Class 7 Social Notes Chapter 19 बाज़ार

आप पेन, नोटबुक, पुस्तकें खरीदने के लिए दुकान जाते होंगे। आपके घर के लिए भी चीज-वस्तुओं की खरीदी की जाती होगी। आपको लगता होगा कि ये सभी चीज-वस्तुएँ कौन बनाता होगा? किस तरह ये वस्तुएँ दुकानों तक पहुँचती होंगी? इन चीज-वस्तुओं को खरीदनेवाले कौन होंगे? इन चीज-वस्तुओं को बेचने वाले कौन होंगे? आइए, मित्रों आज हम इसके विषय में अध्ययन करें।

बाजार

चीज-वस्तुओं की बिक्री करती दुकानें जहाँ हों वह स्थान अर्थात् बाजार। बाजार अर्थात् जहाँ क्रेता और विक्रेता इकट्ठे होते हों, वह स्थल। बाजार में अनेक चीज-वस्तुओं की बिक्री होती है। जैसे कि सब्जियाँ, फल, साबुन, दंतमंजन, मसाले, ब्रेड, बिस्कुट, अनाज, दाल, चावल, कपड़ा, पुस्तकें, नोटबुक, पेन, पेन्सिल, बूट-जुराब, मोबाइल फोन, साइकल, टी.वी., फ्रिज आदि सूची बनाएं तो कितनी लम्बी सूची तैयार होगी। ऐसी अनेक वस्तुएँ हम बाजार में जाकर खरीदते हैं।

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बाजार के प्रकार

हम अपने दैनिक जीवन उपयोगी वस्तुओं की खरीदी अलग-अलग बाजार से करते हैं। जैसे कि, हमारे आसपास मोहल्ला बाजार, साप्ताहिक बाजार अथवा गुजरी बाजार, बड़े-बड़े शॉपिंग मॉल, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, नियंत्रित बाजार और ऑनलाइन बाजार।

मोहल्ला बाजार : हम दैनिक जीवन की उपयोगी वस्तुएँ अपने आस-पास की दुकानों से खरीदते हैं। जैसे कि डेयरी से दूध, दहीं, छाछ, किराणा की दुकानों से तेल-मसाला और गृह उपयोगी वस्तुएँ, स्टेशनरी की दुकान से पेन, पेन्सिल, नोटबुक, पुस्तकें आदि और दवा की दुकान से दवाइयाँ खरीदते हैं। तथा मार्गों के आस-पास छोटी दुकानें अथवा ठेलों से, सब्जियाँ अथवा वारत्योहार पर खिलौने, पतंग अथवा अन्य वस्तुएँ खरीदते हैं।

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  • ये दुकानें हमारे घर के आस-पास होती हैं।
  • हमारी आवश्यकता के अनुसार दिन के समय चाहे जब खरीदी कर सकते हैं।
  • ये दुकानदार अपने नियमित ग्राहकों को उधार पर भी बिक्री करते हैं।

गुजरी अथवा साप्ताहिक बाजार : साप्ताहिक बाजार किसी एक निश्चित दिन पर ही लगती है। इसलिए इन्हें साप्ताहिक बाजार कहते हैं। कुछ क्षेत्रों में इन्हें ‘हाट’ कहा जाता है। उदाहरण : प्रत्येक शनिवार को यह बाजार लगती हो तो शनिवारी बाजार। व्यापारी दिन के समय अपनी बेचनेवाली चीजवस्तुएँ लाते हैं और शाम तक दुकान समेटकर चले जाते हैं। दूसरे दिन किसी अन्य स्थान पर जाकर वहाँ दुकान लगाते हैं। देश भर में अनेक स्थानों पर ऐसे हजारों बाजार लगते हैं। जिनमें लोग अपनी रोजमर्रा की उपयोगी वस्तुएँ खरीदते हैं।

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  • जरूरी कई वस्तुएँ एक ही स्थान पर मिलती हैं।
  • छोटे व्यापारी और कारीगर रोजगार प्राप्त करते हैं।
  • व्यापारी दुकान का किराया, बिजली, कर, कर्मचारी का वेतन आदि खर्च नहीं होने से चीज वस्तुएँ सस्ते दर पर बेच सकते हैं।

