Class 12 Sociology Solutions Chapter 8 आधुनिकीकरण व वैश्वीकरण

पाठ्य-पुस्तक के प्रश्न (TEXTUAL QUESTIONS)

I. वस्तुनिष्ठ प्रश्न

A. बहुविकल्पीय प्रश्न-

प्रश्न 1. परिवर्तन की संरचनात्मक प्रक्रिया है :
(क) केवल आधुनिकीकरण
(ख) केवल वैश्वीकरण
(ग) आधुनिकीकरण व वैश्वीकरण
(घ) कोई नहीं।
उत्तर-(ग) आधुनिकीकरण व वैश्वीकरण।

प्रश्न 2. निम्नलिखित में किसका विचार था कि आधुनिकीकरण की प्रक्रिया वैयक्तिक बंधनों से अवैयक्तिक सम्बन्धों की ओर जाती है :
(क) दुर्थीम
(ख) वैबर
(ग) कार्ल मार्क्स
(घ) कोई नहीं।
उत्तर-(ख) वैबर।

प्रश्न 3. निम्नलिखित में से किसका विचार था कि आधुनिकीकरण की प्रक्रिया यांत्रिक एकता से जैविक एकता की ओर परिवर्तन है :
(क) दुर्थीम
(ख) वैबर
(ग) कार्ल मार्क्स
(घ) कोई नहीं।
उत्तर-(क) दुर्थीम।

प्रश्न 4. वस्तुओं व सेवाओं के सीमा पार लेन-देन की मात्रा व प्रकार में वृद्धि तथा अन्तर्राष्ट्रीय प्रसार के द्वारा विश्व के देशों में बढ़ रही अन्तर्निर्भरता को कहते हैं :
(क) पश्चिमीकरण
(ख) आधुनिकीकरण
(ग) आधुनिकीकरण
(घ) वैश्वीकरण।
उत्तर-(घ) वैश्वीकरण। .

प्रश्न 5. वैश्वीकरण का अर्थ है :
(क) व्यापार बाधाओं में कटौती
(ख) तकनीकी का स्वतन्त्र प्रवाह
(घ) कोई नहीं।
(ग) दोनों
उत्तर-(ग) दोनों।

B. रिक्त स्थान भरें-

1. एक करिश्माई नेता वह है जो अपने व्यक्तित्व द्वारा लोगों को प्रभावित करने का ………….. रखता है।
2. आधुनिकीकरण की प्रक्रिया में,…………………. स्तर व्यक्ति के दृष्टिकोण व व्यक्तित्व के विशिष्ट लक्षणों में परिवर्तन दिखाता है।
3. एल० पी० जी० का अभिप्राय लिब्राइजेशन, ……….. तथा ………. है।
4. सार्वजनिक क्षेत्र से निजी क्षेत्र में स्वामित्व के हस्तान्तरण में परिवर्तन ……………………… कहलाता है।
5. …………………. विश्वभर के देशों में बढ़ रही आर्थिक अन्तर्निर्भरता है।
उत्तर-

  1. सामर्थ्य,
  2. सामाजिक,
  3. प्राइवेटाइज़ेशन, ग्लोब्लाइज़ेशन,
  4. निजीकरण,
  5. वैश्वीकरण।

C. सही/ग़लत पर निशान लगाए-

1. आधुनिकीकरण की गति एक समाज से दूसरे समाज में भिन्न होती है।
2. ब्रिटिश नीति का लघु स्तर पर कम-से-कम हस्तक्षेप होने के कारण समाज में औद्योगीकरण, नगरीकरण व न्याय व्यवस्था में न्यूनतम अथवा बिल्कुल ही परिवर्तन नहीं आया।
3. आधुनिकीकरण एक क्रमगत प्रक्रिया है जिससे एक क्षेत्र में परिवर्तन से दूसरे क्षेत्र में परिवर्तन होता है।।।
4. वैश्वीकरण की प्रक्रिया विश्व के विभिन्न देशों में भिन्न होती है।
5. वैश्वीकरण अन्तर्निर्भरता पर जोर नहीं देता है।
उत्तर-

  1. सही,
  2. गलत,
  3. सही,
  4. सही,
  5. गलत।

D. निम्नलिखित शब्दों का मिलान करें-

कॉलम ‘ए’ — कॉलम ‘बी’
आधुनिकीकरण — अवैयक्तिक बंधन
वैश्वीकरण — यांत्रिक एकता
दुर्थीम– वैश्विक गाँव
वैबर — तकनीकी परिवर्तन
मार्शल मैक्ल्यूहन — अन्तर्निर्भरता
उत्तर-
कॉलम ‘ए’ — कॉलम ‘बी’
आधुनिकीकरण — तकनीकी परिवर्तन
वैश्वीकरण — अन्तर्निर्भरता
दुर्थीम — एकता
वैबर — अवैयक्तिक बंधन
मार्शल मैक्ल्यूहन — वैश्विक गाँव

II. अति लघु उत्तरों वाले प्रश्न

प्रश्न 1. वैश्विक गाँव की अवधारणा किसने दी है ?
उत्तर-मार्शल मैक्ल्यूहन ने।

प्रश्न 2. यांत्रिक तथा जैविक एकता की अवधारणा किसने दी है ?
उत्तर-इमाईल दुर्शीम ने।

प्रश्न 3. सार्वजनिक क्षेत्र से निजी क्षेत्र में स्वामित्व के हस्तांतरण का नियंत्रण क्या कहलाता है ?
उत्तर-निजीकरण।

प्रश्न 4. एक प्रक्रिया बाजार सिद्धान्तों की दिशा में अर्थव्यवस्था नवीकरण की प्रक्रिया क्या कहलाती है ?
उत्तर-उदारीकरण।

प्रश्न 5. करिश्माई नेता से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर-वह नेता जो अपने व्यक्तित्व से जनता को प्रभावित करता है उसे करिश्माई नेता कहते हैं।

प्रश्न 6. आधुनिकीकरण की प्रक्रिया में चार क्षेत्रों के नाम लिखें।
उत्तर-तकनीक, कृषि, उद्योग तथा वातावरण आधुनिकता के चार क्षेत्र हैं।

प्रश्न 7. आधुनिकीकरण की प्रक्रिया के तीन कारण लिखें।
उत्तर-नगरीकरण, औद्योगीकरण, आधुनिक शिक्षा, आधुनिकीकरण के सामने आने के कारण हैं।

प्रश्न 8. आधुनिकीकरण की दो विशेषताओं का उल्लेख करें।
उत्तर-

  1. यह लगातार तथा लम्बे समय तक चलने वाली प्रक्रिया है।
  2. इससे समाज के प्रत्येक क्षेत्र में परिवर्तन आता है।

प्रश्न 9. वैश्वीकरण की दो विशेषताओं का उल्लेख करें।
अथवा
वैश्वीकरण की विशेषताओं के दो नाम लिखो।
उत्तर-

  1. इस प्रक्रिया से अलग-अलग देशों में अन्तर्निर्भरता बढ़ती है।
  2. इससे लोगों का, तकनीक व विचारों का मुक्त प्रवाह होता है।

प्रश्न 10. करिश्माई नेता से आप क्या समझते है ?
उत्तर-वह नेता जो अपने व्यक्तित्व से जनता को प्रभावित करता है उसे करिश्माई नेता कहते हैं।

प्रश्न 11. एल० पी० जी० (LPG) का क्या अभिप्राय है ?
उत्तर-L- Liberalisation (उदारीकरण), P-Privatisation (निजीकरण) तथा G-Globalisation (वैश्वीकरण)।

III. लघु उत्तरों वाले प्रश्न

प्रश्न 1. आधुनिकीकरण से आपका क्या अभिप्राय है ?
उत्तर-आधुनिकीकरण का अर्थ जीवन जीने के आधुनिक तथा नए ढंगों व नए मूल्यों को अपना लेना। पहले इसका अर्थ काफ़ी तंग घेरे में लिया जाता था, परन्तु अब इसमें कृषि आर्थिकता तथा औद्योगिक आर्थिकता में परिवर्तन को भी शामिल किया जाता है।

प्रश्न 2. आधुनिकीकरण की किन्हीं दो विशेषताओं का संक्षेप में उल्लेख करें।
उत्तर-

  1. यह एक क्रान्तिकारी प्रक्रिया है जिस में समाज परंपरागत से आधुनिक हो जाता है। इसमें लोगों के जीवन जीने के ढंगों में पूर्ण परिवर्तन आ जाता है।
  2. आधुनिकीकरण की प्रक्रिया एक लंबी प्रक्रिया है जिसमें परंपरागत रूप से आधुनिक रूप में परिवर्तित होने में कई पीढ़ियां लग जाती हैं।

प्रश्न 3. आधुनिकीकरण के दो कारणों का संक्षेप में उल्लेख करें।
अथवा
आधुनिकीकरण के तीन कारणों के नाम लिखिए।
उत्तर-

  • पश्चिमी शिक्षा के आने से लोगों ने पढ़ना लिखना शुरू किया जिससे उन्होंने पश्चिमी देशों के आधुनिक विचारों को अपनाना शुरू कर दिया।
  • औद्योगीकरण के कारण इस क्षेत्र में नए आविष्कार हुए जिस कारण मनुष्यों का कार्य मशीनों ने ले लिया। इससे आधुनिकीकरण आ गया।
  • अंग्रेजों ने भारत में अपनी संस्कृति को फैलाना शुरू किया जिस कारण यहां पर आधुनिकीकरण आना शुरू हुआ।

प्रश्न 4. वैश्वीकरण से आप क्या समझते हैं ?
अथवा
वैश्वीकरण।
उत्तर-वैश्वीकरण का साधारण शब्दों में अर्थ है अलग-अलग देशों के बीच वस्तुओं, सेवाओं, विचारों, सूचना, लोगों तथा पूँजी का बेरोक-टोक प्रवाह। इससे उन देशों की आर्थिक, सामाजिक व सांस्कृतिक सीमाओं के बंधन टूट जाते हैं। यह सब कुछ संचार के विकसित साधनों के कारण मुमकिन हुआ है।

प्रश्न 5. निजीकरण से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर-सरकार ने कई निगमों का निर्माण किया है जिन्हें वह कई बार व्यक्तिगत हाथों में बेच देते हैं। इस प्रकार जनतक क्षेत्र की या सरकारी कंपनियों को निजी हाथों में बेचने की प्रक्रिया को निजीकरण कहते हैं। उदाहरण के लिए नाल्को (NALCO), वी० एस० एन० एल० (V.S.N.L.) इत्यादि।

प्रश्न 6. उदारीकरण से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर-नियंत्रित अर्थव्यवस्था से अनावश्यक प्रतिबन्धों को हटाना उदारीकरण है। उद्योगों तथा व्यापार से अनावश्यक प्रतिबन्धों को हटाना ताकि अर्थव्यवस्था अधिक प्रगतिशील, मुक्त तथा Competitive बन सके, उदारीकरण कहलाता है। यह आर्थिक प्रक्रिया व समाज में आर्थिक परिवर्तनों की प्रक्रिया है।

IV. दीर्घ उत्तरों वाले प्रश्न-

प्रश्न 1. पारम्परिक व आधुनिक समाज में अन्तर स्पष्ट करें।
उत्तर-

  • परंपरागत समाजों में गुज़ारे पर आधारित आर्थिकता होती है अर्थात् उत्पादन केवल आवश्यकताओं को पूर्ण करने के लिए किया जाता है जबकि आधुनिक समाजों में बाजार को देख कर किया जाता है।
  • परंपरागत समाजों में काफी साधारण रूप का श्रम विभाजन पाया जाता है जोकि लिंग पर आधारित होता है जबकि आधुनिक समाजों में श्रम विभाजन विशेषीकरण पर आधारित होती है जिसमें कई आधार होते हैं।
  • परंपरागत समाजों के लोग स्थानीय रूप से अन्तर्निर्भर होते हैं। जबकि आधुनिक समाजों में सम्पूर्ण विश्व के लोग वैश्विक रूप से अन्तर्निर्भर होते हैं।
  • परंपरागत समाजों में तकनीक बिल्कुल साधारण स्तर की होती है जबकि आधुनिक समाजों में तकनीक काफ़ी अधिक विकसित होती है।

प्रश्न 2. यांत्रिक व जैविक एकता में अन्तर स्पष्ट करें।
उत्तर-

  • यांत्रिक एकता व्यक्ति को समाज के साथ बिना किसी बिचौलिए के जोड़ देती है। आंगिक एकता में व्यक्ति समाज पर इस कारण निर्भर हो जाता है क्योंकि वह अन्य व्यक्तियों पर निर्भर होता है।
  • यांत्रिक एकता समानताओं पर आधारित होती है जबकि जैविक एकता का आधार श्रम विभाजन है।
  • यांत्रिक एकता की शक्ति सामूहिक चेतना की शक्ति में होती है। जैविक एकता की उत्पत्ति कार्यात्मक भिन्नता पर आधारित होती है।
  • यांत्रिक एकता व्यक्तित्व के विकास के विरुद्ध है जबकि जैविक एकता व्यक्तित्व के विकास का पूर्ण मौका प्रदान करती है।
  • यांत्रिक एकता आदिम तथा प्राचीन समाजों में मिलती है जबकि जैविक एकता आधुनिक समाजों की विशेषता है जिनका प्रमुख लक्षण श्रम विभाजन है।

प्रश्न 3. आधुनिकीकरण क्या है ? इसके दोनों स्तरों का उल्लेख करें।
उत्तर-आधुनिकीकरण का अर्थ है जीवन जीने के आधुनिक तथा नए ढंगों तथा नए मूल्यों को अपना लेना। पहले इसका अर्थ काफी तंग घेरे में लिया जाता था परन्तु अब इसमें कृषि आर्थिकता से औद्योगिक आर्थिकता में परिवर्तन को भी शामिल किया जाता है। इसने परंपरागत लोगों तथा पुराने बंधनों में बंधे हुए लोगों को वर्तमान स्थितियों के अनुसार बदल दिया है। इससे लोगों की विचारधारा, पसंद, जीवन जीने के ढंगों में बहुत से परिवर्तन आए। दूसरे शब्दों में वैज्ञानिक तथा तकनीकी आविष्कारों ने सामाजिक संबंधों की सम्पूर्ण व्यवस्था में बहुत से परिवर्तन ला दिए तथा परंपरागत विचारधारा के स्थान पर नई विचारधारा सामने आ गई। आधुनिकीकरण की प्रक्रिया प्रत्येक समाज की आवश्यकताओं तथा स्थितियों के अनुसार अलग-अलग होती है।

प्रश्न 4. वैश्वीकरण से क्या अभिप्राय है ? दो प्रकार के वैश्वीकरण की व्याख्या करें।
उत्तर-वैश्वीकरण एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें देश की अर्थव्यवस्था का संबंध अन्य देशों की अर्थव्यवस्थाओं से जोड़ा जाता है। साधारण शब्दों में एक देश के अन्य देशों के साथ वस्तुओं, सेवाओं, व्यक्तियों के बीच बेरोक-टोक आदान-प्रदान को वैश्वीकरण कहा जाता है। इस प्रक्रिया की सहायता से अलग-अलग देशों की अर्थव्यवस्थाएं एकदूसरे के सम्पर्क में आती हैं। देशों में व्यापार का मुक्त आदान-प्रदान होता है। इस प्रकार विश्व की अलग-अलग अर्थव्यवस्थाओं के एकीकरण की प्रक्रिया को वैश्वीकरण कहा जाता है। वैश्वीकरण के कई प्रकार होते हैं जैसे कि आर्थिक वैश्वीकरण जिसमें विश्व की अलग-अलग अर्थव्यवस्थाएं एक-दूसरे से जुड़ जाती हैं तथा तकनीकी वैश्वीकरण जिसमें एक देश में आविष्कार हुई तकनीक अन्य देशों में पहुँच जाती है।

