Class 7 Social Notes Chapter 18 संचार-माध्यम और विज्ञापन

हम जानते हैं कि मनुष्य एक विचारशील सामाजिक प्राणी है। इसे सबसे महत्त्वपूर्ण भेट ‘बुद्धि’ प्राप्त है। मनुष्य जब भय, सुख, दुःख आदि भाव अनुभव करता है, तब उसे व्यक्त करने का प्रयत्न करता है। वह अपना सुख दूसरों को बाँटकर सुख में वृद्धि करता है, जबकि दुःख को बाँटकर दुःख को हलका करता है।

एक स्थान से दूसरे स्थान पर सूचना अथवा संदेश भेजने अथवा प्राप्त करने की प्रक्रिया (व्यवस्था) को संचार माध्यम अथवा संचारतंत्र कहते हैं। पहले के समय में ढोल बजाकर, पक्षियों द्वारा आग या धुएँ के संकेत द्वारा, झंडा लहराकर, भारी आवाज में चिल्लाकर, चित्र अथवा संकेतों द्वारा संदेश दिया जाता था। इस प्रकार भाषा के साथ चित्रलिपि का विकास शुरू हुआ होगा और इस तरह संदेश पहुँचाया जाता होगा। कई बार पक्षियों और प्राणियों द्वारा भी संदेश भेजा जाता था। शुरुआत में परिवहन के साधन ही संचार के साधन होते थे। समय बीतते प्रिन्टिंग प्रेस, पोस्ट ऑफिस, टेलीफोन, मोबाइल फोन, फैक्स, उपग्रह, इन्टरनेट ने संचार व्यवस्था को खूब ही तीव्र और सरल बनाया है।

विज्ञान और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में विकास करने में संचार ने महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है। संचार के माध्यमों के कारण समय की दृष्टि से दुनिया छोटी हो गई है। आधुनिक संचारतंत्र ने पूरे विश्व को एक वैश्विक ग्राम में बदल दिया है। वर्तमान में आर्थिक विकास आधुनिक संचारतंत्र पर आधारित है। हम पृथ्वी के धरातल पर या अवकाश में हो रही घटनाओं का जीवंत प्रसारण करने में सक्षम बने हैं। देश के आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक तथा सांस्कृतिक विकास के साथ-साथ संचारतंत्र राष्ट्रीय एकता और अखण्डता बनाए रखने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है। भारत जैसे विशाल देश में बाढ़, अकाल, भूकंप, चक्रवात, त्सुनामी आदि प्राकृतिक आपदाएँ और मानव निर्मित आपदा-व्यवस्थापन विकसित संचारतंत्र के बिना संभव नहीं है।

डाक पद्धति

पहले के समय में सांकेतिक या मौखिक संदेश देने का स्थान लिखित संदेशों ने ले लिया है। जिसमें से डाकप्रथा का जन्म हुआ। भारत में आधुनिक डाक-व्यवस्था की शुरुआत 1854 ई. में हुई थी। लोग दूर-दूर रहते अपने रिश्तेदारों, मित्रों या सरकारी कार्यालयों को पत्र भेजने लगे। व्यापारी भी पत्र द्वारा व्यापार करने लगे थे। उसकी सहायता से दुनिया के किसी भी कोने में पत्र, ग्रीटिंग कार्ड भेजने की सुविधा है।

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अपने देश में हम बहुत ही सस्ते दर पर पत्र, आंतरदेशीय पत्र, लिफाफा भेज सकते हैं और बहुत ही कम समय में हम उसका जवाब भी प्राप्त कर सकते हैं। कुछ महत्त्वपूर्ण पत्र रजिस्टर एडी द्वारा, पैसे मनीऑर्डर द्वारा और वस्तुएँ पार्सल द्वारा भेज सकते हैं।

टेलीग्राम (तार)

