Class 7 Social Notes Chapter 3 मुगल साम्राज्य

आपने आगरा का ताजमहल देखा है? दिल्ली का लालकिला! फतेहपुर सीकरी का बुलंद दरवाजा! इन सभी स्थापत्यों का निर्माण मुगल शासकों ने करवाया था।
मुगलशासन की स्थापना से पूर्व सल्तनतयुग का शासन था। इसके उपरांत कुछ राजपूत राज्य भी थे।

मुगल सल्तनत की स्थापना

भारत में मुगल साम्राज्य की स्थापना (1526 ई.) बाबर ने की थी। उसका मूल नाम जहीरुद्दीन मुहम्मद बाबर था। बाबर और इब्राहिम लोदी के बीच (20 अप्रैल, 1526) पानीपत का युद्ध हुआ, जिसे पानीपत का प्रथम युद्ध कहते हैं। बाबर ने इस युद्ध में तोप का उपयोग करके इब्राहिम लोदी को हराया और भारत में मुगल साम्राज्य की स्थापना की।

मुगल शासक

मुगल शासकों में बाबर, हुमायूँ, अकबर, जहाँगीर, शाहजहाँ और औरंगजेब का समावेश होता है।
बाबर ( 1526 ई. – 1530 ई.) : बाबर कुशाग्र बुद्धिवाला और शक्तिशाली योद्धा था। वह फारसी और अरबी भाषा का जानकार, प्रकृति प्रेमी और लेखक था। उसने अपनी आत्मकथा ‘तुजुक-ए-बाबरी’ (बाबरनामा) लिखी थी, जो विश्वसाहित्य की प्रसिद्ध रचना है।

हुमायूँ (1530 ई. – 1540 ई., 1555 ई. – 1556 ई.) : हुमायूँ 1530 ई. में दिल्ली की गद्दी पर बैठा। हुमायूँ का अर्थ नसीबदार होता है, परंतु उसे जीवन में अनेक मुश्किलों का सामना करना पड़ा था। उसका गुजरात के सुल्तान बहादुरशाह और बिहार के शक्तिशाली शासक शेरशाह के साथ युद्ध हुआ (1540 ई.में)। कन्नौज युद्ध में शेरशाह ने हुमायूँ को हराकर उसे भारत से बाहर भगा दिया। हुमायूँ बादशाह से बेरोजगार हो गया और ईरान चला गया। परंतु कुछ वर्षों बाद फिर से भारत पर चढ़ाई की। ईरान के शहंशाह की मदद से (1545 ई.में) उसने काबुल और कंधार जीत लिया तथा (1555 ई.में) भारत पर पुनः अपनी सत्ता स्थापित की।

हुमायूँ अपने पिता की तरह ही पठन-लेखन का शौकीन था। उसने दिल्ली के पास दीनपनाह नगर बसाया था। शाम की प्रार्थना का समय हो जाने से वह पुस्तकालय की सीढ़ियों पर से तेजी से उतर रहा था और अचानक गिर जाने से उसकी मृत्यु हो गई।

शेरशाह सूरी (1540 ई. – 1545 ई.) : शेरशाह अफगान वंश का मुस्लिम था। उसका मूल नाम फरीदखाँ था। हुमायूँ को हराकर उसने भारत में सत्ता स्थापित की थी। वह समाजसुधारक और न्यायप्रिय शासक था। डाकू, लुटेरों को अंकुश में रखकर उसने राज्य में शांति की स्थापना की थी। नई डाक-व्यवस्था बनाई। उसने व्यापारियों
और यात्रियों के लिए धर्मशालाएँ बनवाईं। रुपये का चलन शुरू करवाया। विशाल सेना निर्मित की। उसने एक महान राजमार्ग ग्रांड-ट्रक-रोड का निर्माण करवाया था, जो बंगाल और उत्तर भारत तक फैला हुआ था।