प्रश्न 5. वैश्वीकरण की अवधारणा को उदाहरण सहित स्पष्ट करें।
उत्तर-वैश्वीकरण एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें देश की अर्थव्यवस्था का संबंध अन्य देशों की अर्थव्यवस्थाओं से जोड़ा जाता है। साधारण शब्दों में एक देश के अन्य देशों के साथ वस्तुओं, सेवाओं, व्यक्तियों के बीच बेरोक-टोक आदान-प्रदान को वैश्वीकरण कहा जाता है। इस प्रक्रिया की सहायता से अलग-अलग देशों की अर्थव्यवस्थाएं एकदूसरे के सम्पर्क में आती हैं। देशों में व्यापार का मुक्त आदान-प्रदान होता है। इस प्रकार विश्व की अलग-अलग अर्थव्यवस्थाओं के एकीकरण की प्रक्रिया को वैश्वीकरण कहा जाता है। वैश्वीकरण के कई प्रकार होते हैं जैसे कि आर्थिक वैश्वीकरण जिसमें विश्व की अलग-अलग अर्थव्यवस्थाएं एक-दूसरे से जुड़ जाती हैं तथा तकनीकी वैश्वीकरण जिसमें एक देश में आविष्कार हुई तकनीक अन्य देशों में पहुँच जाती है।

V. अति दीर्घ उत्तरों वाले प्रश्न

प्रश्न 1. आधुनिकीकरण से आप क्या समझते हैं ? इसकी विशेषताओं का विस्तार सहित वर्णन करें।
अथवा
आधुनिकीकरण पर एक नोट लिखो।
अथवा
आधुनिकीकरण की विशेषताओं की विस्तृत रूप में व्याख्या करो।
उत्तर-आधुनिकीकरण की प्रक्रिया आधुनिक समाजों के विकसित होने पर ही पाई जाती है। भारतीय समाज के ऊपर आधुनिकीकरण की प्रक्रिया का आरम्भ अंग्रेज़ों के भारत पर राज्य करने के पश्चात् हुआ जब लोग पश्चिमीकरण (पश्चिमी संस्कृति) के सम्पर्क में आए तो उनमें कई प्रकार के परिवर्तन आ गए। आधुनिकीकरण आधुनिक समाज की एक विशेषता है। एम० एन० श्रीनिवास के अनुसार,” आधुनिकीकरण एवं पश्चिमीकरण इन दोनों में अन्तर पाया जाता है। उनके अनुसार पश्चिमीकरण का संकल्प आधुनिकीकरण के संकल्प से अधिक नैतिक दृष्टिकोण से निरपेक्षता संकल्प है। इससे किसी भी संस्कृति के अच्छे व बुरे होने का ज्ञान नहीं होता है जबकि आधुनिकीकरण एक कीमत रहित संकल्प नहीं है क्योंकि आधुनिकीकरण को सदैव उचित, ठीक एवं अच्छा ही माना जाता है। इस कारण ही श्रीनिवास ने आधुनिकीकरण के स्थान पर पश्चिमीकरण के प्रयोग को ही महत्त्व दिया। इन दोनों में कोई विशेष अन्तर नहीं बतलाया। परन्तु श्रीनिवास जी ने पश्चिमीकरण को ही सदैव महत्त्व दिया है। इस प्रकार उनके विचारों से एक बात तो स्पष्ट हो जाती है कि आधुनिकीकरण की प्रक्रिया प्रगतिवादी होती है। इस प्रक्रिया का विस्तारपूर्वक वर्णन करने के लिए अनेक समाजशास्त्रियों ने अपने विचार प्रकट किए हैं-

1. मैरियन जे० लैवी (Marrion J. Levy) के अनुसार, “आधुनिकीकरण की मेरी परिभाषा शक्ति के बेजान साधनों एवं हथियारों का प्रयोग जो गतिविधियों के परिणामों को बढ़ाते हैं के ऊपर आधारित है। मैं इन दोनों तत्त्वों के बीच प्रत्येक को अटूट क्रम का आधार समझता हूं। एक समाज का कम या अधिक आधुनिक होना तब तक समझा जाता है जब तक इसके सदस्य शक्ति के बेजान साधनों का प्रयोग अपनी गतिविधियों के परिणामों को बढ़ाने के लिए करते हैं। इन दोनों में से कोई भी तत्त्व समाज विशेष में न तो पूरक एवं गायब है, न ही विशेष तौर पर उपस्थित होता है।”

2. वीनर (Veiner) के अनुसार, आधुनिकीकरण के कई पक्ष हैं-

  • राजनीतिक आधुनिकीकरण (Political Modernization)—इसमें महत्त्वपूर्ण संस्थाएं, राजनीतिक दलों, सांसदों, वोट अधिकार तथा गुप्त वोटों जो सहभागी निर्णय को मिलने में समर्थ हों, का विकास शामिल है।
  • सांस्कृतिक आधुनिकीकरण (Cultural Modernization)-प्रतिपूरक रूप से धर्म-निष्पक्षता तथा विचारधाराओं से लगाव पैदा करना है।
  • आर्थिक आधुनिकीकरण (Economic Modernization)—यह औद्योगीकरण से भिन्न होता है।

3. डॉ. योगेन्द्र सिंह (Dr. Yogender Singh) के अनुसार, “साधारणत: आधुनिक होने का तात्पर्य ‘फैशनेबल’ से लिया गया है। आधुनिकीकरण एक सांस्कृतिक धारणा है जिसमें तार्किक, सर्वव्यापक दृष्टिकोण, हमदर्दी, वैज्ञानिक विश्व दृष्टि, मानवता, तकनीकी प्रगति आदि शामिल हैं।”
4. आईनस्टैड (Eienstadt) के अनुसार, “ऐतिहासिक तौर पर आधुनिकीकरण एक परिवर्तन की प्रक्रिया है। उस किस्म की सामाजिक, राजनीतिक एवं आर्थिक व्यवस्था की तरफ उन्मुख है, जो 17वीं शताब्दी से लेकर 19वीं शताब्दी तक पश्चिमी यूरोपीय देशों एवं अमेरिका में विकसित हुआ और धीरे-धीरे सम्पूर्ण यूरोपीय देशों में फैल गया। 19वीं एवं 20वीं शताब्दी में जिनका प्रसार दक्षिण अमेरिका, एशिया एवं अफ्रीका के महाद्वीप में हुआ।” ।

इस तरह इन परिभाषाओं के आधार पर हम कह सकते हैं कि आधुनिकीकरण की प्रक्रिया वह प्रक्रिया है, जिसमें पुरानी व्यवस्था में परिवर्तन आ जाता है। उसके स्थान पर नई एवं अच्छी व्यवस्था स्थान ले लेती है। यह प्रक्रिया किसी भी समाज में पाई जाती है और इसकी मात्रा अलग-अलग समाजों में अलग-अलग होती है।

आधुनिकीकरण की विशेषताएं (Characteristics of Modernization)-

1. इस प्रक्रिया के साथ शहरीकरण एवं औद्योगिकीकरण का विकास होता है (It leads to the development of Urbanization & Industrialization)-शहरों के साथ औद्योगिकीकरण भी पाया जाता है। जहां-जहां पर भी उद्योगों की स्थापना हुई, वहीं-वहीं पर शहरों का भी विकास होने लग गया। गांवों की भी अधिक-से-अधिक जनसंख्या शहरों की तरफ जाने लगी। शहरों में प्रत्येक प्रकार की सुविधाएं प्राप्त होती हैं। व्यवसायों की भी अधिकता पाई जाती है। संचार एवं यातायात के साधनों के विकसित होने के कारण शहरी समाज में काफ़ी परिवर्तन आया है। इस कारण शहरों के परिवारों, जाति इत्यादि संस्थाओं में भी काफ़ी परिवर्तन आया। इस कारण ही शहरीकरण एवं संस्कृतिकरण में हम भेद समझते हैं। जहां भी शहरों का विकास हुआ, वहां आधुनिकता पाई जाने लगी। इसी कारण शहर गांवों से अधिक विकसित हुए।

2. इस प्रक्रिया के साथ शिक्षा का प्रसार होता है (This process develops the education)-शिक्षा के क्षेत्र में आधुनिकीकरण की प्रक्रिया के साथ तेजी से विकास हुआ। तकनीकी शिक्षा में काफ़ी प्रगति हुई। प्राचीन काल में केवल ऊंची जाति के ही लोगों को शिक्षा दी जाती थी परन्तु समाज में जैसे प्रगति हुई, उसी प्रकार तकनीकी संस्थाओं की भी आवश्यकता पड़ने लगी। इसी कारण कई तकनीकी केन्द्र भी स्थापित हुए। इसके अतिरिक्त व्यावसायिक शिक्षा का महत्त्व भी बढ़ा। जो व्यक्ति जिस कार्य को करने की शिक्षा प्राप्त करता था, उसको वही काम ही मिल जाया करता था। इस कारण आधुनिकीकरण की प्रक्रिया ने शिक्षा के क्षेत्र में काफ़ी परिवर्तन लाया।

3. इस प्रक्रिया से अन्तर्राष्ट्रीय सम्बन्ध भी बढ़ते हैं (It Increases the International relations)आधुनिकीकरण की प्रक्रिया के द्वारा विभिन्न देशों में सहयोगिता आरम्भ हुई। यू० एन० ओ० (U.N.O.) के अस्तित्व में आने के पश्चात् प्रत्येक देश की सुरक्षा का भी प्रबन्ध किया जाने लग पड़ा है। संसार में आपसी सम्बन्ध व शांति का वातावरण पैदा करना काफ़ी आवश्यक था। यू० एन० ओ० द्वारा मानवीय अधिकारों को सुरक्षित रखने का यत्न किया गया। इस संस्था द्वारा किसी भी देश की निजी समस्याओं को सुलझाने के लिए भी यत्न किए गए। शांति को बरकरार रखना ही इसका एकमात्र उद्देश्य है। जब भी दो देशों के बीच संघर्ष की स्थिति पैदा होती है तो U.N.O. की कोशिश के साथ दोनों देशों के बीच सम्बन्ध सुधारे जाते हैं। इस प्रकार आधुनिकीकरण की प्रक्रिया के साथ सहयोगिता का वातावरण बना दिया गया है।

4. इस प्रक्रिया के कारण सामाजिक विभेदीकरण का विकास होता है (This process develops & increases the process of Social differentiation)-आधुनिकीकरण की प्रक्रिया के साथ जैसे-जैसे हमारा समाज जटिल होता गया, तो समाज में विभेदीकरण की प्रक्रिया और भी तेज़ होती गई। समाज में भौतिक क्रान्ति के साथ-साथ सामाजिक विभेदीकरण में भी वृद्धि हो गई। इस प्रक्रिया के द्वारा हमें उस स्थिति का ज्ञान हो जाता है, जिस कारण समाज विभिन्न भागों में बंटा होता है। यह प्रक्रिया मानव एवं मानव के बीच और समूह एवं समूह के बीच वैर भाव की भावनाओं को विकसित ही नहीं होने देती है। इस प्रकार जब भी समाज साधारण अवस्था से कठिन अवस्था की तरफ बढ़ता है तो विभेदीकरण अवश्य पाया जाता है। कई प्रकार की सामाजिक आवश्यकताएं होती हैं। इस प्रक्रिया के बिना हम समाज में श्रम-विभाजन नहीं कर सकते। इस प्रकार आधुनिकीकरण में जैसे-जैसे विकास होता है तो समाज के प्रत्येक क्षेत्र जैसे कि धार्मिक, आर्थिक, शैक्षिक इत्यादि में उन्नति होने लग जाती है। इस कारण विभेदीकरण की प्रक्रिया भी तेज़ हो जाती है।

5. इससे सामाजिक गतिशीलता बढ़ती है (It increases Social Mobility)—सामाजिक गतिशीलता आधुनिक समाजों की मुख्य विशेषता होती है। शहरी समाज में श्रम विभाजन, विशेषीकरण, देशों की भिन्नता, उद्योग, व्यापार, यातायात के साधन तथा संचार के साधनों इत्यादि ने सामाजिक गतिशीलता को बढ़ा दिया है। प्रत्येक व्यक्ति अपनी योग्यता, बुद्धि इत्यादि के साथ ग़रीब से अमीर बन सकता है। व्यक्ति जिस पेशे में लाभ देखता है उसी को अपनाना शुरू कर देता है। पेशे के सम्बन्ध में वह स्थान परिवर्तन भी कर लेता है। इस प्रकार सामाजिक गतिशीलता की प्रक्रिया के द्वारा परम्परागत कीमतों की जगह नई कद्रों-कीमतों का भी विकास हुआ है।

6. इससे समाज सुधारक लहरें आगे आई हैं (Social reform movements came into being due to this) आधुनिकीकरण की प्रक्रिया के द्वारा समाज सुधारक लहरों का विकास होना शुरू हो गया। समाज में जब भी परिवर्तन आता है तो उसका समाज पर प्रभाव अच्छा तथा गलत भी होता है। जब हम इस प्रभाव के अच्छे गुणों की तरफ देखते हैं तो हमें समाज में प्रगति होती नज़र आती है। जब हम इसकी बुराइयों की तरफ देखते हैं तो हमें समाज के विघटन के बारे में पता चलना शुरू हो जाता है। आधुनिकीकरण की प्रक्रिया के द्वारा कई समाज सुधारक लहरें पैदा हुईं जिनका मुख्य उद्देश्य समाज में पाई जाने वाली बुराइयों को समाप्त करना होता है ताकि समाज में सन्तुलन बना रहे। इससे समाज में और प्रगति होती है। समाज सुधारक लहरों तथा आन्दोलनों की मदद से समाज में मिलने वाली उन कीमतों को खत्म किया जाता है जो समाज को गिरावट की तरफ ले जाती है। इस तरह इस प्रक्रिया के द्वारा समाज में परिवर्तन आ जाता है।

7. इसके साथ व्यक्ति की स्थिति में परिवर्तन हो जाता है (It changes the status of Individual)आधुनिकीकरण की प्रक्रिया के द्वारा स्थिति परिवर्तन भी पाया गया है। सर्वप्रथम हम यह देखते हैं कि प्राचीन समय में जाति विशेष व्यवसाय को अपनाना आवश्यक था। परन्तु आधुनिकीकरण की प्रक्रिया के द्वारा एक तरफ के व्यवसायों की अधिकता पाई गई। दूसरी तरफ विशेषीकरण की स्थिति पैदा हो गई। इस प्रकार व्यक्ति की परिस्थितियों में तत्काल परिवर्तन आ गए। जाति प्रथा अलोप हो गई और उसके स्थान पर वर्ग व्यवस्था पैदा होने लग पड़ी। व्यक्ति को स्थिति उसकी योग्यतानुसार प्राप्त होने लगी। इस प्रकार आधुनिकीकरण की प्रक्रिया के द्वारा सामाजिक संगठन और विभिन्न समूहों की स्थितियों में परिवर्तन आने लग गया।

प्रश्न 2. आधुनिकीकरण पर निबन्ध लिखें।
उत्तर-
आधुनिकीकरण की प्रक्रिया आधुनिक समाजों के विकसित होने पर ही पाई जाती है। भारतीय समाज के ऊपर आधुनिकीकरण की प्रक्रिया का आरम्भ अंग्रेज़ों के भारत पर राज्य करने के पश्चात् हुआ जब लोग पश्चिमीकरण (पश्चिमी संस्कृति) के सम्पर्क में आए तो उनमें कई प्रकार के परिवर्तन आ गए। आधुनिकीकरण आधुनिक समाज की एक विशेषता है। एम० एन० श्रीनिवास के अनुसार,” आधुनिकीकरण एवं पश्चिमीकरण इन दोनों में अन्तर पाया जाता है। उनके अनुसार पश्चिमीकरण का संकल्प आधुनिकीकरण के संकल्प से अधिक नैतिक दृष्टिकोण से निरपेक्षता संकल्प है। इससे किसी भी संस्कृति के अच्छे व बुरे होने का ज्ञान नहीं होता है जबकि आधुनिकीकरण एक कीमत रहित संकल्प नहीं है क्योंकि आधुनिकीकरण को सदैव उचित, ठीक एवं अच्छा ही माना जाता है। इस कारण ही श्रीनिवास ने आधुनिकीकरण के स्थान पर पश्चिमीकरण के प्रयोग को ही महत्त्व दिया। इन दोनों में कोई विशेष अन्तर नहीं बतलाया। परन्तु श्रीनिवास जी ने पश्चिमीकरण को ही सदैव महत्त्व दिया है। इस प्रकार उनके विचारों से एक बात तो स्पष्ट हो जाती है कि आधुनिकीकरण की प्रक्रिया प्रगतिवादी होती है। इस प्रक्रिया का विस्तारपूर्वक वर्णन करने के लिए अनेक समाजशास्त्रियों ने अपने विचार प्रकट किए हैं-

