Class 12 Political Science Solutions Chapter 11 दल प्रणाली

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न-

प्रश्न 1. राजनीतिक दलों की मुख्य विशेषताओं का वर्णन करो।
(Explain the main Characteristics of Political Parties.)
अथवा
राजनीतिक दलों की चार विशेषताएं बताते हुए लोकतन्त्र में राजनीतिक दलों की भूमिका का वर्णन करें।
(Explain the characteristics of Political Parties and also write the importance of Political Parties in Democracy.)
अथवा
राजनीतिक दलों की परिभाषा दें और लोकतन्त्र में राजनीतिक दलों के कोई चार कार्यों का वर्णन करें ।
(Define Political Parties. Describe any four functions of Political Parties in democracy.)
उत्तर-आधुनिक प्रजातन्त्र राज्यों में राजनीतिक दलों का होना अनिवार्य समझा जाता है। प्रजातन्त्र और राजनीतिक दलों का एक-दूसरे के साथ इतना घनिष्ठ सम्बन्ध है कि प्रजातन्त्र के बिना राजनीतिक दलों की उन्नति नहीं हो सकती तथा बिना राजनीतिक दलों के प्रजातन्त्र शासन का चलाना सम्भव नहीं होता। वास्तव में आधुनिक युग राजनीतिक दलों का युग है। किसी भी देश में इसके बिना शासन चलाना सम्भव नहीं। चुनाव भी दलों के आधार पर होते हैं, विधानमण्डल का काम भी इनके द्वारा ही चलाया जाता है और शासन भी किसी-न-किसी राजनीतिक दल के कार्यक्रम के अनुसार ही चलाया जाता है।
राजनीतिक दल की परिभाषाएं (Definitions of Political Party)-राजनीतिक दल की परिभाषा विभिन्न लेखकों ने विभिन्न प्रकार से की है

परम्परागत परिभाषाएं (Traditional Definitions)-

1. बर्क (Burke) का कहना है कि, “राजनीतिक दल ऐसे लोगों का समूह होता है जो किसी ऐसे आधार पर, जिस पर वे सब एकमत हों, अपने सामूहिक प्रयत्नों द्वारा जनता के हित में काम करने के लिए एकता में बंधे हों।”
(“A political party is a body of men united for promoting, by their joint endeavours, the national interest upon some particular principle on which they are all agreed.”)

2. डॉ० लीकॉक (Dr. Leacock) के मतानुसार, “राजनीतिक दल से हमारा अभिप्राय उन नागरिकों का थोड़ा या अधिक संगठित समूह है जो एक राजनीतिक इकाई के रूप में इकटे काम करते हैं। वे सार्वजनिक मामलों पर एक-सी राय रखते हैं और सामान्य उद्देश्यों की पूर्ति के लिए मतदान की शक्ति का प्रयोग करके सरकार पर अपना नियन्त्रण रखना चाहते हैं।”
(“By a political party we mean more or less organised group of citizens who act together as a political unit. They share or profess to share the same opinion on public questions and by exercising their voting power towards a common end, seek to obtain control of the government.”)

3. गिलक्राइस्ट (Gilchrist) के शब्दानुसार, “राजनीतिक दल ऐसे नागरिकों का संगठित समूह है जिनके राजनीतिक विचार एक से हों और जो एक राजनीतिक इकाई के रूप में कार्य करके सरकार पर नियन्त्रण रखने का प्रयत्न करते हों।”
(“A political party may be defined as an organised group of citizens who profess to share the same political view and who, by acting as a political unit, try to control the government.”)

4. मैकाइवर (Maclver) का कहना है, “राजनीतिक दल किसी सिद्धान्त या नीति के समर्थन के लिए संगठित वह समुदाय है जो संवैधानिक ढंग से उस सिद्धान्त या नीति को शासन का आधार बनाना चाहता है।” .
(“A political party is an association organised in support of some principle or policy which by constitutional means it endeavours to make the determinant of the government.”)

5. गैटल (Gettell) के अनुसार, “राजनीतिक दल उन नागरिकों का कम या अधिक संगठित समूह है जो एक राजनीतिक इकाई की तरह काम करते हैं और जो अपने मतों के द्वारा सरकार पर नियन्त्रण करने तथा अपने सिद्धान्त को लागू करना चाहते हों।”
इन सभी परिभाषाओं द्वारा हम इस निष्कर्ष पर पहुंचते हैं कि राजनीतिक दल ऐसे नागरिकों का समूह है जो सार्वजनिक मामलों पर एक-से विचार रखते हों और संगठित होकर अपने मताधिकार द्वारा सरकार पर अपना नियन्त्रण स्थापित करना चाहते हों ताकि अपने सिद्धान्तों को लागू कर सके।

आधुनिक परिभाषाएं-मोरिस दुवर्जर (Maurice Duverger), रॉय मैकरिडिस (Roy Macridis) तथा जे० ए० शूम्पीटर (J. A. Schumpeter) आदि आधुनिक विद्वानों का विचार है कि राजनीतिक दल केवल ‘सत्ता’ हथियाने के साधन बन गए हैं। जे० ए० शूम्पीटर (J. A. Schumpeter) के मतानुसार, “राजनीतिक दल एक ऐसा गुट या समूह है जिसके सदस्य सत्ता प्राप्ति के लिए संघर्ष व होड़ में संलग्न हैं।” (“A party is a group whose members propose to act in concert in the competitive struggle for political power.”).