शॉपिंग कॉम्प्लेक्स और मोल

हमारे आसपास की दुकानों और साप्ताहिक बाजारों के अलावा बड़े शहरों में अन्य बाजार भी होते हैं। एक ही बिल्डिंग में एक साथ अलग-अलग प्रकार की दुकानें होती हैं। जिसे शॉपिंग कॉम्प्लेक्स कहते हैं। जिसमें हमें छोटी-बड़ी कम्पनी की ब्रांडेड और बिना ब्रान्ड की वस्तुएँ मिलती हैं। बड़ी कंपनी सार्वजनिक खबरों द्वारा ऊँची गुणवत्ता के विज्ञापन करके इन ब्रान्डेड वस्तुओं को ऊँचे भाव पर ऐसे बड़े शो-रूमों में बेचती हैं। जिनकी कीमत शॉपिंग मोल अधिक होने से कुछ लोग ही ऐसी वस्तुएँ खरीदते हैं।

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  • ग्राहक को केन्द्र में रखकर दुकानें सजाई जाती हैं।
  • विविध ब्रान्ड की अनेक वस्तुएँ एक साथ बिकती हैं। जिससे ग्राहक को पसंदगी का अवसर मिलता है।
  • वातानुकूलित मोल में ग्राहक पर्याप्त समय देकर विशेष छूट मिलती हो, ऐसी वस्तुएँ खरीद सकता है।
  • ग्राहक को वस्तु की छपी कीमत पर विशेष छूट दी जाती है।
  • ग्राहक काउन्टर पर नगद, क्रेडिट कार्ड या डेबिट कार्ड, नेट बैंकिंग से कीमत चुका सके, ऐसी व्यवस्था होती है।

नियंत्रित बाजार (मार्केटिंग यार्ड) (APMC)

कृषि की सफलता में अच्छा उत्पादन प्राप्त करने के उपरांत अच्छी बाजार व्यस्था होना भी जरूरी है। आजादी के बाद के चरण में कृषि उत्पादन की बिक्री की निश्चित व्यवस्था न होने से किसानों का शोषण होता था। इसको रोकने के लिए सरकार ने नियंत्रित बाजार व्यवस्था अर्थात् मार्केटिंग यार्ड (खेती-बाड़ी उत्पादन बाजार समिति) की व्यवस्था की है। किसान फसल – बिक्री में ठगा न जाए और उसकी फसल-उत्पादन का उचित भाव प्राप्त करे और इस तरह वह आर्थिक समृद्ध बने इसके लिए गुजरात की विविध तहसील केन्द्रों पर खेतीबाड़ी उत्पादन बाजार समितियों की स्थापना की गई है। जैसे,

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  • किसानों की कृषि उपजों को सार्वजनिक नीलामी के आधार पर बेचा जाता है।
  • व्यापारियों का नैतिक स्तर बना रहता है।
  • भाव निर्धारण में पारदर्शिता बढ़ती है।
  • किसानों को उनकी कृषि उपजों का अच्छा भाव मिल सकता है।
  • व्यापारियों को अच्छा माल एक ही स्थान पर पर्याप्त मात्रा में मिल सकता है।
  • विविध सेवाएँ जैसे कि बैंकिंग, कर्ज (ऋण), बीमा, गोदाम, अन्य सुविधाओं का निर्माण आदि प्रभावी रूप से होता है।
  • रेडियो, समाचारपत्र, टी.वी. तथा ऑनलाइन मोबाइल फोन पर किसानों को कृषि-उत्पादों का दैनिक बाजार भाव मिल जाता है।
  • किसानों को मार्केटिंग यार्ड में रात्रि में ठहरने की सुविधा, उनकी फसलों का संग्रह करने के लिए गोदाम की सुविधा मिलती है।

ऑनलाइन बाजार

वर्तमान समय में ऑनलाइन शॉपिंग का प्रमाण बढ़ रहा है। बाजार में गए बिना ही हम कम्प्यूटर, मोबाइल फोन या टी.वी. पर डिजिटल पेमेन्ट करके सीधे खरीदी कर सकते हैं। ऑनलाइन शॉपिंग के लिए अनेक कंपनियाँ ग्राहकों को सीधे बिक्री करने से अधिक छूट देकर बाजार से सस्ती दर पर चीजें बेच सकती हैं। ग्राहक के घर तक चीजवस्तुएँ सीधे पहुँच जाती हैं। जिसके कारण इसका उपयोग अधिक से अधिक हो रहा है। आपने भी ऑनलाइन खरीदी की होगी। इस प्रकार अब बाज़ार हमारे घर में ही या हाथ में आ गया है ऐसा कह सकते हैं। ऑनलाइन खरीदी में सावधानी रखनी जरूरी है, अन्यथा धोखा-धड़ी का डर रहता है।

