरोप में आस्ट्रिया के राजसिंहासन के युद्ध के साथ कर्नाटक की पहली लड़ाई आरम्भ हुई। यह लड़ाई 1748 मे एक्स-ला-शैपल की सन्धि के द्वारा समाप्त हुई।।

प्रश्न 30. कर्नाटक की पहली लड़ाई किन दो यूरोपीय कम्पनियों के बीच लड़ी गई तथा उसमें किस कम्पनी का पलड़ा भारी रहा ?
उत्तर-कर्नाटक की पहली लड़ाई अंग्रेज़ी तथा फ्रांसीसी कम्पनियों के बीच लड़ी गई। इसमें ईस्ट इण्डिया कम्पनी का पलड़ा भारी रहा।

प्रश्न 31. कर्नाटक की दूसरी लड़ाई के दौरान फ्रांसीसियों ने किन दो भारतीय राज्यों के झगड़ों में भाग लेने का निश्चय किया ?
उत्तर-कर्नाटक की दूसरी लड़ाई के दौरान फ्रांसीसियों ने हैदराबाद तथा कर्नाटक के राज्यों के झगड़ों में भाग लेने का निश्चय किया।

प्रश्न 32. फ्रांसीसी सेनाओं ने कर्नाटक तथा हैदराबाद में किन दो व्यक्तियों को गद्दी दिलाई ?
उत्तर-फ्रांसीसी सेनाओं ने चन्दा साहिब को कर्नाटक में तथा मुजफ्फर जंग को हैदराबाद में गद्दी दिलवाई।

प्रश्न 33. कौन-सा फ्रांसीसी अफ़सर हैदराबाद में रहने लग गया तथा निजाम ने कौन-सा इलाका फ्रांसीसियों को दे दिया।
उत्तर-फ्रांसीसी कमाण्डर बुसे हैदराबाद में रहने लगा। निजाम ने ‘उत्तरी सरकारों’ का इलाका फ्रांसीसियों को दे दिया।

प्रश्न 34. कर्नाटक की दूसरी लड़ाई में अंग्रेजों ने मुहम्मद अली की सहायता किस भारतीय शासक के विरुद्ध की तथा इसके लिए किस अंग्रेज़ को भेजा गया ?
उत्तर-कर्नाटक की दूसरी लड़ाई में अंग्रेजों ने मुहम्मद अली की सहायता चन्दा साहिब के विरुद्ध की। मुहम्मद अली की सहायता के लिए राबर्ट क्लाइव को भेजा गया।

प्रश्न 35. कर्नाटक की तीसरी लड़ाई यूरोप के किस युद्ध के साथ जुड़ी हुई थी तथा यह कब आरम्भ हुआ एवं कब समाप्त हुआ ?
उत्तर-कर्नाटक की तीसरी लड़ाई यूरोप के सप्त-वर्षीय युद्ध के साथ जुड़ी हुई थी। यह युद्ध 1756 में आरम्भ हुआ तथा 1763 में समाप्त हुआ।

प्रश्न 36. कर्नाटक की तीसरी लड़ाई में किस अंग्रेज़ कमाण्डर ने कौन-से फ्रांसीसी गर्वनर-जनरल को हराया तथा कौन-से फ्रांसीसी जनरल को कैद किया ?
उत्तर-कर्नाटक की तीसरी लड़ाई में अंग्रेज़ी कमाण्डर आयर कूट ने फ्रांसीसी गवर्नर-जनरल काऊंट लाली को परास्त किया। उसने फ्रांसीसी जनरल बुसे को कैद कर लिया।

प्रश्न 37. कर्नाटक की तीसरी लड़ाई के दौरान अंग्रेजों ने फ्रांसीसियों के किन दो मुख्य केन्द्रों पर अधिकार कर लिया ?
उत्तर-कर्नाटक की तीसरी लड़ाई के दौरान अंग्रेजों ने फ्रांसीसियों के दो मुख्य केन्द्रों पांडिचेरी तथा चन्द्र नगर पर अधिकार कर लिया।

प्रश्न 38. सिराजुद्दौला कहां का शासक था तथा इसने किस अंग्रेज़ी फैक्टरी पर तथा कब आक्रमण किया ?
उत्तर-सिराजुद्दौला बंगाल का शासक था। उसने कलकत्ता (कोलकाता) की अंग्रेज़ी फैक्टरी पर 1756 में आक्रमण किया।

प्रश्न 39. किन दो अंग्रेज अफसरों ने कलकत्ता (कोलकाता) पर दोबारा आक्रमण किया तथा कब ?
उत्तर-एडमिरल वाटसन तथा राबर्ट क्लाइव ने 1757 में दोबारा कलकत्ता (कोलकाता) पर आक्रमण कर दिया।

प्रश्न 40. प्लासी की लड़ाई कब तथा किनके बीच हुई ?
उत्तर–प्लासी की लड़ाई 23 जून, 1757 को सिराजुद्दौला तथा अंग्रेजों के बीच हुई।

प्रश्न 41. प्लासी की लड़ाई के बाद बनाए गए बंगाल के दो नवाबों के नाम बताएं।
उत्तर-प्लासी की लड़ाई के बाद मीर जाफर तथा मीर कासिम को बंगाल का नवाब बनाया गया।

प्रश्न 42. बक्सर की लड़ाई कब और किनके बीच लड़ी गई ?
उत्तर-बक्सर की लड़ाई 22 अक्तूबर, 1764 को हुई। यह लड़ाई अंग्रेजों तथा मीर कासिम के बीच हुई।

प्रश्न 43. बक्सर की लड़ाई के बाद बंगाल के दो कठपुतली नवाबों के नाम बताएं।
उत्तर-बक्सर की लड़ाई के बाद मीर जाफर तथा नजामुद्दौला को बंगाल का कठपुतली नवाब बनाया गया।

