Class 7 Social Notes Chapter 17 लैंगिक भिन्नता

हमारे देश में लड़के और लड़कियों के लालन-पालन में कभी समानता तो कभी असमानता पाई जाती है। पिछले दो दशकों में इस संदर्भ में जागृति फैली है। सरकार भी विभिन्न योजनाओं एवं आयोजनों के माध्यम से लड़के और लड़कियों में कोई भेदभाव न हो, ऐसा प्रयत्न कर रही है। हमारा देश अनेक भिन्नताओंवाला देश है। आधुनिक समय के अनुसार लड़के-लड़कियों को शिक्षा का समान अधिकार दिया गया है। रूढ़िगत मान्यता के अनुसार आज भी कुछ क्षेत्रों में कन्याओं को शिक्षा का अधिकार प्राप्त करने में कई असुविधाएँ होती हैं। समाज में प्रवर्तित भेदभाव का प्रभाव लम्बे समय तक समाज व्यवस्था पर पड़ता है। समाज में कई कुरिवाज प्रचलित होते हैं। आज भी कई स्थानों पर पाए जानेवाले बालविवाह का एक कारण यह भेदभाव है। बालविवाह के कारण अधिकांश महिलाएँ आगे शिक्षा प्राप्त नहीं कर सकतीं, जिसके कारण उनका विकास रुक जाता है। जिसका एक प्रभाव स्त्रियों के स्वास्थ्य पर भी होता है। यदि लैंगिक भेदभाव दूर हो तो ऐसी अनेक समस्याओं का समाधान हो सकता है।

हमारे आस-पास स्त्री-पुरुष के बीच कुछ भिन्नता स्वीकार की गई है। स्त्री-पुरुषों में समान काम के लिए पुरुषों को अधिक वेतन दिया जाता है। ऐसा भेदभाव अपराध बनता है। आधुनिक समय में महिलाएँ सभी क्षेत्रों में जुड़ी हैं। चिकित्सा, इन्जीनियरिंग, वकालत, विमान चालक जैसी प्रत्येक बात में महिलाएँ समान रूप से काम करती हैं।

लैंगिक भिन्नता का विशेष असर अधिकांश ग्राम्य क्षेत्रों में पाया जाता है। कई बार लड़कियों को उच्च शिक्षण दिलाते समय अभिभावकों में हिचकिचाहट पाई जाती है। सरकार द्वारा सहायता एवं लोगों में आई जागृति के कारण लड़कियों के लिए उच्च शिक्षण सरल और सहज बना है।

भारतीय मान्यता के अनुसार लड़के-लड़कियों का लालन-पालन

सन् 2001 की जनगणना में 0 से 6 वर्ष तक के बालकों में लड़के-लड़कियों की संख्या में बड़ा अंतर पाया जाता है। कुछ समय पहले लड़की को जन्म से पहले ही मार देने के कारण लड़के-लड़कियों की संख्या में अधिक असमानता पाई गई, इसके लिए सरकार द्वारा भ्रूण हत्या विरोधी कानून बनाया गया। गर्भ में लड़के या लड़की का परीक्षण करना भी अपराध है। भारतीय मान्यता के अनुसार अपने वंश को आगे बढ़ाने के लिए संतान में पुत्र को ही महत्त्व दिया गया था। पिछले दशक में सामाजिक रूप से महिलाओं की भागीदारी ने इस मान्यता को खूब ही प्रभावित किया है।

अपने विद्यालय में विविध आयोजनों के समय आप जुड़े होंगे। विद्यालय कार्यक्रमों में लड़कों और लड़कियों द्वारा की गई प्रवृत्तियों को लिखिए।