1. मैरियन जे० लैवी (Marrion J. Levy) के अनुसार, “आधुनिकीकरण की मेरी परिभाषा शक्ति के बेजान साधनों एवं हथियारों का प्रयोग जो गतिविधियों के परिणामों को बढ़ाते हैं के ऊपर आधारित है। मैं इन दोनों तत्त्वों के बीच प्रत्येक को अटूट क्रम का आधार समझता हूं। एक समाज का कम या अधिक आधुनिक होना तब तक समझा जाता है जब तक इसके सदस्य शक्ति के बेजान साधनों का प्रयोग अपनी गतिविधियों के परिणामों को बढ़ाने के लिए करते हैं। इन दोनों में से कोई भी तत्त्व समाज विशेष में न तो पूरक एवं गायब है, न ही विशेष तौर पर उपस्थित होता है।”

2. वीनर (Veiner) के अनुसार, आधुनिकीकरण के कई पक्ष हैं-

  • राजनीतिक आधुनिकीकरण (Political Modernization)—इसमें महत्त्वपूर्ण संस्थाएं, राजनीतिक दलों, सांसदों, वोट अधिकार तथा गुप्त वोटों जो सहभागी निर्णय को मिलने में समर्थ हों, का विकास शामिल है।
  • सांस्कृतिक आधुनिकीकरण (Cultural Modernization)-प्रतिपूरक रूप से धर्म-निष्पक्षता तथा विचारधाराओं से लगाव पैदा करना है।
  • आर्थिक आधुनिकीकरण (Economic Modernization)—यह औद्योगीकरण से भिन्न होता है।

3. डॉ. योगेन्द्र सिंह (Dr. Yogender Singh) के अनुसार, “साधारणत: आधुनिक होने का तात्पर्य ‘फैशनेबल’ से लिया गया है। आधुनिकीकरण एक सांस्कृतिक धारणा है जिसमें तार्किक, सर्वव्यापक दृष्टिकोण, हमदर्दी, वैज्ञानिक विश्व दृष्टि, मानवता, तकनीकी प्रगति आदि शामिल हैं।”
4. आईनस्टैड (Eienstadt) के अनुसार, “ऐतिहासिक तौर पर आधुनिकीकरण एक परिवर्तन की प्रक्रिया है। उस किस्म की सामाजिक, राजनीतिक एवं आर्थिक व्यवस्था की तरफ उन्मुख है, जो 17वीं शताब्दी से लेकर 19वीं शताब्दी तक पश्चिमी यूरोपीय देशों एवं अमेरिका में विकसित हुआ और धीरे-धीरे सम्पूर्ण यूरोपीय देशों में फैल गया। 19वीं एवं 20वीं शताब्दी में जिनका प्रसार दक्षिण अमेरिका, एशिया एवं अफ्रीका के महाद्वीप में हुआ।” ।

इस तरह इन परिभाषाओं के आधार पर हम कह सकते हैं कि आधुनिकीकरण की प्रक्रिया वह प्रक्रिया है, जिसमें पुरानी व्यवस्था में परिवर्तन आ जाता है। उसके स्थान पर नई एवं अच्छी व्यवस्था स्थान ले लेती है। यह प्रक्रिया किसी भी समाज में पाई जाती है और इसकी मात्रा अलग-अलग समाजों में अलग-अलग होती है।

आधुनिकीकरण की विशेषताएं (Characteristics of Modernization)-

1. इस प्रक्रिया के साथ शहरीकरण एवं औद्योगिकीकरण का विकास होता है (It leads to the development of Urbanization & Industrialization)-शहरों के साथ औद्योगिकीकरण भी पाया जाता है। जहां-जहां पर भी उद्योगों की स्थापना हुई, वहीं-वहीं पर शहरों का भी विकास होने लग गया। गांवों की भी अधिक-से-अधिक जनसंख्या शहरों की तरफ जाने लगी। शहरों में प्रत्येक प्रकार की सुविधाएं प्राप्त होती हैं। व्यवसायों की भी अधिकता पाई जाती है। संचार एवं यातायात के साधनों के विकसित होने के कारण शहरी समाज में काफ़ी परिवर्तन आया है। इस कारण शहरों के परिवारों, जाति इत्यादि संस्थाओं में भी काफ़ी परिवर्तन आया। इस कारण ही शहरीकरण एवं संस्कृतिकरण में हम भेद समझते हैं। जहां भी शहरों का विकास हुआ, वहां आधुनिकता पाई जाने लगी। इसी कारण शहर गांवों से अधिक विकसित हुए।

2. इस प्रक्रिया के साथ शिक्षा का प्रसार होता है (This process develops the education)-शिक्षा के क्षेत्र में आधुनिकीकरण की प्रक्रिया के साथ तेजी से विकास हुआ। तकनीकी शिक्षा में काफ़ी प्रगति हुई। प्राचीन काल में केवल ऊंची जाति के ही लोगों को शिक्षा दी जाती थी परन्तु समाज में जैसे प्रगति हुई, उसी प्रकार तकनीकी संस्थाओं की भी आवश्यकता पड़ने लगी। इसी कारण कई तकनीकी केन्द्र भी स्थापित हुए। इसके अतिरिक्त व्यावसायिक शिक्षा का महत्त्व भी बढ़ा। जो व्यक्ति जिस कार्य को करने की शिक्षा प्राप्त करता था, उसको वही काम ही मिल जाया करता था। इस कारण आधुनिकीकरण की प्रक्रिया ने शिक्षा के क्षेत्र में काफ़ी परिवर्तन लाया।

3. इस प्रक्रिया से अन्तर्राष्ट्रीय सम्बन्ध भी बढ़ते हैं (It Increases the International relations)आधुनिकीकरण की प्रक्रिया के द्वारा विभिन्न देशों में सहयोगिता आरम्भ हुई। यू० एन० ओ० (U.N.O.) के अस्तित्व में आने के पश्चात् प्रत्येक देश की सुरक्षा का भी प्रबन्ध किया जाने लग पड़ा है। संसार में आपसी सम्बन्ध व शांति का वातावरण पैदा करना काफ़ी आवश्यक था। यू० एन० ओ० द्वारा मानवीय अधिकारों को सुरक्षित रखने का यत्न किया गया। इस संस्था द्वारा किसी भी देश की निजी समस्याओं को सुलझाने के लिए भी यत्न किए गए। शांति को बरकरार रखना ही इसका एकमात्र उद्देश्य है। जब भी दो देशों के बीच संघर्ष की स्थिति पैदा होती है तो U.N.O. की कोशिश के साथ दोनों देशों के बीच सम्बन्ध सुधारे जाते हैं। इस प्रकार आधुनिकीकरण की प्रक्रिया के साथ सहयोगिता का वातावरण बना दिया गया है।

4. इस प्रक्रिया के कारण सामाजिक विभेदीकरण का विकास होता है (This process develops & increases the process of Social differentiation)-आधुनिकीकरण की प्रक्रिया के साथ जैसे-जैसे हमारा समाज जटिल होता गया, तो समाज में विभेदीकरण की प्रक्रिया और भी तेज़ होती गई। समाज में भौतिक क्रान्ति के साथ-साथ सामाजिक विभेदीकरण में भी वृद्धि हो गई। इस प्रक्रिया के द्वारा हमें उस स्थिति का ज्ञान हो जाता है, जिस कारण समाज विभिन्न भागों में बंटा होता है। यह प्रक्रिया मानव एवं मानव के बीच और समूह एवं समूह के बीच वैर भाव की भावनाओं को विकसित ही नहीं होने देती है। इस प्रकार जब भी समाज साधारण अवस्था से कठिन अवस्था की तरफ बढ़ता है तो विभेदीकरण अवश्य पाया जाता है। कई प्रकार की सामाजिक आवश्यकताएं होती हैं। इस प्रक्रिया के बिना हम समाज में श्रम-विभाजन नहीं कर सकते। इस प्रकार आधुनिकीकरण में जैसे-जैसे विकास होता है तो समाज के प्रत्येक क्षेत्र जैसे कि धार्मिक, आर्थिक, शैक्षिक इत्यादि में उन्नति होने लग जाती है। इस कारण विभेदीकरण की प्रक्रिया भी तेज़ हो जाती है।

5. इससे सामाजिक गतिशीलता बढ़ती है (It increases Social Mobility)—सामाजिक गतिशीलता आधुनिक समाजों की मुख्य विशेषता होती है। शहरी समाज में श्रम विभाजन, विशेषीकरण, देशों की भिन्नता, उद्योग, व्यापार, यातायात के साधन तथा संचार के साधनों इत्यादि ने सामाजिक गतिशीलता को बढ़ा दिया है। प्रत्येक व्यक्ति अपनी योग्यता, बुद्धि इत्यादि के साथ ग़रीब से अमीर बन सकता है। व्यक्ति जिस पेशे में लाभ देखता है उसी को अपनाना शुरू कर देता है। पेशे के सम्बन्ध में वह स्थान परिवर्तन भी कर लेता है। इस प्रकार सामाजिक गतिशीलता की प्रक्रिया के द्वारा परम्परागत कीमतों की जगह नई कद्रों-कीमतों का भी विकास हुआ है।

6. इससे समाज सुधारक लहरें आगे आई हैं (Social reform movements came into being due to this) आधुनिकीकरण की प्रक्रिया के द्वारा समाज सुधारक लहरों का विकास होना शुरू हो गया। समाज में जब भी परिवर्तन आता है तो उसका समाज पर प्रभाव अच्छा तथा गलत भी होता है। जब हम इस प्रभाव के अच्छे गुणों की तरफ देखते हैं तो हमें समाज में प्रगति होती नज़र आती है। जब हम इसकी बुराइयों की तरफ देखते हैं तो हमें समाज के विघटन के बारे में पता चलना शुरू हो जाता है। आधुनिकीकरण की प्रक्रिया के द्वारा कई समाज सुधारक लहरें पैदा हुईं जिनका मुख्य उद्देश्य समाज में पाई जाने वाली बुराइयों को समाप्त करना होता है ताकि समाज में सन्तुलन बना रहे। इससे समाज में और प्रगति होती है। समाज सुधारक लहरों तथा आन्दोलनों की मदद से समाज में मिलने वाली उन कीमतों को खत्म किया जाता है जो समाज को गिरावट की तरफ ले जाती है। इस तरह इस प्रक्रिया के द्वारा समाज में परिवर्तन आ जाता है।

7. इसके साथ व्यक्ति की स्थिति में परिवर्तन हो जाता है (It changes the status of Individual)आधुनिकीकरण की प्रक्रिया के द्वारा स्थिति परिवर्तन भी पाया गया है। सर्वप्रथम हम यह देखते हैं कि प्राचीन समय में जाति विशेष व्यवसाय को अपनाना आवश्यक था। परन्तु आधुनिकीकरण की प्रक्रिया के द्वारा एक तरफ के व्यवसायों की अधिकता पाई गई। दूसरी तरफ विशेषीकरण की स्थिति पैदा हो गई। इस प्रकार व्यक्ति की परिस्थितियों में तत्काल परिवर्तन आ गए। जाति प्रथा अलोप हो गई और उसके स्थान पर वर्ग व्यवस्था पैदा होने लग पड़ी। व्यक्ति को स्थिति उसकी योग्यतानुसार प्राप्त होने लगी। इस प्रकार आधुनिकीकरण की प्रक्रिया के द्वारा सामाजिक संगठन और विभिन्न समूहों की स्थितियों में परिवर्तन आने लग गया।

प्रश्न 3. आधुनिकीकरण के विभिन्न कारणों का विस्तार सहित वर्णन करें।
अथवा
आधुनिकीकरण के चार कारण लिखो।
अथवा
आधुनिकीकरण के लिए नगरीकरण ओर औद्योगिकीकरण उत्तरदायी कारण हैं, चर्चा कीजिए।
उत्तर-वैसे तो आधुनिकीकरण के बहुत से कारण हो सकते हैं, परन्तु उनमें से प्रमुख कारणों का वर्णन इस प्रकार है

1. नगरीकरण (Urbanisation)-अंग्रेज़ों के भारत आने से भारत में नगरीकरण की प्रक्रिया का विकास शुरू हुआ। उन्होंने कई बड़े नगर बसाए जैसे कि कलकत्ता, मद्रास तथा बम्बई। स्वतन्त्रता के बाद तो नगरीकरण की प्रक्रिया का विकास तेज़ गति से हुआ। यह कहा जाता है कि नगरीय क्षेत्रों में गाँवों की तुलना में काफ़ी अधिक Infrastructure होता है। व्यक्ति नगरों में अच्छा जीवन व्यतीत कर सकता है। यह कारण है कि पिछले कुछ दशकों में काफ़ी बड़ी संख्या में ग्रामीण लोग नगरों में जाकर रहने लग गए ताकि वहां पर मौजूद अधिक रोज़गार के मौकों, बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं, शैक्षिक संस्थाओं, मनोरंजन के साधनों का लाभ उठाया जा सके। इस प्रकार नगरीकरण की प्रक्रिया ने नगरों में आधुनिकीकरण की प्रक्रिया को बढ़ाने में सहायता की।

2. औद्योगीकरण (Industrialisation)-औद्योगीकरण की प्रक्रिया का अर्थ है उद्योगों के विकास की प्रक्रिया। औद्योगिक क्रान्ति के कारण बड़े-बड़े उद्योग स्थापित हुए तथा समय के साथ-साथ उद्योगों में प्रयोग होने वाली मशीनों में बहुत से परिवर्तन आए। नई तथा आधुनिक मशीनों ने उत्पादन की प्रक्रिया को काफ़ी तेज़ कर दिया। यह सब मशीनें तथा तकनीक सभी देशों में फैल गई। उत्पादन मानवीय हाथों से निकलकर मशीनों के पास चला गया जिसने आधुनिकीकरण की प्रक्रिया को बढ़ाने में काफ़ी बड़ी भूमिका अदा की।

3. शिक्षा (Education) शिक्षा व्यक्ति के अंदर छिपी हुई योग्यता को बाहर निकाल देती है तथा उनमें ज्ञान का भंडार भर देती है। शिक्षा के कारण ही लोग तकनीकी आविष्कार करते हैं। इसे विकास की प्रक्रिया का महत्त्वपूर्ण सूचक माना जाता है। क्योंकि शिक्षा प्राप्त करने के पश्चात् लोग नए आविष्कार करते हैं, इस कारण इसे आधुनिकीकरण लाने में काफ़ी महत्त्वपूर्ण माना जाता है।

4. करिश्माई नेता (Charismatic Leader)—करिश्माई नेता वह नेता होता है जो लोगों को अपने व्यक्तित्व से प्रभावित करता है। उसमें लोगों को प्रभावित करने का सामर्थ्य होता है जिस कारण वे उसके अनुयायी बन जाते हैं। ऐसे नेता अपने करिश्माई व्यक्तित्व से अपने अनुयायियों को आधुनिक विचारों व मूल्यों को अपनाने के लिए प्रेरित करते हैं। इससे समाज में आधुनिकीकरण आता है।

5. जनसम्पर्क के साधन (Means of Mass Media)-जनसम्पर्क के साधनों में हम समाचार-पत्र, मैगज़ीन, पुस्तकें, टी० वी०, रेडियो, फिल्में, इंटरनैट इत्यादि को लेते हैं। इन जनसम्पर्क के साधनों ने समाज में आम जनता के लिए नए विचारों, व्यवहारों तथा सूचनाओं को खोलकर रख दिया है। नई सूचना लाने में जनसम्पर्क के साधन एक महत्त्वपूर्ण साधन बनकर सामने आए हैं जिससे आधुनिकीकरण को आगे बढ़ाने में काफ़ी सहायता मिली है।

प्रश्न 4. आधुनिकीकरण की प्रक्रिया पर नोट लिखें।
उत्तर-आधुनिकीकरण एक ऐसी प्रक्रिया है जिसने समाज के प्रत्येक पक्ष को प्रभावित किया है। इसमें समय के साथ-साथ नई व्यवस्था का विस्तार भी शामिल होता है जिसने सामाजिक संरचना तथा मनोवैज्ञानिक तथ्यों को भी परिवर्तित कर दिया है। क्योंकि समाज अधिक उत्पादक तथा प्रगतिशील बन जाता है इसलिए यह सामाजिक तथा सांस्कृतिक पक्ष से और भी जटिल बन जाता है। इस बारे मैक्स वैबर ने ठीक कहा है कि आधुनिकीकरण की प्रक्रिया में परिवर्तन आने से व्यक्तिगत रिश्ते अवैयक्तिक संबंधों में परिवर्तित हो जाते हैं। यहां इमाईल दुर्शीम भी कहते हैं कि आधुनिकीकरण की प्रक्रिया में परिवर्तन आने से समाज की यान्त्रिक एकता जैविक एकता में परिवर्तित हो जाती है।
औद्योगीकरण के आने से समाज के प्रत्येक क्षेत्र में परिवर्तन आ गया तथा समाज परंपरागत से आधुनिक में बदल गया। यह सब कुछ मुमकिन हुआ है जब कम विकसित क्षेत्रों के लोग विकसित क्षेत्रों में जाने लग गए। इससे पहले कि कोई समाज आधुनिकीकरण की प्रक्रिया का आरम्भ करे, उसे कुछ बातों को मानना आवश्यक है जैसे कि नई शैक्षिक व्यवस्था को अपनाना, नई तकनीक को अपनाने की इच्छा इत्यादि। समाजशास्त्रियों ने आधुनिकीकरण की प्रक्रिया में चार अन्तर्सम्बन्धित प्रक्रियाओं के बारे में बताया है तथा वे हैं