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बाजार के आसपास

हम चीजवस्तुएँ खरीदने जाते हैं ऐसे विविध प्रकार के बाजार के विषय में अध्ययन किया। आपको लगा होगा कि ये सभी दुकानदार अपनी दुकानों के लिए मालसामान कहाँ से खरीदते होंगे? चीजवस्तुओं का उत्पादन कारखाना, गृहउद्योग, घरों और खेतों में होता है, परंतु हम सीधे कारखाने या खेत से चीजवस्तुएँ नहीं खरीदते।

जो व्यापारी खेत या कारखानों, घरों में अधिक मात्रा में उत्पादित मालसामान को खरीदते हैं, उन्हें थोकबंध व्यापारी कहते हैं। वे यह सामान छोटे व्यापारियों या दुकानदारों को बेचते हैं। इस प्रकार ये खरीदी और बिक्री करनेवाले दोनों ही व्यापारी होते हैं। हम जिस दुकानदार या व्यापारी से वस्तुएँ खरीदते हैं, उसे फुटकर व्यापारी कहते हैं।

मोटरकार में उपयोग में आनेवाले विविध भाग छोटे-छोटे कारखानों में बनते हैं। कार की कंपनियाँ उन्हें खरीदकर, उन भागों को जोड़कर कार बनाती हैं, तैयार मोटरकार हम शो-रूम में से खरीदते हैं। इस प्रकार हमारे आसपास अनेक वस्तुएँ बनाकर उनका क्रय-विक्रय होता है। जिनसे हम अनजान होते हैं।

बाजार में समानता

हमने अपने आसपास के बाजार के विषय में जाना। कारखाने या खेत में उत्पादित मालसामान को बेचनेवाले और अंत में उसे खरीदनेवाले ग्राहकों के बीच सभी व्यापारी हैं। हमने साप्ताहिक बाजार से मोल तक की दुकानों और दुकानदारों की जानकारी प्राप्त की। इन दोनों दुकानदारों के बीच एक बड़ा अंतर है। एक कम पैसों से खुला व्यापार करनेवाला छोटा दुकानदार है और दूसरा अपने मोल या कॉम्प्लेक्स में अधिक पूँजी निवेश करनेवाला बड़ा दुकानदार है। छोटे दुकानदार बहुत कम लाभ पाते हैं, जबकि बड़े दुकानदार खूब लाभ प्राप्त करते हैं। ऐसे अनेक लोग हैं जो सस्ता मिलनेवाले माल-सामान भी नहीं खरीद सकते। जबकि कई ऐसे लोग भी होते हैं जो मोल में मिलती महँगी वस्तुओं की खरीदी करते हैं। इस प्रकार हमारी आर्थिक स्थिति के आधार पर हम किस बाजार के क्रेता या विक्रेता बनेंगे यह निश्चित होता है।

ग्राहक के रूप में हम अपने आसपास कई बार बड़ी उम्र के लोगों को छोटी-बड़ी वस्तुएँ बेचते देखते हैं। ऐसे बुजुर्ग पुरुष या महिला की उम्र आराम करने की होने के उपरांत वे गरीबी या मजबूरी के कारण मार्गों के आसपास वस्तुओं की बिक्री करते पाए जाते हैं। ऐसे में हमें दुकान या मोल से वस्तुएँ खरीदने की बजाय ऐसे जरूरतमंद व्यक्तियों से वस्तुएँ खरीदकर उन्हें सहायक बनना चाहिए।

बाजार में ग्राहक

‘ग्राहक अर्थात् जो मूल्य देकर अपने उपयोग के लिए चीजवस्तुएँ खरीदे अथवा सेवा प्राप्त करे वह व्यक्ति।’ आज प्रत्येक व्यक्ति किसी न किसी रूप में ग्राहक है। उदाहरण के रूप में साबुन, तेल, बिस्कुट, अनाज या अन्य वस्तु की खरीदी अथवा मोबाइल फोन रीचार्ज, बीमा, ट्रेन टिकिट बुकिंग आदि सेवा जो प्राप्त करते हैं, वे ग्राहक की व्याख्या में आते हैं। विश्व में सबसे अधिक ग्राहक भारत में हैं। भारत विश्व का सबसे बड़ा बाजार माना जाता है। ग्राहक अपनी दैनिक जीवन उपयोगी और मौज-शौक की वस्तुएँ बाजार से खरीदते हैं। ग्राहक के रूप में उन्हें वस्तु की गुणवत्ता, कीमत, वस्तु की पसंदगी और पैसे का पूरा बदला प्राप्त करने का अधिकार है।