टेलीग्राम की खोज 1850 ई. में हुई थी। भारत में सर्वप्रथम टेलीग्राम सेवा कोलकाता और डायमण्ड हार्बर के बीच शुरू हुई थी। टेलीग्राम द्वारा छोटे-छोटे संदेश एक स्थान से दूसरे स्थान पर तीव्रता से पहुँचते हैं। इसके बाद एक्सप्रेस तार की सुविधा आई, जिसका खर्च अधिक होता था। यह संदेश तुरंत ही व्यक्ति को मिलता था। यह सुविधा भारत में 13 जुलाई, 2003 से बंद कर दी गई है।

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पुस्तक

पुस्तकें ज्ञान का भण्डार हैं। पुस्तकें एक पीढ़ी का ज्ञान, उसके विचार, उसकी सिद्धियाँ आदि दूसरी पीढ़ी तक पहुँचाने में सफल रही हैं। पुस्तकें ज्ञान और सूचना का प्रचार-प्रसार करती हैं। वर्तमान समय में ई-बुक का प्रचलन बढ़ा है।

समाचारपत्र

समाचारपत्र दुनिया के किसी भी कोने में घटती घटनाएँ, विज्ञापन, दु:खद संदेश, आज का राशिफल, पंचांग, विशेष दिन, तिथि, चौघड़िया आदि बातें हम तक पहुँचाते हैं। हमारे यहाँ विविध भाषाओं में अनेक दैनिक समाचारपत्र और पत्रिकाएँ प्रकाशित होती हैं।

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रेडियो

रेडियो श्राव्य प्रकार का संचार का माध्यम है। रेडियो पर संगीत, लोकगीत, फिल्मी गीत, परिसंवाद, खेद-कूद के समाचार, नाटक, जलवायु/मौसम के समाचार, खोए हुए व्यक्ति के विज्ञापन, भजन, वार्ता जैसे कार्यक्रम सुनने को मिलते हैं। इसके उपरांत बरसात, बाढ़, चक्रवात जैसे संकट के समय की आपदाओं की जानकारी दी जाती है। रेडियो की सुविधा मोबाइल पर भी उपलब्ध है।

इतना जानिए

  • रेडियो की खोज ई.स. 1895 में इटली के मार्कोनी ने की थी।
  • आकाशवाणी का सर्वप्रथम केन्द्र इंग्लैण्ड में स्थापित हुआ था।
  • भारत में मुम्बई और कोलकाता में निजी कंपनी ने ट्रान्समीटर द्वारा सूचना प्रसारण का कार्य शुरू किया था।
  • ई.स. 1930 में मुम्बई और कोलकाता में सरकार ने ट्रान्समीटर अपने हाथ में लेकर उसका नाम ‘इण्डियन ब्रोड कॉस्टिंग सर्विस’ रखा।
  • ई.स. 1957 में इसका नाम आकाशवाणी रखा गया था।
  • प्रसारभारती भारत का सार्वजनिक प्रसारणकर्ता स्वायत्त कॉर्पोरेशन है। जिसकी स्थापना ता. 23-11-1997 को की गई थी। आज ऑल इन्डिया रेडियो और दूरदर्शन नेटवर्क की सेवा प्रसारभारती द्वारा उपलब्ध करवाई जाती है। वर्तमान में FM रेडियो का प्रसारण भी हो रहा है।

सिनेमा (चलचित्र)

सिनेमा भी शिक्षण और मनोरंजन का एक लोकप्रिय साधन है। फिल्म द्वारा सामाजिक, साँस्कृतिक विषयों पर भी शिक्षण दिया जाता है। फिल्म द्वारा भी लोगों के रहन-सहन, विचारधारा में परिवर्तन आया है। कई रीति-रिवाज, मान्यताओं, अंधश्रद्धाओं और वहमों के विरुद्ध संघर्ष करने के लिए फिल्मों द्वारा सीखने को मिलता है। सबसे अधिक फिल्में भारत में बनती हैं।

टेलीविजन

टेलीविजन वर्तमान में भारत का सबसे लोकप्रिय दृश्य-श्राव्य माध्यम है। आपके घर पर रखी गई टी.वी. समग्र दुनिया के समाचार, फिल्में, सीरियल, शैक्षणिक कार्यक्रम हमारे समक्ष प्रस्तुत करती है। तरोताजा समाचार और खेलों का जीवंत प्रसारण किया जाता है।