प्रश्न 44. किस अंग्रेज अफसर ने किस मुग़ल बादशाह से तथा कब बंगाल की दीवानी के अधिकार प्राप्त किए ?
उत्तर-क्लाइव ने मुग़ल बादशाह शाहआलम द्वितीय से 1765 में बंगाल की दीवानी के अधिकार प्राप्त किए।

प्रश्न 45. दीवानी के बदले अंग्रेजों ने मुगल बादशाह को क्या देना स्वीकार कर लिया ?
उत्तर-दीवानी के बदले अंग्रेजों ने मुग़ल बादशाह को 26 लाख रुपया वार्षिक खिराज देना स्वीकार कर लिया।

प्रश्न 46. दीवानी के अन्तर्गत अंग्रेजों को कौन-से दो कार्यों का दायित्व मिला तथा उन्होंने यह किसको सौंप दिया ?
उत्तर-दीवानी के अन्तर्गत अंग्रेजों को लगान वसूल करने तथा न्याय करने का दायित्व मिल गया। उन्होंने इस दायित्व को मुहम्मद रज़ा खां को सौंप दिया।

II. छोटे उत्तर वाले प्रश्न

प्रश्न 1. भारत में पुर्तगालियों ने अपनी शक्ति किन परिस्थितियों में स्थापित की ?
उत्तर-यूरोप के देश भारत के साथ अपने व्यापारिक सम्बन्ध स्थापित करने के बड़े इच्छुक थे। सबसे पहले 1498 ई० में पुर्तगाल के एक नाविक वास्कोडिगामा ने भारत का नया समुद्री मार्ग खोज निकाला। इसके कुछ समय बाद ही पुर्तगालियों ने भारत के साथ व्यापार करना आरम्भ कर दिया। धीरे-धीरे उन्होंने भारत में अपने अनेक उपनिवेश स्थापित कर लिये। 1509 ई० में अल्बुकर्क पुर्तगालियों का गवर्नर बनकर भारत आया। वह भारत में पुर्तगाली राज्य स्थापित करना चाहता था। थोड़े ही समय में उसने बीजापुर तथा मलाया पर अपना अधिकार कर लिया। उसने गोवा को अपनी राजधानी बनाया। पुर्तगालियों ने बड़ी तेज़ी से अपनी शक्ति को बढ़ाया। सोलहवीं शताब्दी में उन्होंने हिन्द महासागर की अनेक बन्दरगाहों पर अधिकार कर लिया।

प्रश्न 2. भारत में पुर्तगालियों की शक्ति कम होने के क्या कारण थे ?
उत्तर-1580 ई० में पुर्तगाल स्पेन के साथ मिल गया। स्पेन ने पुर्तगाल के उपनिवेशों की ओर कोई ध्यान नहीं दिया। इसका परिणाम यह हुआ कि गोवा, दियू और दमन को छोड़कर शेष सभी उपनिवेश उनसे छिन गए। धीरे-धीरे उनकी शक्ति का पूरी तरह पतन हो गया। उनके पतन के अनेक कारण थे। (1) पुर्तगाली अधिकारियों का अपनी मुस्लिम प्रजा से व्यवहार अच्छा न था। (2) वे लोगों को बलपूर्वक ईसाई बनाना चाहते थे। इस कारण लोग उनसे घृणा करने लगे। (3) अल्बुकर्क के पश्चात् कोई योग्य पुर्तगाली गवर्नर भारत न आया। (4) 1580 ई० में स्पेन ने पुर्तगाल को जीत कर अपने राज्य में मिला लिया। इस कारण पुर्तगाल भारत में अपने उपनिवेशों की रक्षा न कर सका।

प्रश्न 3. भारत में अंग्रेजी कम्पनी के व्यापारिक केन्द्रों तथा व्यापार के बारे में बताएं।
उत्तर- पुर्तगाली लोग भारत के व्यापार से खूब धन कमा रहे थे। उन्हें व्यापार करते देखकर अंग्रेजों के मन में भी भारत से व्यापार करने की इच्छा उत्पन्न हुई। 1600 में अंग्रेजों ने ईस्ट इण्डिया कम्पनी की स्थापना की। इस कम्पनी ने जहांगीर के शासन काल में भारत में अपना व्यापार करना आरम्भ कर दिया। इस व्यापार से कम्पनी को खूब धन मिलने लगा और इसकी शक्ति बढ़ने लगी। कुछ ही समय में इसने सूरत, कालीकट, मछलीपट्टम, बम्बई (मुम्बई), कासिम बाज़ार, हुगली, कलकत्ता (कोलकाता) आदि स्थानों पर अपनी व्यापारिक कोठियां स्थापित कर लीं। इस प्रकार भारत में अंग्रेजी व्यापारिक कम्पनी का व्यापार दिन-प्रतिदिन बढ़ता चला गया।

प्रश्न 4. फ्रांसीसी कम्पनी के विरुद्ध अंग्रेजी कम्पनी की सफलता के क्या कारण थे ?
उत्तर-फ्रांसीसी कम्पनी के विरूद्ध अंग्रेजी कम्पनी की सफलता के मुख्य कारण ये थे
(1) अंग्रेजों के पास फ्रांसीसियों से अधिक शक्तिशाली जहाज़ी बेड़ा था। (2) इंग्लैण्ड की सरकार अंग्रेज़ी कम्पनी की धन से सहायता करती थी। परन्तु फ्रांसीसी सरकार फ्रांसीसियों की सहायता नहीं करती थी। (3) अंग्रेजी कम्पनी की आर्थिक दशा फ्रांसीसी कम्पनी से काफ़ी अच्छी थी। अंग्रेज़ कर्मचारी बड़े मेहनती थे और आपस में मिल-जुल कर काम करते थे। राजनीतिक में भाग लेते हुए भी अंग्रेजों ने व्यापार का पतन न होने दिया। इसके विपरीत फ्रांसीसी एक-दूसरे के साथ द्वेष रखते थे तथा राजनीति में ही अपना समय नष्ट कर देते थे। (4) प्लासी की लड़ाई (1756 ई०) के बाद बंगाल का धनी प्रदेश अंग्रेज़ों के प्रभाव में आ गया था। यहां के अपार धन से अंग्रेज़ अपनी सेना को खूब शक्तिशाली बना सकते थे।।