Class 7 Social Notes Chapter 17 लैंगिक भिन्नता 1

रूढ़िगत मान्यता

लैंगिक भिन्नता के संदर्भ में हमारे देश में अनेक मान्यताएँ प्रवर्तित हैं। लड़कों और लड़कियों के लालन-पालन में इस संदर्भ में कई अंतर पाया जाता है। कुछ क्षेत्रों में प्राथमिक शिक्षण भी कभी पूरा नहीं करवाया जाता था। पिछले दो दशकों में प्राथमिक शिक्षण पूरा हो ऐसे खास प्रयत्न सरकार द्वारा किए गए हैं। सरकार के विशेष प्रयत्नों से आज हमारी सेना और पुलिस में लड़कियों की संख्या बढ़ रही है। लड़कियों को बाहर पढ़ने के लिए या नौकरी करने के लिए शहर भेजने के बदले लोग अपने क्षेत्र में ही नौकरी करवाना पसंद करते हैं। पिछले कुछ दशकों से महिलाएँ विविध कार्यों के साथ जुड़ी हैं। अंतरिक्ष क्षेत्र में भी महिलाएं जुड़ रही हैं। कन्याओं की सुरक्षा और संरक्षण के लिए सरकार सतत प्रयत्न कर रही है। रूढ़िगत मान्यताओं के आधार पर कह सकते हैं कि आज भी कुछ समाजों में कन्याओं के पढ़ने के संदर्भ में अनेक समस्याएँ पाई जाती हैं। उच्च पाठ्यक्रमों में कन्याओं को पढ़ाने के प्रति अभिभावकों में उदासीनता पाई जाती है। इसलिए अब राज्य सरकार द्वारा उच्च-शिक्षण के लिए विशेष सहायता दी जाती है।

गृहकार्य में असमानता

हमने देखा कि छोटी-छोटी बातों में लड़के-लड़की के साथ भेदभाव पाया जाता है। आगे जाकर यह भेदभाव समस्या बन जाता है। घर के छोटे-बड़े काम के लिए साइकल या अन्य वाहन चलाने और सीखने में ऐसा भेदभाव अधिक पाया जाता है। घर, विद्यालय या सार्वजनिक स्थलों में हम ऐसा भेदभाव देख सकते हैं। ऐसी कुछ बातों के संदर्भ में चर्चा करेंगे।

Class 7 Social Notes Chapter 17 लैंगिक भिन्नता 2

महिला सशक्तीकरण

एक मकान को घर बनाने का काम महिला द्वारा ही संभव है। घर के साथ बालक और अन्य जिम्मेदारियाँ निभाने में महिलाएँ अग्रसर होती हैं। आधुनिक समय में अपनी विशिष्ट पहचान बनाने में महिलाएँ सफल हुई हैं। आधुनिक समय में महिलाएँ विविध क्षेत्रों में अनोखी पहचान के साथ आगे बढ़ती पाई जाती हैं। खेल-जगत, फिल्म, मनोरंजन, राजनीति, अंतरिक्ष के उपरांत विज्ञान और संशोधन के क्षेत्र में भी महिलाएँ विशेष जुड़ रही हैं। संरक्षण जैसे खतरनाक कार्यों में भी आज महिलाएँ आगे बढ़ रही हैं। हमारे देश में अनेक महिलाओं ने विशेष सिद्धि हासिल की है।

महिलाओं को सशक्त करने के लिए पिछले दो दशकों में सरकार द्वारा अनेक कार्यक्रम और योजनाएँ बनाई गई हैं। पशुपालन, उद्योग और अन्य साहस के लिए सहायता दी जाती है। सरकार द्वारा ‘स्टार्टअप इण्डिया’ और ‘मेक इन इण्डिया’ के अन्तर्गत अनेक योजनाएँ महिला सशक्तीकरण के लिए चलाई जा रही हैं। महिलाओं को उद्योग शुरू करने के लिए आर्थिक सहायता दी जाती है। नारी सशक्तीकरण के लिए अनेक संस्थाएँ भी कार्य कर रही हैं। सरकार की योजनाएँ, सार्वजनिक संस्थाएँ और अन्य द्वारा ऐसी महिलाओं को सहायता करके आत्मनिर्भर बनने में मदद की जाती है। नारी सशक्तीकरण के लिए योजनाओं के उपरांत शिक्षण में भी कन्याओं के लिए विशेष व्यवस्था और योजनाएँ लागू हैं। हमारे देश के विविध क्षेत्रों की महिलाओं के बारे में जानें।