शेरशाह 1545 ई. में तोप का निरीक्षण कर रहा था, तब दुर्घटना होने से उसकी मृत्यु हो गई। उसकी मृत्यु के बाद उसके जैसा कोई शक्तिशाली शासक गद्दी पर नहीं बैठा। परिणाम स्वरूप (1555 ई.में) हुमायूँ ने दिल्ली और आगरा पर आक्रमण करके अफगानों को हराकर पुनः मुगल साम्राज्य की स्थापना की।

अकबर (1556 ई. – 1605 ई.) : भारत के इतिहास में राजा के रूप में अकबर का महत्त्वपूर्ण स्थान है। उसका जन्म 1542 ई. में अमरकोट के हिंदू राजपूत राजा के घर हुआ था। हुमायूँ की मृत्यु के बाद मात्र 14 वर्ष की उम्र में वह दिल्ली का बादशाह बना था। हुमायूँ की मृत्यु के बाद अकबर और हेमू के बीच (1556 ई.में) पानीपत का द्वितीय युद्ध हुआ, जिसमें अकबर की विजय हुई।

अकबर ने पंजाब से बंगाल और दिल्ली से गुजरात तक अधिकांश भाग पर राज्य स्थापित किया था। अकबर और मेवाड़ के राणा प्रताप के बीच बहुत प्रसिद्ध हल्दीघाटी का युद्ध हुआ था। अकबर ने काबुल, कश्मीर, बलूचिस्तान से दक्षिण में अहमदनगर तक अपनी विजययात्रा करके विशाल साम्राज्य का सर्जन किया था। अकबर ने फतेहपुर सीकरी को अपनी राजधानी बनाकर अनेक भवनों का निर्माण करवाया था।

अकबर ने हिन्दुओं के प्रति उदार-नीति अपनाई। उसने राजपूतों के साथ सामाजिक संबंधों की शुरुआत की थी। उसने सेना में राजपूतों की नियुक्ति उच्च पदों पर की। राजपूतों ने भी अपनी वीरता और साहस से अकबर को भारत विजय के लिए खूब मदद की।

अकबर असांप्रदायिक राजा था। उसने सभी धर्मों के श्रेष्ठ तत्त्वों को एकत्र करके दीन-ए-इलाही नामक संप्रदाय की स्थापना की। उसने रामायण, महाभारत, अथर्ववेद, पंचतंत्र, बाइबल और कुरान जैसे महान ग्रंथों का अनुवाद फारसी में करवाया था।

अकबर समाजसुधारक भी था। उसने बाल-विवाह और सतीप्रथा का विरोध किया था। उसने यात्रा-कर रद्द कर दिया था और बलपूर्वक होनेवाले धर्मांतरण पर प्रतिबंध लगा दिया था।

अकबर कालीन भारत आर्थिक रूप से समृद्ध था। उसने सामाजिक सहिष्णुता के युग का प्रारंभ करवाया था। 1605 ई.में उसकी मृत्यु हुई तब अधिकांश भारत मुगल साम्राज्य में समाविष्ट था।

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जहाँगीर (1605 ई. – 1627 ई.): अकबर द्वारा स्थापित महान साम्राज्य को संभालने की विरासत जहाँगीर को मिली। उसने अकबर की नीतियों को चालू रखते हुए हिन्दुओं के साथ अच्छे संबंध स्थापित किए। उसने असम और दक्षिण भारत के गोलकुंडा तक विजय प्राप्त की। उसकी पत्नी नूरजहाँ चतुर और प्रतिभाशाली थी। उसने कई कलाओं को प्रोत्साहन दिया था। जहाँगीर के समय में चित्रकला का खूब विकास हुआ था। वह स्वयं भी महान चित्रकार था। (1627 ई.में) जहाँगीर की मृत्यु के बाद उसका पुत्र जागोलकंडा शाहजहाँ गद्दी पर बैठा।