प्रश्न 5. प्लासी की लड़ाई के क्या कारण थे तथा इसका क्या परिणाम निकला ?
उत्तर–प्लासी की लड़ाई 1757 ई० में अंग्रेजों तथा बंगाल के नवाब सिराजुद्दौला के मध्य हुई। उनमें कई बातों के कारण अनबन रहती थी जो प्लासी की लड़ाई का कारण बनी। सिराजुद्दौला 1756 ई० में बंगाल का नवाब बना। अंग्रेजों ने इस शुभ अवसर पर उसे कोई उपहार नहीं दिया। इसके कारण नवाब अंग्रेजों से रुष्ट हो गया। अंग्रेजी कम्पनी को 1715 ई० में करमुक्त व्यापार करने के लिए आज्ञा-पत्र मिला था, परन्तु कम्पनी के कर्मचारी अपने निजी व्यापार के लिए इसका प्रयोग करने लगे थे। नवाब यह बात सहन नहीं कर सकता था। अंग्रेज़ों ने कलकत्ता (कोलकाता) की किलेबन्दी आरम्भ कर दी थी। यह बात भी प्लासी के युद्ध का कारण बनी।

परिणाम-प्लासी के युद्ध के महत्त्वपूर्ण परिणाम निकले-

  • सिराजुद्दौला के स्थान पर मीर जाफर बंगाल का नवाब बना। नया नवाब अंग्रेजों का आभारी था और उनकी इच्छा का दास था।
  • नये नवाब ने कम्पनी को बंगाल, बिहार तथा उड़ीसा में खुला व्यापार करने की आज्ञा दे दी।
  • अंग्रेज़ों को बहुत धन मिला। नवाब ने कम्पनी के कर्मचारियों को उपहार दिए।
  • कम्पनी को कलकत्ता(कोलकाता) के समीप 24 परगना के क्षेत्र की ज़मींदारी मिल गई।

प्रश्न 6. बक्सर की लड़ाई के क्या कारण थे तथा इसका क्या परिणाम हुआ ?
उत्तर-बक्सर का युद्ध 1764 ई० में बंगाल के नवाब मीर कासिम तथा अंग्रेजों के बीच आपसी झगड़ों का परिणाम था। उनमें अनेक बातों के कारण अनबन रहती थी। मीर कासिम एक योग्य शासक था। वह अंग्रेज़ों की दृष्टि से बचकर अपनी स्थिति दृढ़ करना चाहता था। इसके लिए वह अपना कोष कलकत्ता (कोलकाता) से मुंगेर ले गया। उसने अपनी सेना को फिर से संगठित किया। इन बातों से अंग्रेजों के मन में मीर कासिम के प्रति सन्देह बढ़ने लगे।

बंगाल में केवल कम्पनी को बिना कर दिये व्यापार करने की आज्ञा थी परन्तु कम्पनी के कर्मचारी आज्ञा-पत्र की आड़ में अपना तथा भारतीय व्यापारियों का माल भी कर दिए बिना ले जाने का यत्न करने लगे। नवाब ने इस बात का प्रयत्न किया कि अंग्रेज़ व्यापारिक अधिकारों का दुरुपयोग न करें। अंग्रेजों को यह बात अच्छी न लगी। इसलिए वे नवाब से युद्ध छेड़ने का बहाना ढूँढने लगे।

परिणाम- वास्तव में बक्सर के युद्ध का बड़ा ऐतिहासिक महत्त्व है। इस युद्ध के कारण बंगाल, बिहार तथा उड़ीसा में अंग्रेज़ों की स्थिति काफ़ी दृढ़ हो गई। बक्सर की विजय ने प्लासी के अधूरे काम को पूरा कर दिया।

प्रश्न 7. अंग्रेजों ने बंगाल की दीवानी किस तरह प्राप्त की तथा इसका क्या महत्त्व था ?
उत्तर-अंग्रेज़ बंगाल के नवाब मीर कासिम को गद्दी से हटाना चाहते थे। उनके बीच 22 अक्तूबर, 1764 ई० को बक्सर का युद्ध हुआ। इसमें जीत अंग्रेजों की हुई। अब नये सिरे से मीर जाफर को बंगाल का नवाब बना दिया गया। 1765 ई० में मीर जाफर की मृत्यु हो गई और उसका पुत्र नज़ामुद्दौला नवाब बना दिया गया। परन्तु उसकी स्थिति तो कठपुतली सी भी न रही।

क्लाइव ने शाहआलम द्वितीय को इलाहाबाद और उसके आस-पास का इलाका देकर तथा 26 लाख रुपया वार्षिक खिराज देना स्वीकार करके मुग़ल बादशाह से बंगाल की ‘दीवानी’ के अधिकार ले लिए। इससे लगान वसूल करना और न्याय आदि का काम भी अंग्रेजों को मिल गया। इस प्रकार अंग्रेजों ने यह कार्य मुहम्मद रजा खां को सौंप दिया। बंगाल का नवाब अब नाममात्र का नवाब रह गया। सारा प्रशासन मुहम्मद रज़ा खां के हाथों में था और मुहम्मद रज़ा खां अंग्रेज़ों के हाथों की कठपुतली बन गया। इस प्रकार बंगाल का राज्य अंग्रेज़ों के अधिकार में आ गया।