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प्रमाणित चीजवस्तु का चिह्न (लोगो)

ग्राहकों को अच्छी गुणवत्तावाली वस्तुएँ मिलती रहें, इसके लिए सरकार ने विविध वस्तुओं के मापदण्ड निश्चित किए हैं। विशेष चिह्न(मार्क)वाली वस्तुओं की बिक्री की जाती है। गृह उपयोग की और बिजली से चलनेवाली वस्तुओं के लिए ‘आई.एस.आई. – ISI’, सोने-चाँदी के लिए ‘होलमार्क’, ऊन की बनावट के लिए ‘वुलमार्क’, खाद्यपदार्थ के लिए ‘एगमार्क’ तथा ‘एफ.एस.एस.ए.आई-FSSAI’ आदि चिह्न लगाए जाते हैं। जिसके आधार पर ग्राहक अच्छी गुणवत्तावाली वस्तुएँ खरीद सकते हैं।

इसी तरह शाकाहारी खाद्यसामग्री परClass 7 Social Notes Chapter 19 बाज़ार 7 निशानी और मांसाहारी खाद्यसामग्री पर Class 7 Social Notes Chapter 19 बाज़ार 8 चिह्न लगाया जाता है।

ग्राहक के अधिकार और कर्तव्य

बाजार में समान लक्षणोंवाली अनेक ब्रांड की असंख्य वस्तुएँ मिलती हैं। ग्राहक को उनकी सम्पूर्ण जानकारी या ज्ञान नहीं होता है। उत्पादक और ग्राहकों के बीच अनेक बिचौलिए होने से ग्राहक का शोषण होने लगा है। ग्राहकों को शोषण से बचाने के लिए ग्राहक सुरक्षा का कानून लागू है। ग्राहक वर्तमान बाजार व्यवस्था के कारण वस्तु की गुणवत्ता, पूर्ति, कीमत और सेवा जैसी प्रत्येक बात में ठगा जाता है। ग्राहक चीज अथवा सेवा के संबंध में अपना अधिकार प्राप्त कर सके ऐसे उद्देश्य के साथ भारत सरकार द्वारा संसद में कानून पास करके ‘ग्राहक सुरक्षा अधिनियम- 1986’ बनाया गया है। इस कानून के आधार पर ग्राहक को निम्नलिखित छः अधिकार मिलते हैं :

  • सुरक्षा का अधिकार : व्यक्ति के जीवन तथा स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक उत्पादों और सेवाओं के संबंध में सम्पूर्ण सुरक्षा का अधिकार अर्थात् आप कोई भी वस्तु या सेवा खरीदते हों, तो उसका उपयोग करने के बाद लम्बे समय में भी आपके स्वास्थ्य या जीवन को कोई नुकसान हो तो आप ग्राहक सुरक्षा कानून के तहत शिकायत कर सकते हैं।
  • सूचना प्राप्त करने का अधिकार : चीजवस्तु या सेवा पसंद करने के लिए वस्तु संबंधी जरूरी सम्पूर्ण जानकारी प्राप्त करना ग्राहक का अधिकार है।पसंदगी करने का अधिकार : विविध प्रकार की अनेक वस्तुओं में से ग्राहक को अपने अनुकूल वस्तु पसंद करने का अधिकार है।
  • प्रस्तुतीकरण का अधिकार : ग्राहक के अधिकार और हितों के रक्षण के लिए ग्राहक सुरक्षा मण्डल में उसकी उचित शिकायत का अधिकार है।
  • शिकायत निवारण का अधिकार : कमीयुक्त माल, क्षतियुक्त सेवा या धोखा-धड़ी की शिकायत से उपभोक्ता को हुए नुकसान का बदला प्राप्त करने का अधिकार है।
  • ग्राहक शिक्षण प्राप्त करने का अधिकार : इस अधिकार से जीवनभर जानकारीयुक्त ग्राहक बनने के लिए सभी जानकारी और ज्ञान प्राप्त करने का अधिकार है।