इतना जानिए

  • टी.वी. की खोज ज्होन लोगी बायर्ड द्वारा की गई थी।
  • भारत में सर्वप्रथम टेलीविजन प्रसारण केन्द्र का प्रारंभ 15 सितम्बर, 1959 को दिल्ली में पायलोट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू हुआ था।
  • भारत में दूसरे टेलीविजन प्रसारण केन्द्र की शुरुआत ई.स. 1972 में मुम्बई में हुई थी।
  • ई.स. 1976 में दूरदर्शन का विभाग ‘ऑल इण्डिया रेडियो’ से अलग किया गया था।
  • दिनांक 15 मार्च, 1976 में अहमदाबाद में इसरो के माध्यम से प्रसारण केन्द्र शुरू हुआ और दि. 02-10-1987 के दिन अहमदाबाद में डी.डी. गिरनार चैनल शुरू हुआ।
  • दिनांक 26-01-2000 में ‘डीडी ज्ञानदर्शन’ नामक शैक्षणिक चैनल शुरू किया गया।
  • प्राथमिक, माध्यमिक, उच्चतर शिक्षण, स्वास्थ्य, कृषि आदि महत्त्वपूर्ण कार्यक्रम का प्रसारण ‘वंदे गुजरात’ चैनल द्वारा राज्य सरकार प्रस्तुत करती है।

मोबाइल फोन

संचार माध्यम का वर्तमान में महत्त्वपूर्ण साधन मोबाइल फोन है। मोबाइल फोन के द्वारा एक व्यक्ति किसी भी स्थान से दूसरे व्यक्ति को नंबर लगाकर बात कर सकता है। मोबाइल फोन में घड़ी, वीडियो-ऑडियो प्लेयर, टार्च, कलेन्डर, केल्क्युलेटर, रेडियो आदि की सुविधा होती है। इसके द्वारा हम रेल्वे-बस-सिनेमा की टिकट बुक करवा सकते हैं। मोबाइल फोन के अंदर उपयोग में आनेवाले इन्टरनेट द्वारा कई जानकारी हम प्राप्त कर सकते हैं। अनेक सेवाओं/सुविधाओं के लिए वर्तमान में मोबाइल फोन जरूरी उपकरण बन गया है।

कृत्रिम उपग्रह (सेटेलाइट)

संचार माध्यम के रूप में कृत्रिम उपग्रह अधिक उपयोगी है। यह कृत्रिम उपग्रह मानवसर्जित है। जिसे अवकाश में स्थापित किया जाता है। पृथ्वी पर से अवकाश में दैनिक समाचार, मौसम की जानकारी, विविध कार्यक्रम इस उपग्रह द्वारा पृथ्वी पर स्थित किसी भी स्थान के टेलीविजन, कम्प्यूटर qऔर मोबाइल फोन जैसे साधनों में प्राप्त कर सकते हैं। पृथ्वी के गर्भ में पानी, खनिज भण्डार छिपा है, जिसकी जानकारी भी प्राप्त कर सकते हैं। हमारे घर से दूसरे स्थल के बीच का अंतर और मार्ग जान सकते हैं। कृत्रिम उपग्रह देश के संरक्षण में अधिक उपयोगी है।