प्रश्न 8. भारत में डच शक्ति के उत्थान की व्याख्या करो।।
उत्तर-डच व्यापारी हालैण्ड के निवासी थे। वे पुर्तगाल से पूर्वी देशों का माल खरीदते थे और उसे उत्तरी यूरोप में बेच कर काफ़ी धन कमाते थे। उनके व्यापार की मुख्य वस्तु गर्म मसाले थे। कुछ समय पश्चात् पुर्तगाल को स्पेन ने अपने देश में मिला लिया। फलस्वरूप डच व्यापारियों को पुर्तगाल से माल मिलना बन्द हो गया। 1602 ई० में डचों ने डच ईस्ट इण्डिया कम्पनी की स्थापना की। डच पार्लियामैण्ट ने इस कम्पनी को व्यापार करने के साथ-साथ दुर्ग बनाने, युद्ध तथा सन्धि करने और प्रदेश जीतने का अधिकार भी दे दिया। वे इण्डोनेशिया के गर्म मसाले के द्वीपों-जावा और सुमात्रा में अधिक रुचि लेने लगे। उन्होंने पुर्तगालियों को इण्डोनेशिया से मार भगाया और वहां के व्यापार पर अपना अधिकार स्थापित कर लिया। 1623 ई० में जब अंग्रेज़ों ने पूर्वी द्वीपों में बसने का प्रयत्न किया, तो डचों ने उसे विफल बना दिया। इस प्रकार डच शक्ति बढ़ती गई और उन्होंने सूरत, भड़ौच, कोचीन, अहमदाबाद, नागोपट्टम तथा मसौलीपट्टम में अपने व्यापारिक केन्द्र स्थापित कर लिये।

प्रश्न 9. दक्षिणी भारत में फ्रांसीसी शक्ति स्थापित करने की डुप्ले की योजना क्यों असफल हो गई ?
उत्तर-दक्षिणी भारत में फ्रांसीसी शक्ति स्थापित करने की डुप्ले की योजना अनेक कारणों से असफल रही। स्वयं योग्य . होते हुए भी परिस्थितियों तथा भाग्य ने उसका साथ नहीं दिया। फ्रांस की सरकार ने उसकी पूर्ण आर्थिक सहायता नहीं की। यद्यपि उसने भारत में अंग्रेजों को पराजित कर दिया, तो भी फ्रांसीसी सरकार ने इंग्लैण्ड से सन्धि करते समय डुप्ले की सफलता पर पानी फेर दिया। सन्धि के अनुसार डुप्ले को विजित प्रदेश तथा कैदी लौटाने पड़े। इसके अतिरिक्त फ्रांसीसी अधिकारी एकदूसरे से लड़ते-झगड़ते रहते थे। अंग्रेजों की समुद्री शक्ति ने भी उसकी योजना को विफल बना दिया।

प्रश्न 10. भारत में अंग्रेजी साम्राज्य के इतिहास में क्लाइव को एक महत्त्वपूर्ण स्थान क्यों दिया जाता है ?
अथवा भारत में क्लाइव को अंग्रेज़ी राज्य का संस्थापक क्यों कहा जाता है ?
उत्तर-क्लाइव अंग्रेजी साम्राज्य के लिए वरदान सिद्ध हुआ। इस अकेले व्यक्ति ने जो कुछ किया वे भारत में विद्यमान सारे अंग्रेज़ अधिकारी न कर सके। यदि कर्नाटक के दूसरे युद्ध में क्लाइव ने अर्काट के घेरे की सलाह न दी होती, तो भारत के अंग्रेजी साम्राज्य का अस्तित्व ही नष्ट हो जाता। इस युद्ध के बाद अंग्रेज़ एक निर्णायक शक्ति के रूप में उभरे जिसका पूर्ण श्रेय क्लाइव को जाता है। इसलिए इसे भारत में ब्रिटिश साम्राज्य का संस्थापक भी कहा जाता है। उसने अंग्रेज़ी ईस्ट इण्डिया कम्पनी के लिए बंगाल को विजय किया, द्वैध शासन द्वारा प्रशासनिक ढांचे की नींव रखी और बंगाल में डचों की शक्ति को समाप्त किया। उसने इलाहाबाद की सन्धि द्वारा कम्पनी के लिए बंगाल, बिहार तथा उड़ीसा की दीवानी प्राप्त की और मुग़ल सम्राट को कम्पनी का पेन्शनर बना दिया। इसी कारण इसे अंग्रेजी साम्राज्य के इतिहास में एक महत्त्वपूर्ण स्थान प्राप्त है।

IV. निबन्धात्मक प्रश्न

प्रश्न 1. दक्षिण भारत में अंग्रेज़ फ्रांसीसी संघर्ष अथवा कर्नाटक की लड़ाइयों का संक्षिप्त वर्णन करें।
अथवा कर्नाटक के तीनों युद्धों का अलग-अलग वर्णन करते हुए उनके कारणों, घटनाओं तथा परिणामों की चर्चा कीजिए।
उत्तर-1744 से 1763 ई० तक दक्षिणी भारत में अंग्रेजों और फ्रांसीसियों के बीच एक लम्बा संघर्ष हुआ। उनके बीच तीन युद्ध हुए जो कर्नाटक के युद्धों के नाम से प्रसिद्ध हैं।

1. कनाटक का पहला युद्ध –

कर्नाटक का पहला युद्ध 1746 से 1748 ई० तक हुआ। इस युद्ध का वर्णन इस प्रकार है :-
कारण-