ग्राहक के कर्तव्य

  • ग्राहकशिक्षण से ग्राहक धोखाधड़ी से बच सकता है। खरीदी करते समय कुछ बातों के संबंध में सावधानी भी ग्राहक का कर्तव्य बनता है, जो निम्नानुसार है :
  • किसी भी वस्तु को खरीदते समय जी.एस.टी.वाले बिल को लेकर खरीदें तथा उसे लम्बे समय तक संभालकर रखें।
  • बड़ी खरीदी में तथा विशेषकर इलेक्ट्रोनिक्स वस्तुएँ आई.एस.आई. मार्क की ही खरीदनी चाहिए। दुकानदार द्वारा सही-सिक्का किया हुआ गेरन्टी कार्ड, वॉरंटी कार्ड, फ्री सर्विस कूपन आदि ध्यान ध्यान देकर प्राप्त कर लें और संभालकर रखें।
  • सोने-चाँदी जैसी खरीदी में ‘होलमार्क’वाले जेवरात ही खरीदें। व्यापारी की बातों में आकर किसी भी प्रकार के टैक्स बचाने की कोशिश न करें, हमेशा पक्का बिल लें। बिल में शुद्धता, कीमत, घड़ाई आदि सभी सूचनाएँ स्पष्ट और अलग लिखी हुई हैं या नहीं, इसका ध्यान रखें।
  • खाद्य पदार्थ ‘एगमार्क’ ‘fssai’ लोगोवाले ही खरीदने चाहिए। उनकी पैकिंग, कंपनी, ब्रान्डनेम, बैच नम्बर, उत्पादन की तारीख, एक्सपायरी डेट, इनग्रेडियन्ट (समाविष्ट घटक) आदि सभी विगतों को देखना चाहिए और मिलावट के मामलों में अचूक शिकायत करनी चाहिए।
  • दवाएँ प्रिस्क्रिप्शन के साथ खरीदनी चाहिए। उत्पादन की तारीख और एक्सापयरी डेट आदि जाँचनी चाहिए। जेनरिक दवाएँ मिलती हों तो पहले उन्हें खरीदनी चाहिए।
  • कपड़ों में कपड़ा, कलर, सिलाई, जरी, भरत, माप-साइज आदि चेक करके खरीदने चाहिए।
  • पेट्रोल या सी.एन.जी. पंप पर मीटर जीरो होने के बाद ही वाहन में ईंधन भरवाना चाहिए। गैस-वितरण में सिलैण्डर का वजन और सुरक्षा के संबंध में जाँच करनी चाहिए।
  • शैक्षिणक संस्थाओं में सुरक्षा की व्यवस्था, शिक्षकों की योग्यता की जानकारी और फीस भरने के बाद रसीद लेनी चाहिए।
  • जीवन वीमा पॉलिसी या वाहन बीमा के संयोगों में पॉलिसी की शर्ते समझकर असली पॉलिसी का दस्तावेज जरूर प्राप्त कर लें।
  • अनावश्यक और गलत खरीदी से बचें। सेल, भेंटकूपन, इनामी योजना आदि लुभावने विज्ञापनों से बचें और यदि ठगे गए हों, तो समाचारपत्रों द्वारा उसकी जानकारी दूसरों को देनी चाहिए, जिससे वे ठगे जाने से बच सकें।

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इतना जानिए-

भारत सरकार ने 15 मार्च को ‘विश्व ग्राहक दिवस’ और 24 दिसम्बर को ‘राष्ट्रीय ग्राहक अधिकार दिवस’ के रूप में मनाने का निश्चय किया गया है। ग्राहकों की शिकायतों का तीव्र और बिना खर्च निवारण करने के लिए प्रत्येक जिले, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर ग्राहक सुरक्षा मण्डल और ग्राहक अदालतों की रचना की गई है।
ग्राहक सुरक्षा की शिकायतों के लिए ग्राहक हेल्पलाइन टोल फ्री नं. : 1800 233 0222