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शाहजहाँ (1627 ई. – 1658 ई.) :
शाहजहाँ का उपनाम खुर्रम था। उसने दक्षिण भारत पर विजय प्राप्त की। वह अपने पिता जितना ही शक्तिशाली और कला-स्थापत्य का प्रेमी था। अपनी पत्नी मुमताज-महल की मृत्यु के बाद उसकी याद में विश्व प्रसिद्ध ताजमहल का निर्माण करवाया था। ताजमहल को दुनिया का अजूबा माना जाता है।

औरंगजेब (1658 ई. – 1707 ई.) : शाहजहाँ की बीमारी का लाभ लेकर उसके पुत्रों के बीच साम्राज्य पर आधिपत्य जमाने के लिए भयंकर आंतरिक विग्रह शुरू हुआ। शाहजहाँ के बड़े बेटे दाराशिकोह और औरंगजेब के बीच मुख्य संघर्ष हुआ। औरंगजेब ने अपने तीनों भाइयों को एक-एक करके हरा दिया। दारा की हत्या करके और मुराद को जेल की सजा देकर उसने गद्दी अपने अधिकार में कर ली। अन्य एक भाई सुजा को पराजित करके देश निकाला दे दिया।

Class 7 Social Notes Chapter 3 मुगल साम्राज्य 3

औरंगजेब ने लगभग 50 वर्ष तक राज किया। उसके राज्य में उत्तर में कश्मीर से लेकर दक्षिण में जिंजी तक और पूर्व में चटगाँव से लेकर पश्चिम में हिंदूकुश पर्वतमाला का विस्तार समाविष्ट था।

औरंगजेब सुन्नी मुस्लिम था और अत्यंत सादा जीवन जीता था। उसने अकबर की धार्मिक नीति का त्याग करके धार्मिक असहिष्णुता अपनाई। वह संगीतकला, मूर्तिपूजा और धार्मिक उत्सवों का विरोधी था। उसके समय में कई विद्रोह हुए। वह एक शक्तिशाली बादशाह था। उसने लंबे समय तक भारत के अधिकांश भाग पर शासन किया। उसकी मत्यु 1707 ई. में हुई। उसकी मृत्यु के बाद निर्बल शासक गद्दी पर आए, जिससे मुगल साम्राज्य का पतन शुरू हो गया।

राणा संग्रामसिंह : बाबर के समकालीन मेवाड़ के राणा संग्रामसिंह राणा सांगा के नाम से भी प्रसिद्ध हैं। वे वीर और साहसी थे। अनेक युद्धों में विजय प्राप्त की थी। जबकि बाबर के सामने खानवा के युद्ध में उनकी हार हुई और उनका साम्राज्य नहिवत् हो गया।

महाराणा प्रताप : मुगल साम्राज्य में अकबर का सामना करनेवाले महाराणा प्रताप मेवाड़ के प्रतापी राजा थे। अकबर ने मेवाड़ पर आक्रमण किया, जिससे दोनों के बीच हल्दीघाटी का युद्ध हुआ। अकबर विजयी हुआ, परंतु राणा प्रताप ने उदयपुर के आसपास के विस्तारों में अपनी सत्ता स्थापित की, संघर्ष चलता ही रहा। दोनों के बीच समझौते के लिए कई प्रयत्न हुए, लेकिन राणा चितौड़ छोड़ने के लिए तैयार नहीं हुए। उन्होंने गुरिल्ला युद्ध चालू | रखा। 1576 ई. में हल्दीघाटी की पराजय के बाद राणा प्रताप ने गोगुंदा को राजधानी बनाया और जीवन के अंत तक युद्ध करते रहे। बाद में डुंगरपुर के चावंड में अपनी राजधानी बनाई। 51 वर्ष की उम्र में उनकी मृत्यु हो गई।

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वीर दुर्गादास राठौड़ : दुर्गादास राठौड़ मारवाड़ के शासक जसवंतसिंह के मंत्री अशकरण राठौड़ के पुत्र थे। उनकी तुलना राणा प्रताप के साथ की जाती है। औरंगजेब के समय में उन्होंने उसका आधिपत्य स्वीकार्य नहीं किया था।