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संचार माध्यम और टेक्नोलॉजी

मनुष्य ने अपनी उत्क्रांति के साथ-साथ अनेक आवश्यकताएँ उत्पन्न की हैं। आरंभ में प्राथमिक आवश्यकताएँ जैसे कि भोजन, पानी और अपने अस्तित्व को टिकाए रखने के विषय मुख्य थे। समय के साथ सामाजिक और सांस्कृतिक विषयों की आवश्यकताएँ उत्पन्न हुईं, उनके लिए संचार माध्यम की आवश्यकताएँ बढ़ीं, जिससे उनमें बदलाव होने लगा। पहले के समय में डाक व्यवस्था थी जिनमें से टेलीफोन, पेजर, मोबाइल फोन, फैक्स जैसी सुविधाएँ टेक्नोलॉजी के माध्यम से बढ़ने लगी और उसके कारण नये-नये परिवर्तन होने लगे। वर्तमान समय में भी देखें तो समाचार- पत्रों में भी टेक्नोलॉजी का उपयोग होने लगा है। पहले पेपर छापने के लिए अक्षरों को जमाना पड़ता था। अब उसके स्थान पर कम्प्यूटर के माध्यम से टाइप करके छापने के लिए दे सकते हैं। टेलीफोन में पहले नम्बर गोल-गोल घुमाने पडते थे और अब उसके स्थान पर सीधा नम्बर दबाकर हम दूसरे व्यक्ति से संपर्क साधकर बात कर सकते हैं। नयी खोज वॉकीटॉकी की हुई, इसका उपयोग पुलिस अधिक मात्रा में करती है।

मनुष्य जितनी तीव्रता से विचारता है उतनी तीव्रता से उसका प्रसार या प्रचार कर सकता है। संचार माध्यम के साधन जैसे कि, टी.वी., रेडियो, प्रोजेक्टर, कम्प्यूटर, मोबाइल फोन जैसे साधन टेक्नोलॉजी के माध्यम से आए और उसमें रोजाना परिवर्तन होने लगे हैं। अब व्यक्ति एक दूसरे को मोबाइल फोन या कम्प्यूटर द्वारा प्रत्यक्ष देख सकता है और बातचीत भी कर सकता है। हमारे द्वारा लिखे कागज ई-मेइल या फैक्स द्वारा तुरन्त दूसरी जगह पहुँचा सकते हैं। टेक्नोलॉजी के उपयोग से संचार माध्यमों का विकास अधिक से अधिक हुआ है।

टेलीविजन के कार्यक्रम में भी परिवर्तन होने लगा है। कृत्रिम उपग्रह द्वारा कृषि क्षेत्र की तीव्र एवं सचोट जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। समाचार, फिल्म, सीरियल, शैक्षणिक कार्यक्रम, विज्ञापन के उपरांत बाढ़, भूकंप, चक्रवात जैसी जानकारी भी प्राप्त कर सकते हैं। व्यक्ति संचार माध्यम के साधन के रूप में मोबाइल फोन का उपयोग मात्र बातचीत के लिए ही नहीं परंतु संदेश के आदान-प्रदान के लिए भी है। संदेश के लिए अनेक प्रकार की सोशियल मीडिया एप और कोई जानकारी खोजने के लिए ब्राउज़र का समावेश किया गया है। इस प्रकार की एप आने से समाज में और शिक्षण में अनेक परिवर्तन आए हैं।

लोकतंत्र में संचार-माध्यम

देश में होनेवाली घटनाओं की जानकारी लोगों तक पहुँचाने के लिए संचार माध्यमों का महत्त्व बढ़ रहा है। लोगों के जीवन स्तर में परिवर्तन लाने के लिए सरकार कैसे कार्य करती है उसकी जानकारी आदान-प्रदान कर सकते हैं और आम जनता तक आसानी से पहुँचा सकते हैं। सरकार द्वारा किए जानेवाले शिक्षण, स्वास्थ्य, कृषि जैसे कार्यों की जानकारी संचार माध्यमों द्वारा प्राप्त कर सकते हैं। सरकार द्वारा किए गए कार्य और सामग्री के समक्ष विपक्ष उसकी कमियाँ उजागर करने का प्रयत्न करती है। सरकार संचार माध्यमों पर निगरानी भी रखती है। रेडियो और टी.वी. पर आनेवाले समाचारों का समाज में क्या प्रभाव पड़ेगा, यह देखती है। संचार माध्यम और सोशियल मीडिया सच्ची जानकारी ही प्रस्तुत करती है क्या? यह प्रत्येक नागरिक को जाँचना चाहिए।