  • तकनीकी क्षेत्र में परिवर्तन की प्रक्रिया साधारण से वैज्ञानिक तकनीक की तरफ सामने आती है। उदाहरण के लिए हैण्डलूम से पावरलूम का परिवर्तन।
  • कृषि के क्षेत्र में भी यह परिवर्तन निर्वाह आर्थिकता के बाजार आर्थिकता में परिवर्तित हो जाता है। उदाहरण के लिए अब बड़े किसान मज़दूरों की सहायता से नकद फसलों को बाज़ार में बेचने के लिए ही पैदा करते हैं।
  • औद्योगिक क्षेत्र में यह मानवीय श्रम से मशीनी श्रम में परिवर्तित हो गया है। उदाहरण के लिए पहले हल बैल से कृषि होती थी, अब यह ट्रैक्टर से होती है।
  • वातावरण के क्षेत्र में भी लोग गाँवों से नगरों की तरफ जा रहे हैं। उदाहरण के लिए उद्योगों के नज़दीक के गाँवों में रहने वाले लोग उद्योगों में कार्य करने के लिए नगरों की तरफ जाते हैं।

आधुनिकीकरण को दो स्तरों पर देखकर समझा जा सकता है। व्यक्तिगत स्तर पर व्यक्ति के व्यवहार तथा उसके विशेष व्यक्तिगत गुणों में परिवर्तन आ जाता है। नए विचारों को मानना, तर्कसंगत दृष्टिकोण तथा अपने विचार प्रकट करने की इच्छा में भी परिवर्तन आ जाता है। आधुनिक व्यक्ति योजना बनाने, संगठन बनाने पर बल देता है। व्यक्ति का विज्ञान तथा तकनीक में विश्वास होता है। आजकल आधुनिकता पर बल देना सम्पूर्ण विश्व में फैल रहा है।

प्रश्न 5. वैश्वीकरण की विस्तार सहित चर्चा करें।
उत्तर-वैश्वीकरण की प्रक्रिया एक व्यापक आर्थिक प्रक्रिया है जोकि सभी समाजों एवं देशों में फैली हुई होती है। इसमें भिन्न-भिन्न देशों में आपस में मुक्त व्यापार एवं आर्थिक सम्बन्ध होते हैं। वास्तव में कोई भी देश अपनी आवश्यकताओं को पूरा करने में समर्थ नहीं होता। उसको अपनी एवं अपने लोगों की आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु दूसरे देशों पर निर्भर रहना पड़ता है। इस प्रकार उस देश के ऊपर भी अन्य देश अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु निर्भर रहते हैं। इस प्रकार आपस में निर्भरता के कारण अलग-अलग देशों में आपसी सम्बन्ध स्थापित हुए और एक विचार आया कि क्यों न एक-दूसरे देशों के बीच मुक्त व्यापार सम्बन्ध स्थापित किए जाएं। इन बढ़ते हुए आर्थिक सम्बन्धों एवं मुक्त व्यापार के विचार को ही वैश्वीकरण का नाम दे दिया गया है। वैश्वीकरण की धारणा में उदारीकरण (Liberalisation) की धारणा है जिसमें विभिन्न देश, अपने देश में व्यापार करने के लिए अन्य देशों के लिए रास्ते खोल देते हैं। यह वैश्वीकरण की धारणा कोई बहुत पुरानी धारणा नहीं है बल्कि यह तो 10-15 वर्ष पुरानी धारणा है, जिसने सम्पूर्ण दुनिया को अपनी चपेट में ले लिया। आज इसी कारण ही दुनिया सिमट रही है या छोटी हो रही है। हम अपने देश में ही या अपने ही शहर में दूसरे देशों में बनी वस्तुएं खरीद सकते हैं। उदाहरणतः कोई भी क्षेत्र देख लें, हमारे देश में विदेशी कारें, Merceedes, General Motors, Rolls Royce, Ferrari, Honda, Mitsubishi, Hyundai, Skoda etc.

आ गई हैं। जबकि आज से 25 वर्ष पहले ये सभी कारें हमारे देश में दिखाई नहीं पड़ती थीं। यह केवल वैश्वीकरण एवं उदारीकरण के कारण ही सम्भव हुआ है, जिस कारण हमारे देश का बाज़ार विदेशी कम्पनियों के लिए खुल गया है। इस प्रकार प्रत्येक क्षेत्र में देसी एवं विदेशी वस्तुओं की भरमार हो गई है। यह भी वैश्वीकरण होता है, जिसमें भिन्नभिन्न देश अन्य देशों में कम्पनियों के लिए अपने रास्ते खोल देते हैं और मुक्त व्यापार को बढ़ावा देते हैं। आज दुनिया सिमट कर छोटा-सा गांव या फिर शहर बनकर रह गई है। सरकार प्रत्येक वर्ग में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (Foreign Direct Investment) बढ़ा रही है। यह ही वैश्वीकरण होता है।

20वीं शताब्दी खत्म होते-होते एक नई प्रक्रिया सामने आई जिसने अन्तर्निर्भरता तथा आपसी लेन-देन के आधार पर सम्पूर्ण संसार को प्रभावित किया। इस प्रक्रिया को वैश्वीकरण कहते हैं। वैश्वीकरण एक बहुपक्षीय प्रक्रिया है। आजकल विश्व एक वैश्विक गाँव बन गया है। अब हमें कुछ पलों में ही पता चल जाता है कि सम्पूर्ण विश्व में क्या हो रहा है। आजकल संसार एक समाज में परिवर्तित हो रहा है। वैश्वीकरण के कारण लोग एक देश को छोड़कर अन्य देशों में जा रहे हैं। आजकल संचार के साधनों की सहायता से हम विश्व के किसी भी कोने में बैठकर आसानी से बातचीत कर सकते हैं। यह वैश्वीकरण तथा इंटरनैट के कारण ही मुमकिन हो पाया है।

प्रश्न 6. वैश्वीकरण क्या है ? इसके प्रकारों की विस्तार सहित चर्चा करें।
अथवा तकनीकी वैश्वीकरण को वैश्वीकरण के प्रकार के रूप में लिखें।
उत्तर-

वैश्वीकरण की प्रक्रिया एक व्यापक आर्थिक प्रक्रिया है जोकि सभी समाजों एवं देशों में फैली हुई होती है। इसमें भिन्न-भिन्न देशों में आपस में मुक्त व्यापार एवं आर्थिक सम्बन्ध होते हैं। वास्तव में कोई भी देश अपनी आवश्यकताओं को पूरा करने में समर्थ नहीं होता। उसको अपनी एवं अपने लोगों की आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु दूसरे देशों पर निर्भर रहना पड़ता है। इस प्रकार उस देश के ऊपर भी अन्य देश अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु निर्भर रहते हैं। इस प्रकार आपस में निर्भरता के कारण अलग-अलग देशों में आपसी सम्बन्ध स्थापित हुए और एक विचार आया कि क्यों न एक-दूसरे देशों के बीच मुक्त व्यापार सम्बन्ध स्थापित किए जाएं। इन बढ़ते हुए आर्थिक सम्बन्धों एवं मुक्त व्यापार के विचार को ही वैश्वीकरण का नाम दे दिया गया है। वैश्वीकरण की धारणा में उदारीकरण (Liberalisation) की धारणा है जिसमें विभिन्न देश, अपने देश में व्यापार करने के लिए अन्य देशों के लिए रास्ते खोल देते हैं। यह वैश्वीकरण की धारणा कोई बहुत पुरानी धारणा नहीं है बल्कि यह तो 10-15 वर्ष पुरानी धारणा है, जिसने सम्पूर्ण दुनिया को अपनी चपेट में ले लिया। आज इसी कारण ही दुनिया सिमट रही है या छोटी हो रही है। हम अपने देश में ही या अपने ही शहर में दूसरे देशों में बनी वस्तुएं खरीद सकते हैं। उदाहरणतः कोई भी क्षेत्र देख लें, हमारे देश में विदेशी कारें, Merceedes, General Motors, Rolls Royce, Ferrari, Honda, Mitsubishi, Hyundai, Skoda etc.

आ गई हैं। जबकि आज से 25 वर्ष पहले ये सभी कारें हमारे देश में दिखाई नहीं पड़ती थीं। यह केवल वैश्वीकरण एवं उदारीकरण के कारण ही सम्भव हुआ है, जिस कारण हमारे देश का बाज़ार विदेशी कम्पनियों के लिए खुल गया है। इस प्रकार प्रत्येक क्षेत्र में देसी एवं विदेशी वस्तुओं की भरमार हो गई है। यह भी वैश्वीकरण होता है, जिसमें भिन्नभिन्न देश अन्य देशों में कम्पनियों के लिए अपने रास्ते खोल देते हैं और मुक्त व्यापार को बढ़ावा देते हैं। आज दुनिया सिमट कर छोटा-सा गांव या फिर शहर बनकर रह गई है। सरकार प्रत्येक वर्ग में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (Foreign Direct Investment) बढ़ा रही है। यह ही वैश्वीकरण होता है।

20वीं शताब्दी खत्म होते-होते एक नई प्रक्रिया सामने आई जिसने अन्तर्निर्भरता तथा आपसी लेन-देन के आधार पर सम्पूर्ण संसार को प्रभावित किया। इस प्रक्रिया को वैश्वीकरण कहते हैं। वैश्वीकरण एक बहुपक्षीय प्रक्रिया है। आजकल विश्व एक वैश्विक गाँव बन गया है। अब हमें कुछ पलों में ही पता चल जाता है कि सम्पूर्ण विश्व में क्या हो रहा है। आजकल संसार एक समाज में परिवर्तित हो रहा है। वैश्वीकरण के कारण लोग एक देश को छोड़कर अन्य देशों में जा रहे हैं। आजकल संचार के साधनों की सहायता से हम विश्व के किसी भी कोने में बैठकर आसानी से बातचीत कर सकते हैं। यह वैश्वीकरण तथा इंटरनैट के कारण ही मुमकिन हो पाया है।

वैश्वीकरण के प्रकार-वैश्वीकरण के कई प्रकार होते हैं जिनका वर्णन इस प्रकार है-

1. पर्यावरणीय वैश्वीकरण (Ecological Globalisation)-वैश्वीकरण के इस प्रकार में हम वातावरण प्रदूषण को ले सकते हैं जिससे ओजोन परत प्रभावित हो रही है। इससे विश्व-तापीकरण भी बढ़ रहा है। सांसारिक स्तर पर इस समस्या से निपटने के प्रयास किए जा रहे हैं। अलग-अलग देशों में समझौतें हो रहे हैं ताकि वातावरण प्रदूषण को रोका जा सके। ओजोन परत को बचाने के लिए Montreal Protocol भी बनाया गया ताकि वातावरण में छोडी जाने वाली कार्बन डाइआक्साइड की मात्रा को कम किया जा सके।

2. सांस्कृतिक वैश्वीकरण (Cultural Globalisation)-सांस्कृतिक वैश्वीकरण का अर्थ है संसार के एक हिस्से में मौजूद नियमों, विचारों, मूल्यों इत्यादि का दूसरे हिस्से में हस्तांतरण। यह हस्तांतरण इंटरनैट, मीडिया, घूमने इत्यादि के कारण मुमकिन हो पाया है। इससे अलग-अलग संस्कृतियों के लोगों के बीच अन्तक्रिया बढ़ गई तथा सांस्कृतिक प्रथाओं का आदान-प्रदान शुरू हो गया।

3. आर्थिक वैश्वीकरण (Economic Globalisation) आर्थिक, वैश्वीकरण का अर्थ है सम्पूर्ण विश्व में वस्तुओं, सेवाओं तथा पूँजी के आदान-प्रदान के कारण उत्पन्न हुई अन्तर्निर्भरता। इस अन्तर्निर्भरता के कारण एक देश की आर्थिकता का गलत प्रभाव विश्व स्तर पर देखने को मिल जाता है। उदाहरण के लिए 2009 में एक वैश्विक संकट आया जिसने विश्वभर में देशों को प्रभावित किया।

4. तकनीकी वैश्वीकरण (Technological Globalisation)-तकनीकी वैश्वीकरण का अर्थ है संचार के साधनों में आए क्रान्तिकारी परिवर्तन जिनसे संसार का एक हिस्सा बाकी हिस्सों से आसानी से जुड़ गया। आधुनिक यातायात के साधनों ने भौगोलिक अन्तरों को कम कर दिया है तथा कई प्रकार के लेन-देन शुरू हो गए। उदाहरण के लिए मोबाइल, इंटरनैट इत्यादि।

5. राजनीतिक वैश्वीकरण (Political Globalisation) राजनीतिक वैश्वीकरण में एक समान नीतियों को चारों तरफ अपनाया जाता है। अपनी-अपनी समस्याओं के कारण अलग-अलग देश एक-दूसरे से सन्धियां करते हैं। इस कारण ही कई अन्तर्राष्ट्रीय संगठन भी अस्तित्व में आए हैं। उदाहरण के लिए संयुक्त राष्ट्र।

प्रश्न 7. वैश्वीकरण की विशेषताओं का विस्तार सहित उल्लेख करें।
अथवा
वैश्वीकरण की विशेषताओं की विस्तारपूर्वक व्याख्या कीजिए।
उत्तर-वैश्वीकरण की विशेषताएं (Characteristics of Globalisation) विश्वव्यापीकरण वास्तव में भिन्न-भिन्न देशों की आपस में निर्भरता होने पर अस्तित्व में आया है। वास्तव में विभिन्न देश अपनी-अपनी आवश्यकताओं के कारण विभिन्न देशों पर निर्भर होते हैं। इसी कारण वह एक-दूसरे के साथ आयात-निर्यात करते हैं। इस कारण वैश्वीकरण का सिद्धान्त अस्तित्व में आया।

1. विश्व व्यापार (World Trade)—वैश्वीकरण की सबसे महत्त्वपूर्ण एवं आवश्यक विशेषता है विश्व व्यापार। यह दुनिया के व्यापार का सबसे मज़बूत आधार है। यह भिन्न क्षेत्रों एवं देशों में रहने वालों को आपस में जोड़ता है और उनको आपस में व्यापार करवाता है। जैसे–भारतवर्ष में चाय का उत्पादन सबसे अधिक होता है, इसी कारण विभिन्न देश भारत से चाय का व्यापार करते हैं और अरब देशों में तेल के भण्डार अधिक होने पर विभिन्न देश वहां से तेल के ऊपर निर्भर रहते हैं। इस प्रकार विभिन्न देश, विभिन्न वस्तुओं के लेन-देन के कारण आपस में निर्भर रहते हैं। भारत के लोग अरब के लोगों और अरब के लोग भारत के लोगों पर निर्भर करते हैं। इससे विश्व व्यापार बढ़ा एवं वैश्वीकरण भी बढ़ा।

2. आर्थिक वैश्वीकरण (Economic Globalisation)-वैश्वीकरण ने संसार में नई आर्थिकता पैदा की है। अब एक देश की आर्थिकता दूसरे देश की आर्थिकता पर निर्भर करती है। इस कारण विश्व आर्थिकता (World Economy) का सिद्धान्त हमारे सामने आया। विभिन्न देश आर्थिकता के कारण आपस में जुड़ गए हैं। उनमें इसी कारण सांस्कृतिक तत्त्वों का आदान-प्रदान भी आरम्भ हो गया। निवेश, लेन-देन, श्रम-विभाजन, विशेषीकरण, उत्पादन, खपत आदि का इस व्यापार में काफ़ी महत्त्वपूर्ण भाग है। आर्थिक वैश्वीकरण ने पूंजीवाद को काफ़ी आगे बढ़ाया है। अब अन्तर्राष्ट्रीय आर्थिकता की संरचना के बारे में लोग सोच रहे हैं।