  • यूरोप में इंग्लैण्ड तथा फ्रांस के बीच घोर शत्रुता थी। इसलिए भारत में भी ये दोनों जातियां एक-दूसरे को अपना शत्रु समझती थीं।।
  • अंग्रेज़ और फ्रांसीसी दोनों ही भारत के सारे व्यापार पर अपना-अपना अधिकार करना चाहते थे। इसलिए दोनों एकदूसरे को भारत से बाहर निकालने का प्रयत्न करने लगे।
  • इसी बीच इंग्लैण्ड और फ्रांस के बीच युद्ध छिड़ गया। परिणामस्वरूप भारत में भी अंग्रेजों और फ्रांसीसियों में लड़ाई शुरू हो गई।

घटनाएं-1745 ई० में अंग्रेज़ी जल सेना ने एक फ्रांसीसी बेड़े पर अधिकार कर लिया और पांडिचेरी पर आक्रमण करने का प्रयास किया। बदला लेने के लिए फ्रांसीसी गवर्नर-जनरल डुप्ले ने 1746 ई० में मद्रास (चेन्नई) पर अधिकार कर लिया। क्योंकि मद्रास, (चेन्नई) कर्नाटक, राज्य में स्थित था, इसलिए अंग्रेजों ने कर्नाटक के नवाब से रक्षा की प्रार्थना की। नवाब ने युद्ध रोकने के लिए 10 हजार सैनिक भेज दिए। इस सेना का सामना फ्रांसीसियों की एक छोटी-सी सैनिक टुकड़ी से हुआ। फ्रांसीसी सेना ने नवाब की सेनाओं को बुरी तरह पराजित किया। 1748 ई० में यूरोप में युद्ध बन्द हो गया। परिणामस्वरूप भारत में भी दोनों जातियों के बीच युद्ध समाप्त हो गया।

परिणाम-

  • इस युद्ध में फ्रांसीसी विजयी रहे। फलस्वरूप भारत में उनकी शक्ति की धाक जम गई।
  • युद्ध की समाप्ति पर दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के विजित प्रदेश लौटा दिए।

2. कर्नाटक का दूसरा युद्ध-
कारण-(1) अंग्रेज़ तथा फ्रांसीसी दोनों ही भारत में साम्राज्य स्थापित करना चाहते थे। वे एक-दूसरे को भारत से बाहर निकालना चाहते थे।
(2) हैदराबाद तथा कर्नाटक के राज्यों की स्थिति के कारण भी कर्नाटक का दूसरा युद्ध हुआ। इन दोनों राज्यों में राजगद्दी के लिए दो-दो प्रतिद्वन्दी खड़े हो गये। हैदराबाद में नासिर जंग तथा मुज़फ्फर जंग और कर्नाटक में अनवरुद्दीन तथा चन्दा साहिब। फ्रांसीसी सेना नायक इप्ले ने मुजफ्फर जंग और चन्दा साहिब का साथ दिया और उन्हें राजगद्दी पर बिठा दिया। बाद में मुज़फ्फर जंग की मृत्यु पर निजाम के तीसरे पुत्र सलाबत जंग को हैदराबाद की राजगद्दी पर बिठाया गया। चन्दा साहिब का विरोधी अनवरुद्दीन लड़ता हुआ मारा गया और उसके पुत्र मुहम्मद अली को। त्रिचनापल्ली में घेर लिया गया। फलस्वरूप चन्दा साहिब ने फ्रासीसियों को बहुतसा धन तथा प्रदेश दिए। मुजफ्फर जंग से भी फ्रांसीसियों को काफ़ी सारा धन प्राप्त हुआ था। इस प्रकार भारत में उनका प्रभाव बढ़ने लगा।

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(3) फ्रांसीसी प्रभाव को बढ़ते देखकर अंग्रेज़ों को ईर्ष्या हुई। उन्होंने शीघ्र ही अनवरुद्दीन के पुत्र मुहम्मद अली का साथ दिया और युद्ध-क्षेत्र में उत्तर आये।
घटनाएं-अंग्रेजों ने सर्वप्रथम मुहम्मद अली को छुड़ाने का प्रयत्न किया। इस काम के लिए कम्पनी के एक क्लर्क क्लाइव ने चन्दा साहिब की राजधानी अर्काट को घेरे में लेने का सुझाव दिया। ज्यों ही अंग्रेजी सेनाओं ने अर्काट को घेरे में ले लिया, चन्दा साहिब को चिन्ता हुई। उसने शीघ्र ही त्रिचनापल्ली का घेरा उठा लिया। इसी बीच क्लाइव ने अर्काट को भी जीत लिया। फ्रांसीसी सेनाओं को कई अन्य स्थानों पर भी पराजित किया गया। चन्दा साहिब को बन्दी बना लिया गया और उसका वध पर दिया गया। शीघ्र ही फ्रांसीसियों ने युद्ध को बन्द करने की घोषणा कर
दी।

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परिणाम-

  • दोनों जातियों ने एक-दूसरे के जीते हुए प्रदेश लौटा दिए।
  • उन्होंने एक-दूसरे को भविष्य में देशी नरेशों के झगड़ों में भाग न लेने का वचन दिया।
  • इस युद्ध के कारण भारत में फ्रांसीसियों की प्रतिष्ठा कम हो गई।

3. कर्नाटक का तीसरा युद्ध-

कर्नाटक का तीसरा युद्ध 1756 ई० से 1763 ई० तक लड़ा गया। दूसरे युद्ध की भान्ति इस युद्ध में भी फ्रांसीसी पराजित हुए और अंग्रेज़ विजयी रहे।
कारण-1756 ई० में इंग्लैण्ड और फ्रांस के बीच यूरोप में एक बार फिर युद्ध (सप्तवर्षीय) युद्ध छिड़ गया। परिणाम यह हुआ कि भारत में भी फ्रांसीसियों और अंग्रेजों के बीच युद्ध आरम्भ हो गया।