छत्रपति शिवाजी : भारत के महानतम राजाओं में स्थान रखनेवाले छत्रपति शिवाजी मराठा साम्राज्य के स्थापक थे। 1627 ई. में उनका जन्म शिवनेरी (महाराष्ट्र) में हुआ था। माता जीजाबाई और पिता शाहजी की संतान शिवाजी के जीवन पर उनके समर्थ गुरु रामदास और दादा कोंडदेव का व्यापक प्रभाव था। उन्होंने छोटी जागीर में से महान मराठा राज्य का विस्तार करने के लिए 40 से भी अधिक किलों पर विजय प्राप्त की थी। मुगल बादशाह औरंगजेब और बीजापुर के साथ उन्होंने लम्बे समय तक संघर्ष करके विजय प्राप्त की थी।

1665 ई. में मुगल सम्राट से पराजित होने पर उसके साथ संधि करनी पड़ी। औरंगजेब ने उन्हें जेल में भी बंद किया था, परंतु चालाकी-पूर्वक वहाँ से वे निकल गए। पुनः संघर्ष करके उन्होंने विजय प्राप्त की। 1674 ई. में राजगढ़ में उनका राज्याभिषेक हुआ था और उन्हें हिंदू सम्राट के रूप में प्रसिद्धि मिली।

वे महान विजेता होने के उपरांत कुशल प्रशासक और संगठनकर्ता थे। उनके मंत्रिमंडल को अष्टप्रधान मंडल कहा जाता था। 1680 ई. में उनकी मृत्यु हुई।

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मुगल साम्राज्य – राज्यव्यवस्था

मुगल प्रशासनतंत्र की व्यवस्थित स्थापना अकबर द्वारा हुई थी। शासन के केन्द्र में बादशाह रहता था और उसे सलाह देने के लिए एक मंत्रिपरिषद थी। बादशाह सर्वोच्च सेनापति और न्यायाधीश होता था। बादशाह और प्रशासन तंत्र के बीच तालमेल बनाए रखने के लिए वजीर की नियुक्ति की जाती थी। वह दीवान-ए-वजीरे-कुल कहलाता था। वह वित्त और राजस्व व्यवस्था का प्रमुख होता था। सेना प्रमुख को मीरबख्श कहा जाता था। जो सैनिकों की भर्ती और सेना के अधिकारियों की नियुक्ति करता था। वह गुप्तचर तंत्र की देखरेख भी करता था। मुगल प्रशासनिकतंत्र के गुप्तचर को वाकयानवीस कहते थे।

सम्राट की व्यक्तिगत जरूरतों का ध्यान रखने के लिए मीर-ए-साँमा नामक विभाग था। जो सरकारी कारखानों का सर्वोच्च था। न्यायालय का सर्वोच्च काज़ी था।

भू-राजस्व व्यवस्था : अकबर ने भारत में एक नई भू-राजस्व व्यवस्था का आरंभ किया। उसे मनसबदारी व्यवस्था कहा जाता था। भू-राजस्व की दर वार्षिक उपज का 1 भाग जितना था। अकबर की भू-राजस्व व्यवस्था का स्थापक टोडरमल था। मनसबदारी पद्धति सेना और भू-राजस्व दोनों के साथ जुड़ी थी। मनसब अर्थात् जागीर और मनसबदार जागीर का सर्वोच्च अधिकारी माना जाता था। जो जागीर में से राजस्व की वसूली करता और उस विस्तार की कानून-व्यवस्था को बनाए रखता था। इसके लिए उसे जागीर के अनुसार सेना दी जाती थी। वह अपने विस्तार का सर्वोच्च न्यायाधीश भी माना जाता था। नियत समय पर उसका तबादला किया जाता था। मुगल मनसबदार की व्यवस्था विश्व में अनोखी थी और विश्व में सबसे अधिक वेतन वाली थी।