3. बाज़ार का वैश्वीकरण (Globalisation of Market)—वैश्वीकरण ने बाज़ार को भी बढ़ा दिया है। प्रत्येक बाज़ार का उत्पादन के तौर पर ही नहीं, बल्कि खपत के आधार पर भी वैश्वीकरण हो गया है। अब कई देशों की कम्पनियां दूसरे देशों के बाजारों को ध्यान में रख कर वस्तुओं का उत्पादन करने लग गई हैं। इस प्रकार उत्पादन एवं खपत विदेशी बाजार की आवश्यकताओं पर निर्भर रहने लग पड़े हैं। इसके कारण देश का अन्य देशों के साथ व्यापार बढ़ता है और विदेशी मुद्रा (Foreign Exchange) देश में आती है। इस प्रकार बाज़ार भी विदेशों के ऊपर निर्भर रहने लग पड़े हैं। बाजार में विदेशी वस्तुओं की अधिकता हो गई है। यहां तक कि खाने-पीने की डिब्बा बंद वस्तुएं भी विदेशों से आने लग गई हैं। इस प्रकार वैश्वीकरण ने बाज़ार को भी व्यापक बना दिया है।

4. श्रम विभाजन (Division of Labour)-वैश्वीकरण ने श्रम विभाजन को भी काफ़ी बढ़ाया है। अब लोग कोई कोर्स सीख कर ही विदेशों में जाते हैं। उदाहरणतः लोग विदेशों में जाने से पूर्व कम्प्यूटर के कई-कई प्रकार के कोर्स (Course) करते हैं ताकि वह विदेशों में जाकर पैसे कमा सकें। अखबारों में भी भिन्न-भिन्न प्रकार के व्यक्तियों की आवश्यकताओं के बारे में भी लिखा हुआ पाया जाता है जोकि किसी भी क्षेत्र में निपुण हो। श्रम विभाजन इस कारण बढ़ गया है और विभिन्न क्षेत्रों में निपुण व्यक्तियों की आवश्यकता भी बढ़ गई है। यह केवल वैश्वीकरण की ही देन है कि इसने श्रम विभाजन को बढ़ाया है।

5. श्रमिकों का एक देश से दूसरे देश में जाना (Migration of labourers to other countries)वैश्वीकरण की एक और विशेषता है कि श्रमिकों का एक देश से दूसरे देश की ओर कार्य के लिए जाना। साधारणतः दक्षिण एशिया के भिन्न-भिन्न व्यवसायों में निपुण लोग पश्चिम देशों में कार्य हेतु जाते हैं क्योंकि एशिया के लोगों को पश्चिमी देशों की कमाई अधिक लगती है। दुनिया भर के श्रमिक विभिन्न देशों में जाकर पैसे कमाते हैं और कार्य करते हैं। इसलिए वैश्वीकरण के कारण ही श्रमिक विदेशों में जाकर कार्य करके धन प्राप्त करते हैं।

6. विश्व-आर्थिकता (World Economy)-वैश्वीकरण की एक अन्य विशेषता आर्थिकता का बढ़ना है। अब एक देश की आर्थिकता केवल एक देश तक सीमित होकर नहीं रह गई है क्योंकि उस देश की आर्थिकता के ऊपर अन्य देशों की आर्थिकता का प्रभाव पड़ता है। भिन्न-भिन्न देशों में व्यापार बढ़ने पर आर्थिकता की एक-दूसरे के ऊपर निर्भरता बढ़ी है। इस तरह अन्तर्निर्भरता के कारण विश्व आर्थिकता एवं विश्व व्यापार में वृद्धि हुई है।

प्रश्न 8. वैश्वीकरण की प्रक्रिया पर विस्तृत नोट लिखें।
उत्तर- वैश्वीकरण की प्रक्रिया एक व्यापक आर्थिक प्रक्रिया है जोकि सभी समाजों एवं देशों में फैली हुई होती है। इसमें भिन्न-भिन्न देशों में आपस में मुक्त व्यापार एवं आर्थिक सम्बन्ध होते हैं। वास्तव में कोई भी देश अपनी आवश्यकताओं को पूरा करने में समर्थ नहीं होता। उसको अपनी एवं अपने लोगों की आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु दूसरे देशों पर निर्भर रहना पड़ता है। इस प्रकार उस देश के ऊपर भी अन्य देश अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु निर्भर रहते हैं। इस प्रकार आपस में निर्भरता के कारण अलग-अलग देशों में आपसी सम्बन्ध स्थापित हुए और एक विचार आया कि क्यों न एक-दूसरे देशों के बीच मुक्त व्यापार सम्बन्ध स्थापित किए जाएं। इन बढ़ते हुए आर्थिक सम्बन्धों एवं मुक्त व्यापार के विचार को ही वैश्वीकरण का नाम दे दिया गया है। वैश्वीकरण की धारणा में उदारीकरण (Liberalisation) की धारणा है जिसमें विभिन्न देश, अपने देश में व्यापार करने के लिए अन्य देशों के लिए रास्ते खोल देते हैं। यह वैश्वीकरण की धारणा कोई बहुत पुरानी धारणा नहीं है बल्कि यह तो 10-15 वर्ष पुरानी धारणा है, जिसने सम्पूर्ण दुनिया को अपनी चपेट में ले लिया। आज इसी कारण ही दुनिया सिमट रही है या छोटी हो रही है। हम अपने देश में ही या अपने ही शहर में दूसरे देशों में बनी वस्तुएं खरीद सकते हैं। उदाहरणतः कोई भी क्षेत्र देख लें, हमारे देश में विदेशी कारें, Merceedes, General Motors, Rolls Royce, Ferrari, Honda, Mitsubishi, Hyundai, Skoda etc.

आ गई हैं। जबकि आज से 25 वर्ष पहले ये सभी कारें हमारे देश में दिखाई नहीं पड़ती थीं। यह केवल वैश्वीकरण एवं उदारीकरण के कारण ही सम्भव हुआ है, जिस कारण हमारे देश का बाज़ार विदेशी कम्पनियों के लिए खुल गया है। इस प्रकार प्रत्येक क्षेत्र में देसी एवं विदेशी वस्तुओं की भरमार हो गई है। यह भी वैश्वीकरण होता है, जिसमें भिन्नभिन्न देश अन्य देशों में कम्पनियों के लिए अपने रास्ते खोल देते हैं और मुक्त व्यापार को बढ़ावा देते हैं। आज दुनिया सिमट कर छोटा-सा गांव या फिर शहर बनकर रह गई है। सरकार प्रत्येक वर्ग में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (Foreign Direct Investment) बढ़ा रही है। यह ही वैश्वीकरण होता है।

20वीं शताब्दी खत्म होते-होते एक नई प्रक्रिया सामने आई जिसने अन्तर्निर्भरता तथा आपसी लेन-देन के आधार पर सम्पूर्ण संसार को प्रभावित किया। इस प्रक्रिया को वैश्वीकरण कहते हैं। वैश्वीकरण एक बहुपक्षीय प्रक्रिया है। आजकल विश्व एक वैश्विक गाँव बन गया है। अब हमें कुछ पलों में ही पता चल जाता है कि सम्पूर्ण विश्व में क्या हो रहा है। आजकल संसार एक समाज में परिवर्तित हो रहा है। वैश्वीकरण के कारण लोग एक देश को छोड़कर अन्य देशों में जा रहे हैं। आजकल संचार के साधनों की सहायता से हम विश्व के किसी भी कोने में बैठकर आसानी से बातचीत कर सकते हैं। यह वैश्वीकरण तथा इंटरनैट के कारण ही मुमकिन हो पाया है।

वैश्वीकरण की प्रक्रिया एक व्यापक आर्थिक प्रक्रिया है जोकि सभी समाजों एवं देशों में फैली हुई होती है। इसमें भिन्न-भिन्न देशों में आपस में मुक्त व्यापार एवं आर्थिक सम्बन्ध होते हैं। वास्तव में कोई भी देश अपनी आवश्यकताओं को पूरा करने में समर्थ नहीं होता। उसको अपनी एवं अपने लोगों की आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु दूसरे देशों पर निर्भर रहना पड़ता है। इस प्रकार उस देश के ऊपर भी अन्य देश अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु निर्भर रहते हैं। इस प्रकार आपस में निर्भरता के कारण अलग-अलग देशों में आपसी सम्बन्ध स्थापित हुए और एक विचार आया कि क्यों न एक-दूसरे देशों के बीच मुक्त व्यापार सम्बन्ध स्थापित किए जाएं। इन बढ़ते हुए आर्थिक सम्बन्धों एवं मुक्त व्यापार के विचार को ही वैश्वीकरण का नाम दे दिया गया है। वैश्वीकरण की धारणा में उदारीकरण (Liberalisation) की धारणा है जिसमें विभिन्न देश, अपने देश में व्यापार करने के लिए अन्य देशों के लिए रास्ते खोल देते हैं। यह वैश्वीकरण की धारणा कोई बहुत पुरानी धारणा नहीं है बल्कि यह तो 10-15 वर्ष पुरानी धारणा है, जिसने सम्पूर्ण दुनिया को अपनी चपेट में ले लिया। आज इसी कारण ही दुनिया सिमट रही है या छोटी हो रही है। हम अपने देश में ही या अपने ही शहर में दूसरे देशों में बनी वस्तुएं खरीद सकते हैं। उदाहरणतः कोई भी क्षेत्र देख लें, हमारे देश में विदेशी कारें, Merceedes, General Motors, Rolls Royce, Ferrari, Honda, Mitsubishi, Hyundai, Skoda etc.

आ गई हैं। जबकि आज से 25 वर्ष पहले ये सभी कारें हमारे देश में दिखाई नहीं पड़ती थीं। यह केवल वैश्वीकरण एवं उदारीकरण के कारण ही सम्भव हुआ है, जिस कारण हमारे देश का बाज़ार विदेशी कम्पनियों के लिए खुल गया है। इस प्रकार प्रत्येक क्षेत्र में देसी एवं विदेशी वस्तुओं की भरमार हो गई है। यह भी वैश्वीकरण होता है, जिसमें भिन्नभिन्न देश अन्य देशों में कम्पनियों के लिए अपने रास्ते खोल देते हैं और मुक्त व्यापार को बढ़ावा देते हैं। आज दुनिया सिमट कर छोटा-सा गांव या फिर शहर बनकर रह गई है। सरकार प्रत्येक वर्ग में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (Foreign Direct Investment) बढ़ा रही है। यह ही वैश्वीकरण होता है।

20वीं शताब्दी खत्म होते-होते एक नई प्रक्रिया सामने आई जिसने अन्तर्निर्भरता तथा आपसी लेन-देन के आधार पर सम्पूर्ण संसार को प्रभावित किया। इस प्रक्रिया को वैश्वीकरण कहते हैं। वैश्वीकरण एक बहुपक्षीय प्रक्रिया है। आजकल विश्व एक वैश्विक गाँव बन गया है। अब हमें कुछ पलों में ही पता चल जाता है कि सम्पूर्ण विश्व में क्या हो रहा है। आजकल संसार एक समाज में परिवर्तित हो रहा है। वैश्वीकरण के कारण लोग एक देश को छोड़कर अन्य देशों में जा रहे हैं। आजकल संचार के साधनों की सहायता से हम विश्व के किसी भी कोने में बैठकर आसानी से बातचीत कर सकते हैं। यह वैश्वीकरण तथा इंटरनैट के कारण ही मुमकिन हो पाया है।

वैश्वीकरण के प्रकार-वैश्वीकरण के कई प्रकार होते हैं जिनका वर्णन इस प्रकार है-

1. पर्यावरणीय वैश्वीकरण (Ecological Globalisation)-वैश्वीकरण के इस प्रकार में हम वातावरण प्रदूषण को ले सकते हैं जिससे ओजोन परत प्रभावित हो रही है। इससे विश्व-तापीकरण भी बढ़ रहा है। सांसारिक स्तर पर इस समस्या से निपटने के प्रयास किए जा रहे हैं। अलग-अलग देशों में समझौतें हो रहे हैं ताकि वातावरण प्रदूषण को रोका जा सके। ओजोन परत को बचाने के लिए Montreal Protocol भी बनाया गया ताकि वातावरण में छोडी जाने वाली कार्बन डाइआक्साइड की मात्रा को कम किया जा सके।

2. सांस्कृतिक वैश्वीकरण (Cultural Globalisation)-सांस्कृतिक वैश्वीकरण का अर्थ है संसार के एक हिस्से में मौजूद नियमों, विचारों, मूल्यों इत्यादि का दूसरे हिस्से में हस्तांतरण। यह हस्तांतरण इंटरनैट, मीडिया, घूमने इत्यादि के कारण मुमकिन हो पाया है। इससे अलग-अलग संस्कृतियों के लोगों के बीच अन्तक्रिया बढ़ गई तथा सांस्कृतिक प्रथाओं का आदान-प्रदान शुरू हो गया।

3. आर्थिक वैश्वीकरण (Economic Globalisation) आर्थिक, वैश्वीकरण का अर्थ है सम्पूर्ण विश्व में वस्तुओं, सेवाओं तथा पूँजी के आदान-प्रदान के कारण उत्पन्न हुई अन्तर्निर्भरता। इस अन्तर्निर्भरता के कारण एक देश की आर्थिकता का गलत प्रभाव विश्व स्तर पर देखने को मिल जाता है। उदाहरण के लिए 2009 में एक वैश्विक संकट आया जिसने विश्वभर में देशों को प्रभावित किया।

4. तकनीकी वैश्वीकरण (Technological Globalisation)-तकनीकी वैश्वीकरण का अर्थ है संचार के साधनों में आए क्रान्तिकारी परिवर्तन जिनसे संसार का एक हिस्सा बाकी हिस्सों से आसानी से जुड़ गया। आधुनिक यातायात के साधनों ने भौगोलिक अन्तरों को कम कर दिया है तथा कई प्रकार के लेन-देन शुरू हो गए। उदाहरण के लिए मोबाइल, इंटरनैट इत्यादि।

5. राजनीतिक वैश्वीकरण (Political Globalisation) राजनीतिक वैश्वीकरण में एक समान नीतियों को चारों तरफ अपनाया जाता है। अपनी-अपनी समस्याओं के कारण अलग-अलग देश एक-दूसरे से सन्धियां करते हैं। इस कारण ही कई अन्तर्राष्ट्रीय संगठन भी अस्तित्व में आए हैं। उदाहरण के लिए संयुक्त राष्ट्र।

वैश्वीकरण की विशेषताएं (Characteristics of Globalisation) विश्वव्यापीकरण वास्तव में भिन्न-भिन्न देशों की आपस में निर्भरता होने पर अस्तित्व में आया है। वास्तव में विभिन्न देश अपनी-अपनी आवश्यकताओं के कारण विभिन्न देशों पर निर्भर होते हैं। इसी कारण वह एक-दूसरे के साथ आयात-निर्यात करते हैं। इस कारण वैश्वीकरण का सिद्धान्त अस्तित्व में आया।

1. विश्व व्यापार (World Trade)—वैश्वीकरण की सबसे महत्त्वपूर्ण एवं आवश्यक विशेषता है विश्व व्यापार। यह दुनिया के व्यापार का सबसे मज़बूत आधार है। यह भिन्न क्षेत्रों एवं देशों में रहने वालों को आपस में जोड़ता है और उनको आपस में व्यापार करवाता है। जैसे–भारतवर्ष में चाय का उत्पादन सबसे अधिक होता है, इसी कारण विभिन्न देश भारत से चाय का व्यापार करते हैं और अरब देशों में तेल के भण्डार अधिक होने पर विभिन्न देश वहां से तेल के ऊपर निर्भर रहते हैं। इस प्रकार विभिन्न देश, विभिन्न वस्तुओं के लेन-देन के कारण आपस में निर्भर रहते हैं। भारत के लोग अरब के लोगों और अरब के लोग भारत के लोगों पर निर्भर करते हैं। इससे विश्व व्यापार बढ़ा एवं वैश्वीकरण भी बढ़ा।