घटनाएं-फ्रांसीसी सेनापति काऊंट लाली ने अंग्रेज़ों के किले सेंट डेविड पर अपना अधिकार कर लिया। फिर उसने मद्रास (चेन्नई) पर आक्रमण किया; परन्तु वहां उसे पराजय का मुंह देखना पड़ा। 1760 ई० में एक अंग्रेज़ सेनापति आयरकूट ने भी वन्देवाश की लड़ाई में फ्रांसीसियों को बुरी तरह हराया। इसके तीन वर्ष बाद पेरिस की सन्धि के अनुसार यूरोप में सप्तवर्षीय युद्ध बन्द हो गया। परिणामस्वरूप भारत में भी दोनों जातियों का युद्ध समाप्त हो गया।

परिणाम-

  • फ्रांसीसियों की शक्ति लगभग नष्ट हो गई। उनके पास अब केवल पांडिचेरी, माही तथा चन्द्रनगर के प्रदेश ही रहने दिए गए। वे इन प्रदेशों में केवल व्यापार कर सकते थे।
  • अंग्रेज़ भारत की सबसे बड़ी शक्ति बन गए। अब भारत में उनके साथ टक्कर लेने वाली कोई यूरोपियन जाति न रही।

प्रश्न 2. भारत में अंग्रेज़ों की सफलता तथा फ्रांसीसियों की असफलता के कारणों की विवेचना कीजिए।
उत्तर-भारत में अंग्रेज़ों की सफलता तथा फ्रांसीसियों की असफलता के मुख्य कारण निम्नलिखित थे

  • अंग्रेज़ों का शक्तिशाली बेड़ा-अंग्रेजों के पास एक शक्तिशाली समुद्री बेड़ा था। इसकी सहायता से वे आवश्यकता के समय इंग्लैण्ड से सैनिक और युद्ध का सामान मंगवा सकते थे। इसके विपरीत फ्रांसीसियों का समुद्री बेड़ा कमजोर था।
  • अच्छी आर्थिक दशा-अंग्रेज़ों की आर्थिक दशा काफ़ी अच्छी थी। वे युद्ध के समय भी अपना व्यापार जारी रखते थे। परन्तु फ्रांसीसी राजनीति में अधिक उलझे रहते थे जिसके कारण उनके पास धन का अभाव था।
  • इंग्लैण्ड द्वारा धन से सहायता-इंग्लैण्ड की सरकार भारत में अंग्रेजी कम्पनी की धन से सहायता करती थी। इसके विपरीत फ्रांसीसियों को उनकी सरकार कोई सहायता नहीं देती थी।
  • अंग्रेजों की बंगाल विजय-बंगाल विजय के कारण भारत का एक धनी प्रान्त अंग्रेजों के हाथ में आ गया। युद्ध जीतने के लिए धन की बड़ी आवश्यकता होती है। युद्ध के दिनों में अंग्रेज़ों का बंगाल में व्यापार चलता रहा। यहां के कमाये गये धन के कारण उन्हें दक्षिण के युद्धों में विजय मिली।
  • डुप्ले की वापसी-फ्रांसीसी सरकार द्वारा डुप्ले को वापस बुलाना एक भूल थी। डुप्ले भारत की राजनीति से परिचित था। उसे यह पता था कि साम्राज्य स्थापित करने की योजना को किस प्रकार लागू करना है, परन्तु डुप्ले के वापस चले जाने के कारण फ्रांसीसियों की स्थिति एक ऐसे जहाज़ की तरह हो गई जिसका कोई चालक न हो।
  • परिश्रमी कर्मचारी-अंग्रेज़ कर्मचारी बड़े परिश्रमी थे। वे एक होकर कार्य करते थे। इसके विपरीत फ्रांसीसी कर्मचारी एक-दूसरे से द्वेष रखते थे। परिणामस्वरूप फ्रांसीसी अंग्रेज़ों का सामना न कर सके।
  • योग्य अंग्रेज सेनानायक-अंग्रेज़ों में क्लाइव, सर आयरकूट और मेजर लारेंस आदि अधिकारी बड़े ही योग्य थे। इसके विपरीत फ्रांसीसी सेनानायक डुप्ले, लाली और बुसे इतने योग्य नहीं थे। यह बात भी अंग्रेज़ों की विजय का कारण थी।
  • काऊंट लाली की भूल-कर्नाटक के तीसरे युद्ध में फ्रांसीसी काऊंट लाली ने एक बहुत बड़ी भूल की। उसने अपने साथ बुसे को हैदराबाद से बुला दिया। बुसे के हैदराबाद छोड़ते ही हैदराबाद का निज़ाम अंग्रेजों से मिल गया। परिणामस्वरूप अंग्रेजों की शक्ति बढ़ गई और वे फ्रांसीसियों को पराजित करने में सफल रहे।