मुगलकालीन संस्कृति

मुगलयुग में भारतीय संस्कृति का बहुमुखी विकास हुआ था। हिंदू और मुस्लिम संस्कृति का समन्वय हुआ था। जिसे गंगा-यमुना संस्कृति के रूप में जाना जाता है। मुगलों ने अनेक किलों, महलों, दरवाजों, मस्जिदों और बगीचों का निर्माण करवाया था।

  • बाबर ने आगरा और लाहौर में बगीचों का निर्माण करवाया था।
  • शेरशाह ने सासाराम में मकबरा और दिल्ली में मस्जिद बनवाई थी।
  • अकबर ने आगरा का किला बनवाया था और आगरा से 36 किमी दूर फतेहपुर सीकरी में विशिष्ट निर्माणकार्य करवाया था। जिसमें गुजरात विजय की याद में बने बुलंद दरवाजा, सलीम चिश्ती की दरगाह, मस्जिद और पंचमहल का समावेश होता है।
  • जहाँगीर के समय निर्माण कार्य में संगमरमर का उपयोग बढ़ गया था।
  • शाहजहाँ का समय मुगल साम्राज्य के स्थापत्य का स्वर्णयुग माना जाता है। उसने आगरा में ताजमहल और मोती मस्जिद तथा दिल्ली में प्रसिद्ध लालकिला का निर्माण करवाया था।
  • औरंगजेब ने अपनी पत्नी की याद में औरंगाबाद में राबिया-उद-दौरानी का मकबरा बनवाया था, जो ताजमहल जैसा ही कलात्मक है।

चित्रकला : मुगल चित्रकला विश्वविख्यात थी। जहाँगीर के समय में उसका खूब विकास हुआ था। मुगल शासक श्रेष्ठ चित्रकारों को दिल्ली में आमंत्रित करते थे। अकबर के समय में जशवंत और बसावन नामक महान चित्रकार थे। उन्होंने फारसी कथाओं, महाभारत के अनुवाद की पुस्तकों और अकबरनामा में ढेरों सुंदर चित्र बनाए थे। जहाँगीर का मनसूर नामक चित्रकार विश्वविख्यात था। जहाँगीर ने एक चित्रशाला का निर्माण करवाया था।
इस समय राजस्थान, गुजरात, पंजाब, हिमाचलप्रदेश और दक्षिण के राज्यों में भी चित्रकला का विकास हुआ था।

साहित्य : मुगल राजा साहित्य के पोषक थे। वे अच्छे लेखक थे। इस समय फारसी, अरबी, हिंदी और अन्य भारतीय भाषाओं में व्यापक साहित्य की रचना हुई थी।
अबुल फज़ल ने ‘अकबरनामा’ नामक ग्रंथ में अकबर का जीवन-परिचय लिखा था। उसने महाभारत का अनुवाद किया था। भारतीय भाषाओं में श्रीकृष्ण के जीवन पर आधारित खूब साहित्य लिखा गया था। मराठी में एकनाथ, ज्ञानेश्वर और स्वामी रामदास ने भक्तिसाहित्य की रचना की थी।

संगीत : अकबर संगीत का ज्ञाता था। उसके नौ रत्नों में तानसेन महान शास्त्रीय गायक थे। जिन्होंने अनेक रागों पर रचना की थी।

समापन

1526 ई. में स्थापित मुगल साम्राज्य 1707 ई. में औरंगजेब की मृत्यु के बाद पतन की तरफ बढ़ने लगा। किसी शक्तिशाली शासक के अभाव में भारत छोटे-छोटे राज्यों में बँट गया। जिसमें मुगलवंश के निर्बल शासकों, हैदराबाद के निज़ाम, बंगाल-बिहार के नवाबों, राजस्थान के राजपूत राज्यों, मराठा, पंजाब के सिख राज्य आदि का समावेश होता है। ये सभी राज्य एक-दूसरे से लड़ते रहते थे। परिणाम स्वरूप वे निर्बल होते गए। ऐसी स्थिति में यूरोप से व्यापार करने आईं कंपनियाँ भारत में अपना शासन स्थापित करने का स्वप्न देखने लगीं।

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