2. आर्थिक वैश्वीकरण (Economic Globalisation)-वैश्वीकरण ने संसार में नई आर्थिकता पैदा की है। अब एक देश की आर्थिकता दूसरे देश की आर्थिकता पर निर्भर करती है। इस कारण विश्व आर्थिकता (World Economy) का सिद्धान्त हमारे सामने आया। विभिन्न देश आर्थिकता के कारण आपस में जुड़ गए हैं। उनमें इसी कारण सांस्कृतिक तत्त्वों का आदान-प्रदान भी आरम्भ हो गया। निवेश, लेन-देन, श्रम-विभाजन, विशेषीकरण, उत्पादन, खपत आदि का इस व्यापार में काफ़ी महत्त्वपूर्ण भाग है। आर्थिक वैश्वीकरण ने पूंजीवाद को काफ़ी आगे बढ़ाया है। अब अन्तर्राष्ट्रीय आर्थिकता की संरचना के बारे में लोग सोच रहे हैं।

3. बाज़ार का वैश्वीकरण (Globalisation of Market)—वैश्वीकरण ने बाज़ार को भी बढ़ा दिया है। प्रत्येक बाज़ार का उत्पादन के तौर पर ही नहीं, बल्कि खपत के आधार पर भी वैश्वीकरण हो गया है। अब कई देशों की कम्पनियां दूसरे देशों के बाजारों को ध्यान में रख कर वस्तुओं का उत्पादन करने लग गई हैं। इस प्रकार उत्पादन एवं खपत विदेशी बाजार की आवश्यकताओं पर निर्भर रहने लग पड़े हैं। इसके कारण देश का अन्य देशों के साथ व्यापार बढ़ता है और विदेशी मुद्रा (Foreign Exchange) देश में आती है। इस प्रकार बाज़ार भी विदेशों के ऊपर निर्भर रहने लग पड़े हैं। बाजार में विदेशी वस्तुओं की अधिकता हो गई है। यहां तक कि खाने-पीने की डिब्बा बंद वस्तुएं भी विदेशों से आने लग गई हैं। इस प्रकार वैश्वीकरण ने बाज़ार को भी व्यापक बना दिया है।

4. श्रम विभाजन (Division of Labour)-वैश्वीकरण ने श्रम विभाजन को भी काफ़ी बढ़ाया है। अब लोग कोई कोर्स सीख कर ही विदेशों में जाते हैं। उदाहरणतः लोग विदेशों में जाने से पूर्व कम्प्यूटर के कई-कई प्रकार के कोर्स (Course) करते हैं ताकि वह विदेशों में जाकर पैसे कमा सकें। अखबारों में भी भिन्न-भिन्न प्रकार के व्यक्तियों की आवश्यकताओं के बारे में भी लिखा हुआ पाया जाता है जोकि किसी भी क्षेत्र में निपुण हो। श्रम विभाजन इस कारण बढ़ गया है और विभिन्न क्षेत्रों में निपुण व्यक्तियों की आवश्यकता भी बढ़ गई है। यह केवल वैश्वीकरण की ही देन है कि इसने श्रम विभाजन को बढ़ाया है।

5. श्रमिकों का एक देश से दूसरे देश में जाना (Migration of labourers to other countries)वैश्वीकरण की एक और विशेषता है कि श्रमिकों का एक देश से दूसरे देश की ओर कार्य के लिए जाना। साधारणतः दक्षिण एशिया के भिन्न-भिन्न व्यवसायों में निपुण लोग पश्चिम देशों में कार्य हेतु जाते हैं क्योंकि एशिया के लोगों को पश्चिमी देशों की कमाई अधिक लगती है। दुनिया भर के श्रमिक विभिन्न देशों में जाकर पैसे कमाते हैं और कार्य करते हैं। इसलिए वैश्वीकरण के कारण ही श्रमिक विदेशों में जाकर कार्य करके धन प्राप्त करते हैं।

6. विश्व-आर्थिकता (World Economy)-वैश्वीकरण की एक अन्य विशेषता आर्थिकता का बढ़ना है। अब एक देश की आर्थिकता केवल एक देश तक सीमित होकर नहीं रह गई है क्योंकि उस देश की आर्थिकता के ऊपर अन्य देशों की आर्थिकता का प्रभाव पड़ता है। भिन्न-भिन्न देशों में व्यापार बढ़ने पर आर्थिकता की एक-दूसरे के ऊपर निर्भरता बढ़ी है। इस तरह अन्तर्निर्भरता के कारण विश्व आर्थिकता एवं विश्व व्यापार में वृद्धि हुई है।

अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्न (OTHER IMPORTANT QUESTIONS)

I. वस्तुनिष्ठ प्रश्न

A. बहुविकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1. उस प्रक्रिया को क्या कहते हैं जो परिवर्तन पर आधारित है तथा जो किसी वस्तु के अच्छे या बुरे होने के बारे में बताती है ?
(क) संस्कृतिकरण
(ख) औद्योगीकरण
(ग) नगरीकरण
(घ) आधुनिकीकरण।
उत्तर-(घ) आधुनिकीकरण।

प्रश्न 2. आधुनिकीकरण के लिए क्या आवश्यक है ?
(क) शिक्षा का उच्च स्तर
(ख) यातायात तथा संचार के साधनों का विकास
(ग) उद्योगों को प्राथमिकता देना।
(घ) उपर्युक्त सभी।
उत्तर-(घ) उपर्युक्त सभी।

प्रश्न 3. भारत में आधुनिकीकरण लाने के लिए कौन उत्तरदायी है ?
(क) मुग़ल शासक
(ख) भारत सरकार
(ग) अंग्रेजी सरकार
(घ) कोई नहीं।
उत्तर-(क) मुग़ल शासक।

प्रश्न 4. उस प्रक्रिया को क्या कहते हैं जिसमें अलग-अलग देशों के बीच मुक्त व्यापार, सेवाएं, पूंजी निवेश तथा लोगों का आदान-प्रदान होता है ?
(क) निजीकरण
(ख) वैश्वीकरण
(ग) आधुनिकीकरण
(घ) उदारीकरण।
उत्तर-(ख) वैश्वीकरण।

प्रश्न 5. सरकारी कंपनियों को निजी हाथों में बेचने की प्रक्रिया को क्या कहते हैं ?
(क) निजीकरण
(ख) वैश्वीकरण
(ग) उदारीकरण
(घ) आधुनिकीकरण।
उत्तर-(क) निजीकरण।

प्रश्न 6. नियंत्रित अर्थव्यवस्था से अनावश्यक प्रतिबन्धों को हटाने को क्या कहते हैं?
(क) निजीकरण
(ख) वैश्वीकरण
(ग) उदारीकरण
(घ) आधुनिकीकरण।
उत्तर-(ग) उदारीकरण।

B. रिक्त स्थान भरें-

1. सांस्कृतिक पिछड़ेपन का सिद्धान्त …………….. ने दिया था।
2. जापानी लोग वैश्वीकरण को ….. कहते हैं।
3. …….. ने वैश्वीकरण के चार आधार दिए हैं।
4. नियंत्रित अर्थव्यवस्था से अनावश्यक प्रतिबन्ध हटाने को ……………… कहते हैं।
5. सार्वजनिक कंपनियों को व्यक्तिगत हाथों में देने की प्रक्रिया को …………….. कहते हैं।
उत्तर-

  1. विलियम आगबर्न,
  2. Gurobaruka,
  3. Giddens,
  4. उदारीकरण,
  5. निजीकरण।

C. सही/ग़लत पर निशान लगाएं-

1. वैश्वीकरण में पूँजी तथा सेवाओं का आदान-प्रदान नहीं होता।
2. वैश्वीकरण में संसार एक वैश्विक गाँव बनकर रह गया है।
3. वैबर के अनुसार आधुनिकीकरण से व्यक्तिगत संबंध अवैयक्तिक बन जाते हैं।
4. आधुनिकीकरण की प्रक्रिया में कम पूँजी निवेश से आधुनिकता आ जाती है।
5. आधुनिकीकरण से तकनीक साधारण से वैज्ञानिक हो जाती है।
उत्तर-

  1. सही,
  2. सही,
  3. सही,
  4. गलत,
  5. सही।

II. एक शब्द/एक पंक्ति वाले प्रश्न उत्तर

प्रश्न 1. आधुनिकीकरण का क्या अर्थ है ?
उत्तर-आधुनिक जीवन जीने के तरीकों तथा मूल्यों को अपनाने की प्रक्रिया को आधुनिकीकरण कहते हैं।

प्रश्न 2. आधुनिकीकरण ने कौन-से प्रमुख क्षेत्रों का विकास किया है ?
उत्तर-उद्योगों, यातायात व संचार के साधन, स्वास्थ्य व शैक्षिक सुविधाएं इत्यादि।

प्रश्न 3. आधुनिक समाजों की प्रमुख विशेषता क्या होती है ?
उत्तर-आधुनिक समाज एक-दूसरे पर अपनी आवश्यकताओं के लिए आत्मनिर्भर होते हैं।

प्रश्न 4. सबसे पहले किसने शब्द आधुनिकीकरण का प्रयोग किया था ?
उत्तर- डेनियल लर्नर ने।

प्रश्न 5. आधुनिकीकरण की प्रक्रिया लंबी क्यों है ?
उत्तर-क्योंकि समाज के आधुनिक होने में कई पीढ़ियां लग जाती हैं।

प्रश्न 6. सांस्कृतिक पिछड़ापन का सिद्धांत किसने दिया था ?
उत्तर-सांस्कृतिक पिछड़ापन का सिद्धांत विलियम एफ० आगबन ने दिया था।

प्रश्न 7. दुर्थीम ने आधुनिकीकरण की प्रक्रिया के बारे में क्या कहा था ?
उत्तर-दुर्थीम के अनुसार आधुनिकीकरण की प्रक्रिया में यान्त्रिक एकता जैविक एकता में बदल जाती है।

प्रश्न 8. आधुनिकीकरण की प्रक्रिया में एक रुकावट बताएं।
उत्तर-कम विकसित देशों में औपनिवेशिक शासन।

प्रश्न 9. आधुनिकीकरण का एक कारण बताएं।
उत्तर-नगरीकरण का बढ़ना, उद्योगों का विकसित होना, शिक्षा का प्रसार।

प्रश्न 10. वैश्विक ग्राम का संकल्प किसने दिया था ?
उत्तर- वैश्विक ग्राम का संकल्प मार्शल मैक्ल्यूहन ने दिया था।

प्रश्न 11. वैश्वीकरण को इंडोनेशिया में क्या कहते हैं ?
उत्तर-वैश्वीकरण को इंडोनेशिया में globalisari कहते हैं।

प्रश्न 12. वैश्वीकरण की एक विशेषता बताएं।
उत्तर-वैश्वीकरण में स्थानीय कार्य विश्व के स्तर पर फैल जाते हैं।

प्रश्न 13. LPG का क्या अर्थ है ?
उत्तर-Liberalisation, Privatisation तथा Globalisation.

प्रश्न 14. वैश्वीकरण का एक कारण बताएं।
उत्तर-वैश्वीकरण यातायात व संचार के साधनों के कारण मुमकिन हो सका है।

प्रश्न 15. वैश्वीकरण का एक परिणाम बताएं।
उत्तर-इससे देश में विदेशी पूँजी निवेश बढ़ता है।

प्रश्न 16. FDI का क्या अर्थ है ?
उत्तर-FDI का अर्थ है Foreign Direct Investment (विदेशी पूँजी निवेश)।

III. अति लघु उत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1. आधुनिकीकरण क्या होता है ?
उत्तर-आधुनिकीकरण का अर्थ है जीवन जीने के आधुनिक व नए तरीकों तथा मूल्यों को अपना लेना। समाज तथा व्यक्ति को आधुनिक होने के लिए कई पीढ़ियां लग जाती हैं क्योंकि वह आधुनिक वस्तुओं को तो आसानी से अपना लेता है परन्तु अपने विचारों को आसानी से नहीं बदलता।

प्रश्न 2. आधुनिकीकरण के तीन नकारात्मक प्रभाव बताएं।।
उत्तर-

  • आधुनिकीकरण के कारण संयुक्त परिवार टूट रहे हैं तथा केंद्रीय परिवार सामने आ रहे हैं।
  • ऐश करने की वस्तुएं बढ़ रही हैं जिसका नई पीढ़ी पर गलत प्रभाव पड़ रहा है।
  • इस कारण अनैतिकता बढ़ रही है तथा समाज में अनैतिक कार्य बढ़ रहे हैं।

प्रश्न 3. आधुनिकीकरण के लिए क्या आवश्यक है ?
उत्तर-

  • इसके लिए शिक्षा का स्तर अच्छा होना चाहिए।
  • यातायात तथा संचार के साधनों का अच्छा विकास होना चाहिए।
  • देश में कृषि के स्थान पर उद्योगों का अधिक विकास होना चाहिए।

प्रश्न 4. वैश्वीकरण का क्या अर्थ है ?
उत्तर-वैश्वीकरण एक ऐसी प्रक्रिया है जिससे एक देश की अर्थव्यवस्था का संबंध अन्य देशों की अर्थव्यवस्थाओं के साथ जोड़ा जाता है। इसका अर्थ है कि एक देश का अन्य देशों के साथ वस्तुओं, पूँजी तथा श्रम का बेरोक-टोक आदान-प्रदान होता है। व्यापार का देशों में मुक्त आदान-प्रदान होता है।

प्रश्न 5. उदारीकरण क्या होता है ?
उत्तर-नियंत्रित अर्थव्यवस्था के अनावश्यक प्रतिबंधों को हटाना उदारीकरण है। उद्योगों व व्यापार से अनावश्यक प्रतिबंधों को हटाना ताकि अर्थव्यवस्था अधिक प्रतिस्पर्धी, प्रगतिशील तथा मुक्त बन सके। इसे ही उदारीकरण कहते हैं । यह एक आर्थिक प्रक्रिया है तथा समाज में आर्थिक परिवर्तनों की प्रक्रिया है।

प्रश्न 6. निजीकरण क्या होता है ?
उत्तर-लोकतांत्रिक देशों में मिश्रित प्रकार की अर्थव्यवस्था होती है। इस अर्थव्यवस्था में सार्वजनिक कंपनियां होती हैं जो सरकार के नियंत्रण में होती हैं। इन सार्वजनिक कंपनियों को निजी हाथों में देना ताकि वे अधिक लाभ कमा सकें, निजीकरण होता है।

प्रश्न 7. वैश्वीकरण के कौन-से तीन मुख्य पक्ष हैं ?
उत्तर-

  • सकारात्मक पक्ष जिसमें वैश्वीकरण के बहुत से लाभ होते हैं।
  • निष्पक्षता जिसके अनुसार वैश्वीकरण विकास की एक आवश्यक प्रक्रिया है।
  • नकारात्मक पक्ष जो आर्थिक मुश्किलें व आय में असमानता लाता है।

IV. लघु उत्तरात्मक प्रश्न-

प्रश्न 1. आधुनिकीकरण।
उत्तर-आधुनिकीकरण की प्रक्रिया का अर्थ वह परिवर्तन है जो पश्चिमीकरण के प्रभाव अधीन होता है परन्तु यह सिर्फ मौलिक दिशा में पाया जाता है। इस प्रक्रिया के द्वारा विभिन्न प्रकार की भारतीय संस्थाओं ने नया रूप धारण किया तथा आधुनिक समय में परिवर्तन आधुनिकीकरण की प्रक्रिया के परिणामस्वरूप ही पाया जाता है तथा इस प्रक्रिया के परिणाम हमेशा प्रगतिशील पाए गए हैं।

प्रश्न 2. आधुनिकीकरण की दो विशेषताएं।
उत्तर-

  • सामाजिक भिन्नता-आधुनिकीकरण की प्रक्रिया के कारण समाज के विभिन्न क्षेत्र काफ़ी Complex हो गए तथा व्यक्तिगत प्रगति भी पाई गई। इस वजह से विभेदीकरण की प्रक्रिया भी तेज़ हो गई।
  • सामाजिक गतिशीलता-आधुनिकीकरण के द्वारा प्राचीन सामाजिक, आर्थिक तत्त्वों का रूपान्तरण हो जाता है; मनुष्यों के आदर्शों की नई कीमतें स्थापित हो जाती हैं तथा गतिशीलता बढ़ जाती है।