प्रश्न 3. प्लासी तथा बक्सर की लड़ाइयों के सन्दर्भ में यह बताओ कि अंग्रेजों ने बंगाल में अपना राज्य कैसे स्थापित किया ?
अथवा इलाहाबाद की संधि (1765 ई०) क्या थी ? भारत में अंग्रेजी साम्राज्य की स्थापना में इसका क्या योगदान था ?
उत्तर-अंग्रेजों को बंगाल में अपना राज्य स्थापित करने के लिए दो महत्त्वपूर्ण लड़ाइयां लड़नी पड़ी। ये लड़ाइयां थींप्लासी की लड़ाई तथा बक्सर की लड़ाई। प्लासी की लड़ाई अंग्रेजों तथा बंगाल के नवाब सिराजुद्दौला के बीच 1757 ई० में हुई। नवाब सिराजुद्दौला पराजित हुआ और उसके स्थान पर मीर जाफर को बंगाल का नवाब बनाया गया। नये नवाब ने कम्पनी को अनेक व्यापारिक सुविधाएं दीं और बहुत-सा धन भी उपहार के रूप में दिया। 1764 ई० में अंग्रेजों ने बक्सर की लड़ाई में बंगाल के नवाब शुजाउद्दौला ने भी उसकी सहायता की थी। अंग्रेजों ने इस विजय का लाभ 1765 ई० में इलाहाबाद की सन्धि द्वारा उठाया और बंगाल में अपने पांव पक्की तरह से जमा लिए। अंग्रेजों द्वारा बंगाल विजय के लिए लड़े गए दोनों युद्धों तथा इलाहाबाद की सन्धि का वर्णन इस प्रकार है-

प्लासी की लड़ाई-23 जून, 1757 ई० को प्लासी के मैदान में दोनों पक्षों में युद्ध आरम्भ हो गया। युद्ध के आरम्भ होते ही मीर जाफर तथा नवाब के कुछ अन्य सेनापति दूर खड़े होकर युद्ध का तमाशा देखने लगे। अकेला नवाब अधिक देर तक न लड़ सका। युद्ध में उसका एक विश्वसनीय सेनापति मीर मदन भी मारा गया। परिणामस्वरूप उसकी सेना में भगदड़ मच गई और अंग्रेज़ विजयी रहे। नवाब स्वयं प्राण बचाकर मुर्शिदाबाद भाग गया। परन्तु वहां मीर जाफर के पुत्र मीरन ने उसका वध कर दिया। युद्ध के बाद मीर जाफर को बंगाल का नया नवाब बनाया गया। कम्पनी को नये नवाब से 24 परगनों का प्रदेश मिल गया। अंग्रेजों को बहुत-सा धन भी मिला। मीर जाफर ने कम्पनी को लगभग 70 लाख रुपया दिया। इस प्रकार अंग्रेजों के लिए भारत में राज्य स्थापित करने का मार्ग खुल गया। बंगाल जैसे प्रान्त पर प्रभुत्व स्थापित हो जाने से उनके साधन काफ़ी बढ़ गए। किसी इतिहासकार ने ठीक ही कहा है-“इसने (प्लासी की लड़ाई ने) अंग्रेजों के लिए बंगाल और अन्ततः सम्पूर्ण भारत का स्वामी बनाने का मार्ग प्रशस्त किया।”

बक्सर की लड़ाई-23 अक्तूबर, 1764 ई० को मीर कासिम अपनी सेना सहित जिसमें 600 सैनिक थे बंगाल की ओर बढ़ा। उसका सामना करने के लिए अंग्रेजों ने मेजर मुनरो के नेतृत्व में एक सेना भेजी। बक्सर के स्थान पर दोनों में टक्कर हो गई। एक भयंकर युद्ध के पश्चात् मीर कासिम पराजित हुआ और प्राण बचाकर भाग निकला। शाह आलम तथा शुजाउद्दौला ने आत्म-समर्पण कर दिया। इस प्रकार अंग्रेज़ विजयी रहे। अंग्रेजों के लिए इस युद्ध के महत्त्वपूर्ण परिणाम निकले-

  • कम्पनी का बंगाल पर अधिकार हो गया।
  • अंग्रेजों को मुग़ल सम्राट् से बंगाल, बिहार तथा उड़ीसा की दीवानी मिल गई।
  • दीवानी के बदले अंग्रेजों ने मुग़ल सम्राट को 26 लाख रुपये वार्षिक पेंन्शन तथा कड़ा और इलाहाबाद के प्रदेश दिए। इस तरह सम्राट अंग्रेज़ों का कृपा पात्र बन गया।
  • अवध का नवाब शुजाउद्दौला भी इस युद्ध में पराजित हुआ था। उसने अंग्रेजों को 50 लाख रुपये हरज़ाने के रूप में दिए।

इलाहाबाद की सन्धि-अंग्रेज़ों ने अपनी बक्सर की विजय का लाभ 1765 ई० में इलाहाबाद की सन्धि द्वारा उठाया। इसके फलस्वरूप अवध के नवाब ने बक्सर के युद्ध की क्षति पूर्ति के लिए 15 लाख रुपया देना स्वीकार कर लिया। उससे कड़ा और इलाहाबाद के प्रदेश भी ले लिए गए। अवध की रक्षा के लिए अवध में एक अंग्रेज सेना रखने की व्यवस्था की गई जिसका खर्च अवध के नवाब को देना था। अंग्रेज़ अवध में बिना कोई कर दिए व्यापार कर सकते थे। इस प्रकार इलाहाबाद की सन्धि से अवध एक मध्यस्थ राज्य (Buffer State) बन गया। मुग़ल सम्राट शाहआलम से क्लाइव ने अलग समझौता किया। 9 अगस्त, 1765 को उसने शाह आलम से भेंट की। उसने कड़ा तथा इलाहाबाद के प्रदेश शाहआलम को सौंप दिए और इसके बदले में बंगाल, बिहार तथा उड़ीसा की दीवानी के अधिकार प्राप्त कर लिए। यह भी निश्चित हुआ कि कम्पनी सम्राट को 26 लाख रुपया वार्षिक देगी। दीवानी का मिलना कम्पनी के लिए वरदान सिद्ध हुआ। क्लाइव ने एक तीर से दो निशाने किए। उसने मुग़ल सम्राट को भी अपनी मुट्ठी में कर लिया और अंग्रेज़ी कम्पनी को बंगाल की सर्वोच्च शक्ति भी बना दिया।