संचार-माध्यमों का विवेकपूर्ण उपयोग

हमें संचार माध्यमों का उपयोग योग्य ढंग से करना चाहिए। प्रदूषण, पानी-समस्या, गरीबी, बालमजदूरी, महिलाओं पर अत्याचार जैसी घटनाओं पर ध्यान केन्द्रित करनेवाले विषयों पर अधिक से अधिक चर्चा करनी चाहिए। इसके लिए टेलीविजन, रेडियो, समाचारपत्र आदि माध्यमों का विशेष उपयोग करना चाहिए। कभी-कभी ऐसे विषय पर एक दूसरे पर आक्षेपबाजी होती हो, ऐसे दृश्य भी हमें टेलीविजन पर देखने को मिलते हैं, जिसका समाज पर विपरित असर पड़ता है। मोबाइल फोन पर महिलाएँ, बालक, वृद्ध या गरीब पर अत्याचार होते हैं ऐसे वीडियों नहीं रखने चाहिए। अध्ययन करनेवाले विद्यार्थी द्वारा मोबाइल फोन का उपयोग बातचीत तक ही सीमित होना चाहिए। उसमें उपलब्ध गेम, इन्टरनेट का उपयोग कम और विवेकपूर्ण ही होना चाहिए। मोबाइल फोन के प्रकाश के कारण आँखों को नुकसान होता है तथा समय और शिक्षण पर विपरीत असर पड़ता है। जिससे उसका उपयोग कम करना चाहिए।
इस प्रकार हमारे दैनिक जीवन में संचार माध्यमों का स्थान महत्त्वपूर्ण रहा है। परंतु इनका विवेकपूर्ण उपयोग हो यह जरूरी है।

विज्ञापन

वर्तमान समय में विज्ञापनों का महत्त्व अधिक देखने को मिलता है। हमारे यहाँ त्योहार के आते ही विक्रेता ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए नई-नई स्कीमें रखते हैं। जैसे कि 50 % फ्री, वॉशिंग मशीन के साथ 500 रुपये का गिफ्ट वाउचर फ्री, 1 रुपये में रेफ्रिजरेटर ले जाओ, एक जोड़ी कपड़े के साथ एक जोड़ी फ्री, गेरेंटेड गिफ्ट आदि मिलते हैं। इसके पीछे का कारण देखें तो व्यवसाय में प्रतिस्पर्धा है।

विज्ञापन के माध्यम

व्यापारी, पीढ़ियाँ, संस्थाएँ, विद्यालय अपने द्वारा किए जानेवाले कार्यों को बाज़ार में या व्यवसाय के क्षेत्र तक पहुँचाने में विज्ञापनों का अधिकतम उपयोग करते हैं। बालकों, आप टी.वी. देखते होंगे तब चैनल में आनेवाले प्रोग्रामों के बीच में विज्ञापन आते हैं। सही? भीतचित्र, रेडियो, सिनेमा, टेलीविजन, बैनर, मोबाइल फोन, टेलीफोन, पत्रिका, खरीदी के थैले, बसस्टैण्ड, मैगेजिन, अखबार, बस या ट्रेन की साइट पर संगीत के साधन, लाइटबिल, टैक्सबिल आदि विज्ञापनों के माध्यम हैं।

विज्ञापन के लाभ-हानियाँ

विक्रेताओं को माल की बिक्री बढ़ानी हो तो विज्ञापन करना पड़ता है।

लाभ :

  • वस्तु पर छापी जानेवाली कीमत को जान सकते हैं।
  • वस्तु की सामान्य जानकारी व्यक्ति तक आसानी से पहुँचा सकते हैं।

हानियाँ :

  • विज्ञापन पर बहुत ही धन खर्च होता है और उसका बोझ ग्राहकों को भोगना पड़ता है।
  • विज्ञापन करनेवाला व्यक्ति जिस वस्तु का प्रचार करता है, वह वस्तु शायद स्वयं कभी उपयोग न करता हो, ऐसा भी होता है।
  • विज्ञापन के आधार पर खरीदी करने पर हम कभी ठगे भी जाते हैं।
  • टी.वी. पर दर्शाए जानेवाले विज्ञापनों को देखकर हमारे मन में क्षोभ अनुभव होता है। क्योंकि हम प्रत्येक वस्तु खरीद नहीं सकते। बालकों या बड़ों को दिला नहीं सकते, ऐसा अनुभव होता है।
  • देखा-देखी का चलन बढ़ जाता है।