उत्पादन से बाजार तक की यात्रा

हमने बाजार, बाजार के प्रकार और अपने आसपास के बाजार के विषय में अध्ययन किया। हमारे आसपास की अनेक प्रक्रियाएँ बाजार व्यवस्था पर प्रभाव डालती हैं। प्रत्येक व्यक्ति अपनी आवश्यकता की वस्तुएँ खरीदकर बाजार व्यवस्था को चालक बल प्रदान करता है। अब हम शर्ट और पैन्ट बनाने में उपयोग में आनेवाले कपड़े की बात करके बाजार की विशेष जानकारी प्राप्त करेंगे। आप सभी जानते ही हैं कि, कपड़ा बनाने के लिए कपास कच्चा माल है। कपास की बुवाई से शुरू करके शर्ट-पैन्ट की बिक्री तक बाजार की श्रृंखला एक-दूसरे से किस तरह से जुड़ी है, यह जानें। सौराष्ट्र के रामपर गाँव में मगनभाई के पास 5 हेक्टर जमीन है। उसने अपने खेत में खरीफ की फसल की बुवाई बीज करने हेतु कपास के बीज की बिक्री करनेवाली दुकान से कपास के प्रमाणित किए हुए बीज खरीदे। जून महीने में बरसात आए उससे पहले ही हल चलाकर तैयार रखे अपने खेत में कपास की बुवाई कर दी। प्रथम बरसात बोने लायक होने से दो-चार दिनों में जमीन में से कपास के अंकुर फूटकर बाहर आ गए। बरसात के कारण कपास के साथ खर-पतवार भी उग जाते हैं। कपास के पौधे के पास से खर-पतवार दूर करके खेत एकदम खर-पतवार मुक्त कर दिया। खेत में आड़ी-तिरछी मेड़ करके दो-तीन अच्छी बरसात के साथ रासायनिक खाद भी छिड़क दिया। नवरात्रि आने तक तो आपके सिर तक पहुँचे ऐसा कपास खेतों में लहराने लगा। फूल खिलकर उसमें बड़ी-बड़ी गाँठें भी आ गई थी और अब गाँठों में से सफेद कपास बाहर दिखने लगी अर्थात् मगनभाई मजदूरों से यह कपास बिनवाकर बोझ बाँधकर अपने घर में रखने लगे।

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अंत में मगनभाई उसके खेत में उत्पन्न हुआ कपास बेचने के लिए ट्रैक्टर में भरकर तहसील केन्द्र में स्थित मार्केटिंग यार्ड में ले गए।

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उनके कपास की व्यापारियों ने बोली लगाई, जिसमें चुनीलाल व्यापारी ने उसका कपास खरीद लिया और मगनभाई को उसका पैसा तुरन्त मिल गया। चुनीलाल ने सारा कपास जीनिंग फैक्ट्री चलानेवाले धनजीभाई के कारखाने को बेच दिया। जीन में इस कपास में से कपास के बीज अलग करके तेल निकालनेवाले व्यापारी को बेच दिया। आप सभी जानते हो कि, कपास का तेल खाद्य तेल के रूप में उपयोग होता है और खोल पशुओं को खिलाने वाले आहार खली के रूप में उपयोगी है। जीनिंग मिल के (कारखाने) मालिक ने कपास की गांठों से धागे बनाने के लिए स्पिनिंग मिल में भेज दिया। इन धागों को अहमदाबाद की एक कपड़े की मिल ने कपड़े बनाने के लिए खरीद लिया। जिनमें से तैयार हुए कपड़े के ताके कलर करती डाइंग मिल में कलर करने के लिए भेज दिए गए। इस कपड़े को वस्त्र बनाती फैक्ट्री में अलग-अलग नाप के कटिंग करके, उसकी सिलाई करके शर्ट और पैन्ट बनाकर, उन्हें लेबल लगाकर बॉक्स में पैक करके विदेश में थोकबंध निर्यात किया गया और बाजार में भी बेचा गया। हमारे शहर के शो रूम के व्यापारी ये पैन्ट-शर्ट शरीद लाते हैं और उनसे हम पैन्ट-शर्ट खरीदते हैं।

कपास में से पैन्ट और शर्ट बनाने तक का सफर हमने देखा। कच्चे माल से तैयार होकर वस्तु कितने सारे लोगों (किसान, उत्पादक, व्यापारी, परिवहन सेवा) से गुजरकर ग्राहक तक पहुँचती है और उसमें जुड़े प्रत्येक व्यक्ति को थोड़ा-बहुत लाभ मिलता है। हम दैनिक उपयोगी चीज-वस्तुएँ बाजार से प्राप्त करते हैं। यह बाजार कई लोगों को रोजगार देता है। सड़क-मार्ग, परिवहन, बैंकिंग और संचार की सुविधाओं के कारण बाजार व्यवस्था में क्रांति आई है। विश्व के देश परस्पर व्यापार द्वारा जुड़े हैं। हमारे आसपास के बाजार और ऑनलाइन बाजार द्वारा हम वैश्विक बाजार के साथ जुड़े रहते हैं। इस प्रकार वर्तमान समय में समग्र विश्व एक बाजार है।

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