प्रश्न 4. लॉर्ड क्लाइव को भारत में अंग्रेजी साम्राज्य का संस्थापक क्यों कहा जाता है ? किन्हीं पांच बिंदुओं के आधार पर इसे स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-इसमें कोई सन्देह नहीं कि भारत में अंग्रेज़ी राज्य का संस्थापक लॉर्ड क्लाइव था। उससे पूर्व और उसके बाद अंग्रेज़ अधिकारी भारत में आए परन्तु किसी ने ‘क्लाइव’ जैसी निपुणता नहीं दिखाई। उससे पूर्व भारत में कभी अंग्रेजी राज्य स्थापित नहीं हुआ था। बाद में भी जो कुछ हुआ वह क्लाइव द्वारा स्थापित राज्य का विकास मात्र ही था। निम्नलिखित कार्यों के कारण क्लाइव को भारत में ब्रिटिश राज्य का संस्थापक कहा जाता है :-

1. अर्काट की विजय-अर्काट की विजय का सम्बन्ध कर्नाटक के दूसरे युद्ध से है। इस लड़ाई में अंग्रेज़-फ्रांसीसी एकदूसरे के विरुद्ध लड़ रहे थे। फ्रांसीसियों ने अंग्रेज़ों पर पूरा दबाव डाला हुआ था और उनकी विजय निश्चित जान पड़ती थी। यदि इस युद्ध में फ्रांसीसी जीत जाते तो भारत से अंग्रेजी कम्पनी को अपना बोरिया-बिस्तर गोल करना पड़ता। युद्ध में अंग्रेजों की स्थिति बड़ी डावांडोल थी, परन्तु क्लाइव ने युद्ध का पासा ही पलट दिया। उसने अर्काट के घेरे का सुझाव दिया। अर्काट पर अंग्रेजों का अधिकार होते ही फ्रांसीसी पराजित हुए और दक्षिण में अंग्रेज़ी प्रभाव नष्ट होने से बच गया।

2. प्लासी की विजय-प्लासी की विजय भारत में अंग्रेजी साम्राज्य का द्वार माना जाता है। इस विजय के कारण अंग्रेजों का प्रभाव बढ़ गया। बंगाल का नवाब उनके हाथों की कठपुतली बन गया। वे जिसे चाहते, बंगाल का नवाब बना सकते थे। इस विजय का एकमात्र श्रेय क्लाइव को ही जाता है। इस विजय से दो लाभ पहुंचे। एक तो बंगाल अंग्रेजी साम्राज्य की आधारशिला बन गया। दूसरे, बंगाल के धन के कारण अंग्रेज़ भारत में फ्रांसीसी शक्ति को नष्ट करने में पूर्णतया सफल रहे।

3. दीवानी की प्राप्ति-दक्षिण और बंगाल में अंग्रेजी प्रभाव बढ़ना ही साम्राज्य की स्थापना के लिए काफ़ी नहीं था। कर इकट्ठा करने के लिए अधिकार प्राप्त होना शासन का महत्त्वपूर्ण तत्त्व माना जाता है। कहते हैं, “शासक वही जो कर उगाहे।” यह महत्त्वपूर्ण कार्य भी क्लाइव ने ही अंग्रेजों के लिए लिया। उसने 1765 ई० में मुग़ल सम्राट शाह आलम के साथ इलाहाबाद की सन्धि की। इसके अनुसार अंग्रेजों को बंगाल, बिहार और उड़ीसा की दीवानी प्राप्त हो गई। दीवानी से अभिप्राय यह था कि उन्हें इन प्रान्तों से भूमि कर उगाहने का अधिकार मिल गया।

4. शाह आलम का संरक्षण-क्लाइव मुग़ल सम्राट शाह आलम को पूर्ण रूप से अंग्रेज़ी सत्ता के प्रभाव के अधीन ले गया। उसने अपनी इच्छानुसार अंग्रेज़ी कम्पनी के लिए अधिकार प्राप्त किए। मुग़ल सम्राट पर अधिकार मात्र ही उस समय बड़ी प्रतिष्ठा की बात मानी गई। इसका अन्य भारतीय शक्तियों पर बड़ा प्रभाव पड़ा।

5. सुयोग्य शासक-एक अच्छा साम्राज्य-निर्माता होने के साथ-साथ एक कुशल प्रशासक भी होता है। क्लाइव में भी ये दोनों गुण विद्यमान थे। उसने कम्पनी के कर्मचारियों को भेंट लेने की मनाही कर दी, उनके निजी व्यापार पर रोक लगा दी और उनका दोहरा भत्ता बन्द कर दिया। इस तरह ज्यों ही कम्पनी शासक के रूप में उभरी, क्लाइव ने उसके स्वरूप को स्थिरता प्रदान की।

सच तो यह है कि क्लाइव ने बड़े क्रम से भारत में अंग्रेज़ी सत्ता स्थापित की। सर्वप्रथम उसने दक्षिण में अंग्रेज़ी प्रभाव की सुरक्षा की, फिर उसने बंगाल पर महत्त्वपूर्ण विजय प्राप्त की और अन्त में कम्पनी की राजनीतिक शक्ति में वृद्धि की। इस तरह उसने राजनीतिज्ञ तथा संगठनकर्ता के रूप में कम्पनी को ठोस रूप प्रदान किया। किसी ने ठीक ही कहा है, “लॉर्ड क्लाइव भारत में अंग्रेजी साम्राज्य का कर्णधार था जिसने न केवल साम्राज्य की नींव ही रखी, बल्कि उसको दृढ़ भी बनाया।”

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