विशेष क्षेत्रों में महिलाएँ

Class 7 Social Notes Chapter 17 लैंगिक भिन्नता 3

लिंगानुपात

समग्र देश में जनगणना करने के लिए लाखों लोग जुड़े होते हैं। जिस वर्ष में इकाई का अंक एक हो उन वर्षों में जनगणना की जाती है। पिछली जनगणना वर्ष 2011 में हुई थी। प्रथम जनगणना 1871 में हुई थी। केन्द्र सरकार द्वारा प्रति 10 वर्ष में जनगणना करवाई जाती है। अब आगे की जनगणना कब होगी?

शहरी और ग्रामीण लिंगानुपात में बड़ा अंतर पाया जाता है। यहाँ हम गुजरात के लिंगानुपात की स्थिति को देखेंगे। यह प्रति हजार पुरुषों पर स्त्रियों की संख्या दर्शाता है। इस सारणी के आधार पर नीचे दिए गए प्रश्नों की चर्चा कीजिए :

Class 7 Social Notes Chapter 17 लैंगिक भिन्नता 4

चर्चा कीजिए

  • इस अंतर के कारण कौन-सी समस्या उत्पन्न होती है?
  • इस समस्या का समाधान किस तरह हो सकता है?
  • शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में अंतर क्यों अधिक है?
  • जनसंख्या वृद्धि के साथ लिंगानुपात क्यों महत्त्वपूर्ण है ?

हमारे आस-पास स्त्रियों और पुरुषों का परस्पर समान अनुपात लगता है। देश में स्त्रियों का अनुपात लगभग आधा माना जाता है। अभी तक की जनगणना के अनुसार कह सकते हैं कि, भारत में स्त्रियों और पुरुषों के लिंगानुपात में असमानता दिखाई देती है। नीचे विविध वर्षों में स्त्रियों का अनुपात निम्नानुसार दर्ज किया गया है :

Class 7 Social Notes Chapter 17 लैंगिक भिन्नता 5

सोचकर कहिए

  • किस वर्ष में स्त्रियों का अनुपात सर्वाधिक है?
  • किस वर्ष में स्त्रियों का अनुपात सबसे कम है?
  • स्त्रियों का अनुपात घटता जाए तो क्या समस्याएँ उत्पन्न होंगी?
  • स्त्री-पुरुषों की संख्या की असमानता को दूर करने के लिए सरकार क्या कदम उठाती है?

महिला आंदोलनों का अध्ययन

हमारा देश आजाद हुआ उससे पहले देश पर राज करनेवाले अंग्रेजों के सामने अनेक आंदोलन हुए थे। गाँधी बापू के नेतृत्व में विविध आंदोलन हुए थे। गुजरात सहित देशभर में कस्तूरबा के साथ अनेक महिलाएँ इन आंदोलनों के साथ जुड़ी थीं। बिहार में महिलाओं ने मद्य-निषेध के लिए सरकार के सामने सफल आंदोलन किया था। विशेषकर शहरों में कभी-कभी गरमी में पानी के लिए महिलाएँ आंदोलन करती हैं। ऐसे दूसरे अनेक आंदोलन महत्त्वपूर्ण रूप से महिलाओं के लिए हुए हैं। इन आंदोलनों में महिलाएँ जुड़ती हैं और अपनी समस्याओं के लिए आंदोलन करती हैं।

किसी महिला आंदोलन के विषय में सोचें और लिखें

  • उस महिला आंदोलन के विषय में आप क्या-क्या जानते हैं ?
  • वह आंदोलन क्यों किया गया था?
  • उस आंदोलन से क्या प्रभाव पड़ा?