विज्ञापन से सावधान

  • गलत या लुभावने विज्ञापनों से सावधान रहना चाहिए।
  • चित्र, पोस्टर अथवा वीडियो द्वारा दर्शाई जानेवाली वस्तु की जाँच करके खरीददारी करनी चाहिए।
  • सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक या धार्मिक बातों का निषेधात्मक प्रभाव डालते हों, ऐसे विज्ञापनों को प्रोत्साहन न दें और उसके संदर्भ में सरकार का ध्यान आकर्षित करवाएँ।

विज्ञापन के सामाजिक मूल्य

आज विज्ञापन सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन का मुख्य भाग बन गया है। हम जो विज्ञापन देखते हैं उसकी चर्चा समाज में की जाती है। सरकार द्वारा समाज के उत्थान के लिए विज्ञापन किए जाते हैं, जैसे कि बालविवाह न करना, स्वास्थ्य, जनसंख्या नियंत्रण, लड़कियों को शिक्षा देना, बालकों को कुपोषण से बचाने आदि के विज्ञापनों द्वारा इसका विशेष फैलाव करके सामाजिक जागृति ला सकते हैं।

विज्ञापन और लोकजीवन

लोकतांत्रिक देशों में अधिकांशतः संचार माध्यम स्वतंत्रता रखते हैं। लोकतंत्र को मजबूत करने और टिकाए रखने हेतु समूह माध्यमों द्वारा प्रसारित होनेवाले विज्ञापन महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। जैसे कि,

  • लोकतंत्र में लोककल्याण केन्द्र में है। विज्ञापनों द्वारा सरकार लोककल्याण की योजनाओं की जानकारी लोगों तक पहुँचाती है।
  • लोकोपयोगी सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक तथा अन्य बातों को विज्ञापनों के माध्यमों द्वारा सरकार उनकी जानकारी लोगों तक पहुँचाती है।
  • शिक्षा का प्रचार और प्रसार, कुरिवाज, अंधविश्वास, बालविवाह की प्रथा, गलत मान्यताओं का खण्डन लोकतंत्र में विज्ञापनों के माध्यम से होता है। जिससे लोकतंत्र परिपक्व बनता है।
  • लोकतंत्र में सरकार सांसदों, मंत्रियों, विधायकों आदि द्वारा दी जानेवाली सेवाओं का प्रसार विज्ञापनों द्वारा करती है।
  • सरकार स्वास्थ्य विषयक, जल बचाओ, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, स्वच्छता अभियान आदि लोकतंत्र के पोषक परिबलों को विज्ञापनों के माध्यम से उजागर करती है।
  • लोकतंत्र के तत्त्व जैसे कि समानता, स्वतंत्रता, बंधुत्व और एकता का विचार संचार माध्यमों के द्वारा दिए जानेवाले विज्ञापनों से दृढ़ बनते हैं; जिससे लोकतंत्र अधिक मजबूत बनता है।
  • सरकार मतदान की समग्र प्रक्रिया की समझ लोगों को विज्ञापन द्वारा देती है।
  • सरकार अपने कार्यकाल के दौरान किए गए लोकोपयोगी कार्यों को विज्ञापनों के माध्यम से लोगों तक पहुँचाकर दुबारा सत्ता प्राप्त करने का प्रयत्न करती है।

इस प्रकार, संचार माध्यम और विज्ञापन समाज में महत्त्वपूर्ण स्थान रखते हैं। जिसके द्वारा व्यक्ति के सामाजिक, धार्मिक, आर्थिक, राजनैतिक और व्यक्तिगत जीवन में महत्त्वपूर्ण परिवर्तन होते देखा गया है।