Class 7 Social Notes Chapter 9 अठारहवीं सदी के राजनीतिक शासक

भारत में 18वीं सदी अनेक राजनैतिक उथल-पुथलवाली थी। 1707 ई. में औरंगजेब की मृत्यु के बाद भारत छोटे-छोटे राज्यों में बँट गया था। जिसका हम अध्ययन करेंगे।

मुगलवंश का अंतिम शासक

औरंगजेब की मृत्यु के बाद मुगल गद्दी पर बहादुरशाह नामक सुलतान आया। उसने राजपूत और मराठा राज्यों के साथ शांतिपूर्ण संबंध स्थापित किया। जबकि मराठों के बीच उत्तराधिकार के मुद्दे पर विग्रह भी करवाया। उसके समय में गुरुगोविंदसिंह की मृत्यु के बाद सिख सरदार बंदा बहादुर ने मुगल साम्राज्य के सामने विद्रोह किया।

1712 ई. में बहादुरशाह की मृत्यु होने पर जहाँदरशाह गद्दी पर आया। किंतु 1713 ई. में ही उसे पदस्त करके फर्रुखसियर गद्दी पर बैठा। इस समय सैयद बंधुओं के रूप में पहचाने जानेवाले दोनों भाई साम्राज्य में खूब वर्चस्व रखते थे। उन्होंने फर्रुखसियर को गद्दी पर से उतारकर मुहम्मदशाह को बादशाह बना दिया। उसने लम्बे समय तक शासन किया। उसके समय में 1739 ई. में ईरान के नादिरशाह ने भारत पर आक्रमण किया। जिसने मुगल साम्राज्य को भारी क्षति पहुँचाई। 1759 ई. में गद्दी पर बैठनेवाले शाह आलम द्वितीय को अंग्रेजों ने बक्सर के युद्ध में हराकर कंपनी का पेन्शनर बना दिया।

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बंगाल

मुर्शिदकुली खान और अलीवर्दी खान ने बंगाल में स्वतंत्र राज्य की स्थापना की। 1757 ई. में सिराजुद्दौला बंगाल का नवाब हैदराबाद बना। ईस्ट इंडिया कंपनी और बंगाल के नवाब के बीच 1757 ई. में प्लासी का युद्ध हुआ। इस युद्ध की जीत से बंगाल में अंग्रेजों को 24 परगना की जागीर मिली। प्लासी के युद्ध के बाद नवाब बने मीरजाफर को हटाकर मीरकासिम को बंगाल का नवाब बनाया। उसने अवध के नवाब और मुगल शहंशाह का सहयोग पाकर अंग्रेजों के समक्ष बक्सर का युद्ध किया, जिसमें उसकी पराजय होने से बंगाल में नवाब के शासन का अंत हुआ।

राजपूत शासन

मुगल साम्राज्य के पतन के बाद राजस्थान में जयपुर सबसे शक्तिशाली राज्य था। राजा सवाई जयसिंह कुशाग्र राजनेता, सुधारक, कानूनविद् और विज्ञानप्रेमी थे। उन्होंने जयपुर शहर की स्थापना की। वे महान खगोलशास्त्री थे। उन्होंने दिल्ली, जयपुर, उज्जैन और मथुरा में आधुनिक वेधशालाओं की स्थापना की थी।
अन्य राजपूत राज्यों में जोधपुर, बीकानेर, कोटा, मेवाड़, बूंदी और शिरोही मुख्य थे।

सिख साम्राज्य

गुरुनानक ने 15वीं सदी में सिख धर्म की स्थापना की थी। सिख धर्म गुरु परंपरा के साथ जुड़ा हुआ है, जिसमें 10 गुरु हुए। दसवें गुरु गोविंदसिंह ने सिखों को एकता के धागे में बाँधकर सिख राज्य की स्थापना की। गुरु गोविंदसिंह के बाद बंदा बहादुर ने मुगल साम्राज्य के विरुद्ध भयंकर विद्रोह किया। सिख 12 समूहों में विभाजित थे, जिनमें से एक समूह सुकरचकिया के शक्तिशाली नेता रणजीत सिंह ने सिख साम्राज्य का विकास किया। उन्होंने लाहौर और अमृतसर पर विजय प्राप्त की। उन्होंने कश्मीर, पेशावर और मुलतान पर विजय प्राप्त करके सिख साम्राज्य के विस्तार को विशाल बनाया। उनकी सेना में यूरोपियन सेनापति और सैनिक थे। उन्होंने अपनी सेना को यूरोपियन सेना की तरह अति आधुनिक बनाया था। लाहौर में उन्होंने तोप बनाने का कारखाना स्थापित किया था। वे धार्मिक दृष्टि से उदार थे। जबकि उनकी मृत्यु के बाद अंग्रेजों ने 1849 ई. में सिख साम्राज्य को ब्रिटिश साम्राज्य में मिला लिया।

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मराठा साम्राज्य

17वीं सदी के महान शासकों में छत्रपति शिवाजी अग्रगण्य हैं। बीजापुर के सुलतान, मुगल सम्राट औरंगजेब, पुर्तगालियों वगैरह को थका करके शिवाजी ने एक स्वतंत्र राज्य की स्थापना की थी।

छत्रपति शिवाजी महाराज के नेतृत्व में मराठों ने दक्कन में गुरिल्ला युद्ध-पद्धति अपनाई। उन्होंने स्वतंत्र राज्य के लिए कुशल, कार्यक्षम और प्रजाहितकारी शासनतंत्र की स्थापना की। इन सिद्धियों के साथ शिवाजी का उच्च चरित्र और उदार नीतियाँ भी शामिल थीं। छत्रपति शिवाजी के बाद शिवाजी के पौत्र शाहू को औरंगजेब ने कैद कर लिया था। 1707 ई. के बाद जब शाहू मुक्त हुए तो अपनी काकी ताराबाई से उत्तराधिकार के लिए संघर्ष हुआ। शाहू से जुड़े पेशवा बालाजी विश्वनाथ ने शाहू को विजय दिलवाई। उनके समय से मराठा राज्य में पेशवा प्रथा की शुरुआत हुई।

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बालाजी विश्वनाथ प्रथम पेशवा थे। उन्होंने मराठा राज्य का विकास करके सभी सत्ताएँ अपने हाथ में ले ली। 1720 ई. में उनकी मृत्यु के बाद उनके पुत्र बाजीराव प्रथम पेशवा बने। वे कुशल योद्धा और चतुर राजनीतिज्ञ थे। उन्होंने कई मुगल क्षेत्रों को मराठा साम्राज्य में मिलाकर मराठा राज्य का विकास किया। उन्होंने मालवा, गुजरात और बुंदेलखंड भी जीत लिया। इतना ही नहीं उन्होंने हैदराबाद के निज़ाम को भी हराया। उन्होंने महाराष्ट्र को एक महान मराठा साम्राज्य में परिवर्तित कर दिया।
बालाजी विश्वनाथ

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1740 ई. में उनकी मृत्यु के बाद उनके पुत्र बालाजी बाजीराव पेशवा बने। उन्होंने बंगाल से लेकर मैसूर तक विजय प्राप्त की।

1761 ई. में ईरान के शाह अहमदशाह अब्दाली ने भारत पर आक्रमण किया। मराठों और अब्दाली के बीच पानीपत का तृतीय युद्ध हुआ, जिसमें मराठा राज्य की हार हुई। हार का समाचार मिलते ही आघात से बालाजी बाजीराव की मृत्यु हुई। इस युद्ध ने मराठों को निर्बल बनाया। परिणाम स्वरूप भारत में ब्रिटिश सत्ता का उदय हुआ।

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