प्रश्न 3. आधुनिकीकरण द्वारा लाए गए दो परिवर्तन।
उत्तर-

  • धर्म-निरपेक्षता- भारतीय समाज में धर्म-निरपेक्षता का आदर्श स्थापित हुआ। किसी भी धार्मिक समूह का सदस्य देश के ऊंचे से ऊंचे पद को प्राप्त कर सकता है। प्यार, हमदर्दी, सहनशीलता इत्यादि जैसे गुणों का विकास समाज में समानता पैदा करता है। यह सब आधुनिकीकरण की वजह से है।
  • औद्योगीकरण-औद्योगीकरण की तेजी के द्वारा भारत की बढ़ती जनसंख्या की ज़रूरतें पूरी करनी काफ़ी आसान हो गईं। एक तरफ बड़े पैमाने के उद्योग शुरू हुए तथा दूसरी तरफ घरेलू उद्योग तथा संयुक्त परिवारों का खात्मा हुआ।

प्रश्न 4. आधुनिकीकरण तथा सामाजिक गतिशीलता।
उत्तर-सामाजिक गतिशीलता आधुनिक समाजों की मुख्य विशेषता है। शहरी समाज में कार्य की बांट, विशेषीकरण, कार्यों की भिन्नता, उद्योग, व्यापार, यातायात के साधन तथा संचार के साधनों इत्यादि ने सामाजिक गतिशीलता को काफ़ी तेज़ कर दिया। प्रत्येक व्यक्ति अपनी योग्यता, बुद्धि के साथ गरीब से अमीर बन जाता है। जिस कार्य से उसे लाभ प्राप्त होता है वह उस कार्य को करना शुरू कर देता है। कार्य के लिए वह स्थान भी परिवर्तित कर लेता है। इस तरह सामाजिक गतिशीलता की प्रक्रिया के द्वारा परम्परावादी कीमतों की जगह नई कीमतों का विकास हुआ। इस तरह निश्चित रूप में कहा जा सकता है कि आधुनिकीकरण से सामाजिक गतिशीलता बढ़ती है।

प्रश्न 5. आधुनिकीकरण से नए वर्गों की स्थापना होती है।
उत्तर-आधुनिकीकरण की प्रक्रिया व्यक्ति को प्रगति करने के कई मौके प्रदान करती है। इस वजह से कई नए वर्गों की स्थापना होती है। समाज में यदि सिर्फ एक ही वर्ग होगा तो वह वर्गहीन समाज कहलाएगा। इसलिए आधुनिक समाज में कई नए वर्ग अस्तित्व में आए हैं। आधुनिक समाज में सबसे ज्यादा महत्त्व पैसे का होता है। इसलिए लोग जाति के आधार पर नहीं बल्कि राजनीति तथा आर्थिक आधारों पर बंटे हुए होते हैं। वर्गों के आगे आने का कारण यह है कि अलग-अलग व्यक्तियों की योग्यताएं समान नहीं होतीं। मजदूर संघ अपने हितों की प्राप्ति के लिए संघर्ष का रास्ता भी अपना लेते हैं। अलग-अलग कार्यों के लोगों ने तो अलग-अलग अपने संघ बना लिए हैं।

प्रश्न 6. आधुनिकीकरण/ मशीनीकरण।
उत्तर- भारत में मशीनीकरण के द्वारा कृषि से सम्बन्धित कार्यों में काफ़ी परिवर्तन पाया गया। शुरू में हमारा देश काफ़ी लम्बे समय तक खाद, अनाज इत्यादि के लिए दूसरे देशों पर निर्भर रहता था। मशीनीकरण तथा आधुनिकीकरण की वजह से हमारा देश आत्म-निर्भरता की स्थिति में पहुँच चुका है तथा बाकी हिस्सों में भी काफ़ी परिवर्तन पाया गया

प्रश्न 7. आधुनिकीकरण / सामाजिक परिवर्तन।
उत्तर-आधुनिकीकरण ने सामाजिक परिवर्तन की काफ़ी तेज़ गति से हमारे समाज में कई प्रकार के परिवर्तन ला दिए। औरतों की शिक्षा पर तो काफ़ी प्रभाव डाला है। इसके अलावा विधवा विवाह, दहेज प्रथा तथा औरतों की स्थिति इत्यादि में भी काफ़ी परिवर्तन ला दिया। इसके सम्बन्ध में अनेक कानून पास हुए। इस प्रकार सामाजिक बुराइयों को खत्म करने के लिए यह प्रक्रिया काफ़ी प्रभावशाली सिद्ध हुई है।

प्रश्न 8. औद्योगीकरण।
उत्तर–प्रत्येक समाज को अपने लोगों की ज़रूरतें पूर्ण करने के लिए औद्योगीकृत बनना पड़ता है। प्रत्येक क्षेत्र में उद्योगों का विकास होना ही औद्योगीकरण कहलाता है। इसका मुख्य उद्देश्य बड़े पैमाने पर उत्पादन करना है। औद्योगीकरण केन्द्रों में आबादी इस कारण भी अधिक होती है। पूँजीवाद भी औद्योगीकरण के आने से ही आरम्भ हुआ था।

प्रश्न 9. शहरीकरण।
उत्तर-शहरीकरण भी औद्योगीकरण के साथ ही बढ़ा है। शहरीकरण के द्वारा समाज में कई तरह के परिवर्तन पाए गए। जनसंख्या का बढ़ना, सामाजिक गतिशीलता, सामाजिक संस्थाओं के स्वरूपों में परिवर्तन, मनोरंजन के साधनों का बढ़ना इत्यादि भी शहरीकरण के कारण ही पाए गए। गांवों पर भी शहरीकरण का प्रभाव पड़ा तथा गांवों के लोग शहरों में आकर रहने लगे। समाज के प्रत्येक क्षेत्र में परिवर्तन शहरीकरण के परिणामस्वरूप पाया गया।

प्रश्न 10. वैश्वीकरण।
उत्तर-वैश्वीकरण की प्रक्रिया एक व्यापक आर्थिक प्रक्रिया है जो सभी समाजों में फैली होती है। इसमें अलगअलग देशों के बीच मुक्त व्यापार तथा आर्थिक सम्बन्ध होते हैं। सभी देश अपनी ज़रूरतों के लिए एक-दूसरे पर निर्भर होते हैं जिस वजह से अलग-अलग देशों में मुक्त व्यापार पर आधारित आर्थिक सम्बन्धों का विचार हमारे सामने आया। इस विचार को वैश्वीकरण कहते हैं।

प्रश्न 11. वैश्वीकरण की विशेषताएं।
उत्तर-

  • इस प्रक्रिया में पूरी दुनिया में व्यापार चलता है।
  • इससे दुनिया में नई आर्थिकता कायम हुई है।
  • इसमें बाज़ार बढ़ कर पूरी दुनिया में हो गया है।
  • इससे श्रम विभाजन बढ़ा है।
  • इससे विशेषज्ञ एक देश से दूसरे देश में जाने लग गए हैं।

प्रश्न 12. वैश्वीकरण का भारत पर प्रभाव।
उत्तर-

  • भारत के विश्व निर्यात में बढ़ौतरी हुई।
  • भारत में विदेशी निवेश बढ़ा है।
  • भारत का विदेशी मुद्रा भण्डार बढ़ा है।
  • भारत का सफ़ल घरेलू उत्पाद बढ़ा है।
  • तकनीकी तथा शैक्षिक सुधार हुए हैं।
  • औद्योगिक कार्यों का विकास हुआ है।

बड़े उत्तरों वाले प्रश्न-

प्रश्न 1. आधुनिकीकरण के भारतीय समाज पर प्रभावों का वर्णन करें।
उत्तर-आधुनिकीकरण की प्रक्रिया अंग्रेज़ी सरकार के भारत आने के बाद शुरू हुई। अंग्रेज़ों ने वास्तव में अपनी संस्कृति को भारत में लागू करने के लिए कई परिवर्तन किए। एक तरफ उन्होंने भारतीय समाज के अन्दरूनी राज्यों से सम्पर्क स्थापित करने के लिए यातायात के साधनों का विकास किया तथा दूसरी तरफ संचार के साधनों द्वारा दूर-दूर के लोगों से सम्पर्क स्थापित किया। प्रैस को भी सम्पूर्ण स्वतन्त्रता प्राप्त हुई। भारत के दूसरे देशों से भी सम्पर्क स्थापित हो गए। इसके अलावा अंग्रेजों ने परम्परागत विचारों को ख़त्म करके नए विचारों का समाज में संचार करना शुरू कर दिया। इस प्रकार भारतीय समाज में आधुनिकता आनी शुरू हो गई। भारतीय समाज की परम्परागत सामाजिक संस्थाओं; जैसे कि जाति व्यवस्था, परिवार व्यवस्था, विवाह व्यवस्था इत्यादि में परिवर्तन आने शुरू हो गए। इस प्रक्रिया द्वारा समाज में बहुत-से परिवर्तन आए जिनका वर्णन निम्नलिखित है

1. धर्म-निष्पक्षता (Secularization)-धर्म-निष्पक्षता की प्रक्रिया को आधुनिकीकरण की प्रक्रिया के द्वारा लोगों तक पहुंचाया गया। स्वतन्त्रता के पश्चात् भारत में सभी धर्मों के लोगों को बराबर समझा गया। प्रत्येक व्यक्ति समाज के बीच किसी भी स्थिति को प्राप्त कर सकता है। प्रत्येक धर्म के व्यक्तियों को दूसरे व्यक्तियों के साथ प्यार एवं सहनशीलता वाले सम्बन्ध स्थापित करने के बारे में चेतन किया जाने लगा। विभिन्न धर्मों की धार्मिक क्रियाओं, आदर्शों आदि का आदर किया जाने लगा। इस प्रकार लोगों में एकता की भावना पैदा होने लग गई। धर्म-निष्पक्षता का सिद्धान्त प्रत्येक क्षेत्र में लागू किया जाने लगा।

2. पश्चिमीकरण (Westernization)—पश्चिमीकरण से ही सम्बन्धित आधुनिकीकरण की प्रक्रिया है। पश्चिमीकरण का प्रभाव भारतीय समाज के ऊपर अंग्रेज़ी सरकार के आने के उपरान्त ही आरम्भ हुआ और पश्चिमीकरण की प्रक्रिया धीरे-धीरे आधुनिकीकरण में परिवर्तित होने लग पड़ी। श्री निवास के अनुसार, “भारतीय लोगों ने अन्धाधुन्ध या सोचेसमझे बिना पूर्ण पश्चिमी संस्कृति को ही नहीं अपनाया, बल्कि कुछ एक ने इसे ग्रहण किया, कुछ एक ने इसका त्याग कर दिया। पश्चिमी संस्कृति के वह तत्त्व जिन्हें भारतीय लोगों ने ग्रहण किया उनका भी भारतीय रूपान्तर (Transformation) भी हुआ। जहां अंग्रेज़ी संस्कृति और जीवन शैली के कुछ तत्त्वों ने भारतीयों को अपनी तरफ आकर्षित किया वहां अंग्रेज़ी संस्कृति के विभिन्न पक्ष, भारतीय जनसंख्या के विभिन्न भागों को आकर्षित करने लग गए। इस प्रकार भारतीय लोगों का आधुनिकीकरण की प्रक्रिया के साथ परिवर्तित होने का मुख्य कारण पश्चिमीकरण की गतिशीलता के साथ भी सम्बन्धित है।

3. औद्योगीकरण (Industrialization)-औद्योगीकरण आधुनिक समाज की मुख्य विशेषता है। भारत में औद्योगीकरण का पाया जाना पश्चिमी संस्कृति के प्रभाव के कारण है। भारत में कई बड़े उद्योग, विदेशों की सहायता के साथ ही स्थापित किए गए हैं। जैसे कि हम देख रहे हैं कि भारत की जनसंख्या में वृद्धि Geometrically होती है अर्थात् 7×7 = 49 है और उत्पादन में वृद्धि Arithmetically होता है अर्थात् 7+7 = 14। इस तरह जिस प्रकार जनसंख्या की तेजी के साथ वृद्धि हुई है, उसी प्रकार औद्योगिक विकास का होना भी आवश्यक हो गया है। वास्तव में औद्योगीकरण का सम्बन्ध बड़े पैमाने पर उत्पादन करने से होता है। औद्योगीकरण के विकास के साथ ही समाज में पूंजीवाद का विकास सम्भव हुआ। प्रत्येक व्यक्ति की यह इच्छा होती है कि वह इस प्रकार का कार्य करे, कि उसे अधिक-से-अधिक लाभ की प्राप्ति हो। समाज में औद्योगिक क्रान्ति ने नए तकनीकी व्यवसायों को जन्म दिया। औद्योगीकृत समाजों में व्यक्ति को समाज में उसकी जाति के आधार पर नहीं बल्कि उसकी योग्यता पर आधारित कार्य मिलने लगा गया। इस कारण पैतृक व्यवसाय को अपनाने वाली परम्परागत प्रथा का भी खात्मा हुआ। औद्योगिक शहरों में रहने से लोगों के जीवन जीने के ढंगों में बिल्कुल ही परिवर्तन आ गया। गांवों में पाए जाने वाले घरेलू उद्योग तो औद्योगीकरण के विकास से बिल्कुल ही ठप्प हो गए। इस कारण गांवों में प्राचीन समय से चली आ रही संयुक्त परिवार की व्यवस्था तो बिल्कुल ही ख़त्म हो गई। भारत की आर्थिक व्यवस्था भी बदल गई। प्रत्येक क्षेत्र में उद्योगों का विकास होने लग गया। ब्रिटेन, जापान, अमेरिका इत्यादि जैसे कई देशों ने भारत में अपने उद्योग स्थापित किए। इस तरह आधुनिकीकरण की प्रक्रिया के द्वारा हमारे समाज में औद्योगीकरण की प्रगति हुई।

4. शहरीकरण (Urbanization)-औद्योगीकरण के विकास से ही शहरीकरण की प्रक्रिया भी सामने आई। जहां भी उद्योग विकसित हुए, उन स्थानों पर शहरों का विकास होना शुरू हो गया। गांवों के लोग रोज़गार की तलाश में शहरों में आकर रहने लगे। आधुनिकीकरण की प्रक्रिया की शुरुआत ही शहरों के विकास द्वारा हुई। शहरों में घनी आबादी तथा ज्यादा सामाजिक गतिशीलता पाई गई। यातायात तथा संचार के साधनों के विकास से गांवों तथा शहरों में सम्पर्क स्थापित हो गया। इस प्रकार शहरीकरण के द्वारा विभिन्न सामाजिक संस्थाओं का तो नक्शा ही बदल गया। औरतों की स्थिति में बहुत तेजी से परिवर्तन आए। वह प्रत्येक क्षेत्र में पुरुषों की बराबरी करने लग गई। शहरों में संयुक्त परिवार की जगह केन्द्रीय परिवारों को ज़्यादा मान्यता प्राप्त हुई। केन्द्रीय परिवारों में स्त्रियों तथा मर्दो को समान स्थिति प्राप्त हुई। यदि हम आधुनिक समय में शिक्षा के क्षेत्र की तरफ देखें तो स्त्रियां मर्दो से ज़्यादा पढ़ी-लिखी हैं। औरतें प्रत्येक क्षेत्र में तरक्की कर रही हैं। अब वह अपने आपको आदमी के ऊपर निर्भर नहीं समझती बल्कि वह अब स्वयं ही पैसे कमा रही है तथा आत्म-निर्भर हो गई है।

शहरों में लोगों के रहने-सहने का स्तर भी काफ़ी ऊँचा है। लोग ज़्यादा सुविधाएं प्राप्त करने की तरफ आकर्षित रहते हैं। इस कारण उनका दृष्टिकोण भी व्यक्तिवादी हो गया है। देश के सम्बन्ध में बहुत ज्यादा गतिशीलता पाई गई है क्योंकि जाति प्रथा का पेशे से सम्बन्ध ख़त्म ही हो गया है। शहरीकरण के कारण वर्ग व्यवस्था अस्तित्व में आई। व्यक्ति को समाज में स्थिति उसकी योग्यता के अनुसार प्राप्त होने लगी। पैसे की महत्ता दिन-प्रतिदिन बढ़ने लगी।
इस प्रकार शहरों में पैसे, स्थिति तथा शिक्षा का महत्त्व ज़्यादा पाया जाने लगा। शहरों में विज्ञान का प्रभुत्व होने के कारण धर्म का प्रभाव भी बहुत कम हो गया। शहरों में द्वितीयक समूहों का बढ़ता महत्त्व, जनसंख्या का बढ़ना, आधुनिकता, वैज्ञानिक दृष्टिकोण, सुविधाओं इत्यादि को प्राप्त करने के लिए प्रत्येक व्यक्ति प्रयत्न करता है। इस कारण व्यक्तियों के आपसी सम्बन्ध रस्मी तथा अस्थिर होते हैं।
शहरी लोग ज्यादा पढ़े-लिखे होते हैं जिस कारण वह नई परिस्थितियों को समझ कर उनको जल्दी अपना लेते हैं। कुछ समस्याएं भी शहरीकरण से पाई जाती हैं जैसे बेरोज़गारी, गन्दी बस्तियां, ज़्यादा तलाक दर, आत्महत्या इत्यादि। परन्तु कई सामाजिक बुराइयों का खात्मा भी हुआ जैसे कि जाति प्रथा, बाल-विवाह, सती प्रथा इत्यादि।

5. नई श्रेणियों की स्थापना (Establishment of New Classes) आधुनिकीकरण की प्रक्रिया ने व्यक्तियों को प्रगति करने के कई अवसर प्रदान किए। इस कारण कई नए वर्गों की स्थापना हुई। समाज में यदि एक वर्ग होगा तो वह वर्गहीन समाज कहलाएगा। इस कारण आधुनिक समाज के बीच कई वर्ग अस्तित्व में आए। नए वर्गों के अस्तित्व में आने का एक कारण यह भी होता है कि विभिन्न व्यक्तियों की योग्यताएं एक जैसी नहीं होती हैं। इस कारण वह धन, शिक्षा, व्यवसाय आदि के दृष्टिकोण से अलग होते हैं। इस कारण ही नए वर्ग अस्तित्व में आते हैं।
आधुनिक समाज में सबसे ज्यादा महत्त्व पैसे का होता है। इस कारण लोग जाति के आधार पर नहीं बल्कि राजनीति तथा आर्थिक आधार पर विभिन्न वर्गों में बंटे हुए हैं। औद्योगिक क्षेत्र में पूंजीपतियों का मुकाबला करने के लिए मज़दूर संघ स्थापित हो गए हैं। यह मजदूर संघ अपने अधिकारों की प्राप्ति के लिए संघर्ष का रास्ता भी अपना लेते हैं। आधुनिक समय में तो अपने-अपने हितों की रक्षा के लिए अलग-अलग पेशों से सम्बन्धित लोगों ने संघ बना लिए हैं।

6. कृषि के क्षेत्र में विकास (Development in Agricultural Area)-भारत के गांवों की अधिकतर जनसंख्या कृषि के व्यवसाय को अपनाती है। कृषि करने के लिए प्राचीन भारतीय समाज में तो शारीरिक मेहनत का ही प्रयोग होता है, परन्तु आधुनिक काल में तो कृषि करने के लिए नई-नई मशीनों एवं तकनीकों का आविष्कार हो गया है। बड़े-बड़े खेतों में ट्रैक्टरों के साथ खेतीबाड़ी की जाने लग पड़ी है। नई-नई रासायनिक खादों का प्रयोग होने लग पड़ा है जिस कारण उत्पादन में भी वृद्धि हुई है। फसल को काटने हेतु कम्बाइनों का प्रयोग किया जाने लग पड़ा है। इन सब कारणों के कारण कृषि में कम परिश्रम के होने पर भी उत्पादन में वृद्धि हो गई है। इस कारण ही कई लोग बेरोज़गार हो गए और कारखानों में जाकर कार्य करने लग पड़े। __ कृषि के क्षेत्र में आधुनिकीकरण के साथ-साथ मशीनीकरण भी हुआ है। सर्वप्रथम भारत उर्वरक के क्षेत्र में दूसरे देशों पर निर्भर करता था। परन्तु हरित क्रान्ति (Green Revolution) के साथ-साथ वह आत्मनिर्भर हो गया। इससे ग्रामीण लोगों की आर्थिक स्थिति एवं जीवन शैली में भी काफ़ी परिवर्तन हुआ है।

7. कल्याणकारी राज्यों की स्थापना (Establishment of Welfare States)—स्वतन्त्रता के बाद भारतीय संविधान के अनुसार हमारे देश में कल्याणकारी राज्यों की धारणाओं को अपनाया गया जिस कारण राज्यों के कार्य काफ़ी बढ़ गए। इस कारण ही सामाजिक परिवर्तन की प्रक्रिया दिनों-दिन तेज़ होती जा रही है। भारत की केन्द्रीय सरकार एवं राज्य सरकार इस बात की कोशिश कर रही है कि व्यापारियों की, उपभोक्ताओं की, पूंजीपतियों की, उद्यमियों की, बड़े एवं कुटीर उद्योगों सभी की साझे तौर पर रक्षा की जाए। देश के धन का समान विभाजन किया जाए एवं यह सुरक्षित किया जाए कि उत्पादन केवल सीमित हाथों में न रह जाए। इसके लिए आधुनिकीकरण की प्रक्रिया ही ज़िम्मेदार है।

8. लोकतंत्रीकरण (Democratization)-राजनीति में लोकतंत्रीकरण की प्रक्रिया आधुनिकीकरण के कारण ही आई। भारत को संसार का सबसे बड़ा लोकतंत्रीकरण देश कहा गया है, क्योंकि भारत में उन सभी को वोट देने का अधिकार है, जिनकी आयु 18 वर्ष से अधिक है। कानून के दृष्टिकोण से सभी एक समान हैं। प्रत्येक व्यक्ति को कुछ मौलिक अधिकार प्राप्त हैं, जिनको कोई नहीं छीन सकता। देश में आर्थिक असमानताएं दूर की जा रही हैं। संविधान के बीच राज्यों की नीतियों के कुछ निर्देशित सिद्धान्त दिए गए हैं, ताकि राज्य इन सिद्धान्तों के अनुसार ही नियम बनाए। लोगों को इस बात का अधिकार है कि यदि उन्हें सरकार का कार्य पसन्द नहीं है तो वह सरकार को बदल सकते हैं। इस प्रकार भारत में लोकतान्त्रिक प्रणाली काफ़ी मज़बूत है और यह सब कुछ आधुनिकीकरण की ही देन है।

9. कई अन्य परिवर्तन (Many Other Changes)-आधुनिकीकरण की प्रक्रिया के द्वारा सरकार ने भी अपनी नीतियों में परिवर्तन किया है। समाज की प्रगति हेतु पूर्व निश्चित योजनाएं बना ली जाती हैं। इन योजनाओं के अधीन ऐसे योजनाबद्ध परिवर्तन किए जाते हैं, जिसके द्वारा परिवर्तन की प्रक्रिया को स्वाभाविक रूप से क्रियात्मक रहने की स्वतन्त्रता नहीं दी जाती है बल्कि उसके स्थान पर प्राप्त साधनों एवं परिस्थितियों को ध्यान में रखकर वर्तमान व्यवस्था में परिवर्तन लाने की योजना बनाई जाती है।

प्रश्न 2. वैश्वीकरण के परिणामों का वर्णन करें।
अथवा समाज पर वैश्वीकरण के प्रभावों की चर्चा कीजिए।
उत्तर-वैश्वीकरण के परिणाम (Consequences of Globalisation)-भारत में 1991 में आर्थिक सुधार आरम्भ हुए और भारतीय अर्थव्यवस्था के भूमण्डलीकरण की प्रक्रिया तेज़ हो गई। वैश्वीकरण के भारतीय अर्थव्यवस्था पर भिन्न-भिन्न भागों के ऊपर प्रभाव एवं परिणाम निम्नलिखित हैं

1. भारत के विश्व निर्यात के हिस्से में वृद्धि (Increase of Indian Share in World Export)वैश्वीकरण की प्रक्रिया के कारण भारत के विश्व निर्यात में वृद्धि हुई। 20वीं शताब्दी के अन्तिम दशक में भारत की वस्तुओं और सेवाओं में 125% वृद्धि हुई। 1990 में भारत का विश्व की वस्तुओं एवं सेवाओं के निर्यात में हिस्सा 0.55% था जोकि 1999 में बढ़कर 0.75% हो गया था।

2. भारत में विदेशी निवेश (Foreign Investment in India) विदेशी निवेश में वृद्धि भी वैश्वीकरण का एक लाभ है क्योंकि विदेशी निवेश के साथ अर्थव्यवस्था के साथ उत्पादन की क्षमता बढ़ती है। 1995-96 से 2016 में इससे काफ़ी अधिक बढोत्तरी हुई। इस समय के दौरान वार्षिक औसत के साथ लगभग 1140 मिलियन डालर का विदेशी लाभ हुआ।

3. विदेशी मुद्रा भण्डार (Foreign Exchange Kesernes) आयात के लिए विदेशी मुद्रा आवश्यक है। जून, 1991 में विदेशी मुद्रा भण्डार 1 Billion डॉलर था जिसके साथ केवल 2 सप्ताह की आयात आवश्यकताएं पूरी की जा सकती थीं। इसके पश्चात् भारत में नई आर्थिक नीतियों को अपनाया गया। वैश्वीकरण एवं उदारीकरण की नीतियों को बढ़ावा दिया गया, जिस कारण देश के विदेशी मुद्रा भण्डार लगभग 390 Billion Dollars के आसपास हैं।

4., सकल घरेलू उत्पाद में वृद्धि दर (Growth of Gross Domestic Product)—वैश्वीकरण के कारण देश के सकल घरेलू उत्पादन में वृद्धि हुई। 1980 में 5.63% जो 2005 के बाद 8-9% हो गई। आजकल यह 7% के करीब है।

5. बेरोज़गारी में वृद्धि (Increase in Unemployment)-भूमण्डलीकरण के साथ बेरोज़गारी में वृद्धि होती है। 20वीं शताब्दी के अन्तिम दशक में मैक्सिको, दक्षिण कोरिया, थाईलैण्ड, सिंगापुर, इण्डोनेशिया, मलेशिया के बीच
वैश्वीकरण के कारण आर्थिक संकट आया है। इस कारण लगभग 1 करोड़ लोग बेरोज़गार हो गए और वह ग़रीबी की रेखा के नीचे आ गए। 1990 के दशक के आरम्भ में बेरोजगारी की दर 6% थी जोकि 2000 तक 7% हो गई।

6. कृषि के ऊपर प्रभाव (Impact on Agriculture) देश के सकल घरेलू उत्पाद में खेती एवं इससे सम्बन्धित कार्यों का हिस्सा 20% है जबकि अमेरिका में 2% है फ्रांस एवं जापान के बीच 5% है। यदि श्रम शक्ति को देखो तो भारत की 69% श्रम शक्ति को खेती के विकास से सम्बन्धित कार्यों से रोज़गार प्राप्त है जबकि अमेरिका एवं इंग्लैण्ड में ऐसे कार्यों में 2.6% श्रम शक्ति है। विश्वव्यापार के नियमों के अनुसार दुनिया को इस संगठन के सभी सदस्य देश को खेती क्षेत्र के निवेश के लिए दुनिया के प्रत्येक देश के लिए योजना है। इस प्रकार आने वाला समय भारत की खेती एवं अर्थव्यवस्था के लिए चुनौतीपूर्ण रहने की सम्भावना है।

7. तकनीकी एवं शिक्षात्मक सुधार (Educational & Technical Development)-वैश्वीकरण एवं उदारीकरण का शिक्षा के ऊपर भी काफ़ी प्रभाव पड़ा। लेकिन तकनीकी क्षेत्र में तो काफ़ी चमत्कार भी हुआ। संचार एवं यातायात के साधनों के कारण दुनिया की दूरी काफ़ी कम हो गई है। Internet and Computers ने तो इस क्षेत्र में क्रान्तिकारी विकास कार्य किए हैं।

आधुनिकीकरण व वैश्वीकरण Notes

  • साधारण शब्दों में आधुनिकीकरण का अर्थ है जीवन जीने के आधुनिक तथा नए तरीकों व नए मूल्यों को अपना लेना। पहले इसका अर्थ काफ़ी तंग घेरे में लिया जाता था, परन्तु अब इसमें कृषि आर्थिकता व औद्योगिक आर्थिकता में परिवर्तन को भी शामिल किया जाता है।
  • सबसे पहले आधुनिकीकरण शब्द का प्रयोग Daniel Lerner ने मध्य-पूर्वीय समाजों का अध्ययन करते हुए किया। उनके अनुसार आधुनिकीकरण परिवर्तन की एक ऐसी प्रक्रिया है जो गैर पश्चिमी देशों में पश्चिमी देशों के साथ प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष संबधों के कारण आती है।
  • आधुनिकीकरण की कई विशेषताएं हैं जैसे कि यह एक क्रान्तिकारी तथा जटिल प्रक्रिया है, यह काफ़ी लंबा समय चलने वाली प्रक्रिया है, इसे वापस नहीं किया जा सकता, इससे समाज में प्रगति आती है, इत्यादि।
  • आधुनिकीकरण के आने के कई कारण हैं जैसे कि नगरों का बढ़ना, बड़े-बड़े उद्योगों का सामने आना, शिक्षा के स्तर का बढ़ना, संचार के साधनों का विकास, किसी करिश्माई नेता द्वारा समाज में परिवर्तन लाना इत्यादि।
  • आधुनिकीकरण की प्रक्रिया का हमारे समाज के प्रत्येक हिस्से पर प्रभाव पड़ा जैसे कि जाति प्रथा के बंधन ___ कमज़ोर पड़ गए, परिवारों का स्वरूप बदल गया, पश्चिमी शिक्षा का प्रभाव बढ़ गया, नई कानून व्यवस्था सामने आई, समाज में बहुत से सुधार हुए इत्यादि।
  • आज के संसार को एक वैश्विक ग्राम के नाम से जाना जाता है क्योंकि वैश्वीकरण की प्रक्रिया ने सभी देशों को एक-दूसरे के नज़दीक ला दिया है। आजकल हमें घर बैठे ही पता चल जाता है कि सम्पूर्ण विश्व में क्या हो रहा है ?
  • वैश्वीकरण का साधारण शब्दों में अर्थ है अलग-अलग देशों के बीच वस्तुओं, सेवाओं, विचारों, सूचना, लोगों तथा पूँजी का बेरोक-टोक प्रवाह। इससे उन देशों की आर्थिक, सामाजिक तथा सांस्कृतिक सीमाओं के बंधन टूट जाते हैं। यह सब कुछ संचार के विकसित साधनों के कारण मुमकिन हुआ है।
  • वैश्वीकरण की कई विशेषताएं होती हैं जैसे कि स्थानीय कार्यों का वैश्विक स्तर पर आना, प्रत्येक कार्य में तेजी का होना, सम्पूर्ण संसार में एक स्तर पर वस्तुओं की मौजूदगी, देशों के अन्तर्सम्बन्धों का बढ़ना, आदान-प्रदान का बढ़ना इत्यादि।
  • वैश्वीकरण के लिए दो प्रक्रियाओं का होना काफ़ी आवश्यक है वह है उदारीकरण व निजीकरण। उदारीकरण का अर्थ है बाज़ार के नियमों के अनुसार अपनी आर्थिकता को चलाना तथा निजीकरण का अर्थ है सरकारी कंपनियों को निजी क्षेत्र को बेच देना।
  • वैश्वीकरण के कई कारण होते हैं; जैसे कि यातायात तथा संचार में साधनों का विकास, सरकारों की तरफ से आर्थिक सीमाओं को खोल देना, बड़ी-बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियों का सामने आना इत्यादि।
  • वैश्वीकरण का हमारे देश पर काफ़ी प्रभाव पड़ा जैसे कि व्यापारिक उदारीकरण का सामने आना, विदेशी पूँजी का निवेश, विदेशों से पैसे का देश में आना, तकनीक का आदान-प्रदान, आर्थिक मार्किट का सामने आना, वस्तुओं का अलग-अलग देशों में बनना इत्यादि।
  • बाहरी स्रोत (Outsourcing)—किसी अन्य कम्पनी को कार्य करने के लिए देने को बाहरी स्रोत कहते हैं।
  • विनिवेश (Disinvestment)-सरकारी अथवा जनतक क्षेत्र की कंपनियों का निजीकरण विनिवेश कहलाता है।
  • करिश्माई नेता (Charismatic Leader)—वह नेता जिसके व्यक्तित्व में कई करिश्माई गुण होते हैं तथा जो अपने व्यक्तित्व से लोगों को प्रभावित करता है।
  • धर्मनिष्पक्षता (Secularization)—वह विश्वास जिसमें राज्य, नैतिकता, शिक्षा इत्यादि धर्म के प्रभाव से काफ़ी दूर होते हैं।
  • उदारीकरण (Liberalisation)-बाज़ार पर सरकारी नियन्त्रण को कम कर देना तथा आर्थिक सीमाओं को खोल देना।