प्रश्न 2. आधुनिक लोकतन्त्र में राजनीतिक दलों के कार्यों का वर्णन करें। (Discuss the functions of Political Parties in a Democratic Government.)
उत्तर-लोकतन्त्र में राजनीतिक दलों का विशेष महत्त्व है। इन्हें हम लोकतन्त्र की धुरी कह सकते हैं जिनके ऊपर सरकार की मशीन के पहियों का भार होता है। प्रो० मैकाइवर के शब्दों में, “बिना दलीय संगठन के किसी सिद्धान्त का पर्याप्त प्रकाशन नहीं हो सकता, किसी भी नीति का क्रमानुसार विकास नहीं हो सकता और न ही किसी प्रकार की स्वीकृत संस्थाएं हो सकती हैं जिनके द्वारा कोई दल शक्ति प्राप्त करना चाहता है या उसे स्थिर रखना चाहता हैं।”
राजनीतिक दल निम्नलिखित महत्त्वपूर्ण कार्य करते हैं-

1. लोकमत तैयार करना (To Mould Public Opinion)-लोकतन्त्रात्मक देश में राजनीतिक दल जनमत के निर्माण में बहुत सहायता करते हैं। साधारण जनता को देश की पूरी जानकारी नहीं होती जिसके कारण वे इन समस्याओं पर ठीक प्रकार से सोच नहीं सकते। राजनीतिक दल देश की समस्याओं को स्पष्ट करके जनता के सामने रखते हैं तथा उनको हल करने के सुझाव भी देते हैं जिससे जनमत के निर्माण में बहुत सहायता मिलती है। .

2. सार्वजनिक नीतियों का निर्माण (Formulation of Public Policies) राजनीतिक दल देश के सामने आने वाली समस्याओं पर विचार करते हैं तथा अपनी नीति निर्धारित करते हैं। राजनीतिक दल अन्तर्राष्ट्रीय समस्याओं पर भी सोच-विचार करते हैं और अपनी नीति बनाते हैं। प्रत्येक दल का समस्याओं को सुलझाने के लिए अपना दृष्टिकोण होता है।

3. राजनीतिक शिक्षा (Political Education)-राजनीतिक दल जनता को राजनीतिक शिक्षा देने का महत्त्वपूर्ण कार्य करते हैं। राजनीतिक दल देश की समस्याओं को सुलझाने के लिए अपनी नीति का निर्माण करते हैं और उन नीतियों का जनता में प्रचार करते हैं। इससे जनता को देश की समस्याओं की जानकारी होती है तथा विभिन्न दलों की नीतियों का पता चलता है। राजनीतिक दल सरकार की आलोचना करते हैं तथा जनता को सरकार की बुराइयों से अवगत करवाते हैं। विशेषकर चुनाव के दिनों में प्रत्येक राजनीतिक दल जनता को अपने पक्ष में करने के लिए अपनी नीतियों का जोरदार समर्थन करता है। राजनीतिक दलों के नेता नागरिकों के घरों में जाकर उन्हें अपने विचारों से अवगत करवाते हैं। चुनाव के दिनों में तो साधारण से साधारण व्यक्ति भी राजनीति में रुचि लेने लगता है।

4. चुनाव लड़ना (To Contest Election)-राजनीतिक दलों का मुख्य कार्य चुनाव लड़ना है। राजनीतिक दल अपने उम्मीदवार खड़े करते हैं और उनको चुनाव में विजयी कराने के लिए उनके पक्ष में प्रचार करते हैं। राजनीतिक दल चुनाव का घोषणा-पत्र (Election Manifesto) प्रकाशित करते हैं। स्वतन्त्र उम्मीदवार बहुत कम खड़े होते हैं और मतदाता भी स्वतन्त्र उम्मीदवारों को बहुत कम वोट डालते हैं। राजनीतिक दल मतदाताओं को अपने पक्ष में करने के लिए हर सम्भव यत्न करते हैं।

5. सरकार बनाना (To form the Government)-प्रत्येक राजनीतिक दल का मुख्य उद्देश्य सरकार पर नियन्त्रण करके अपनी नीतियों को लागू करना होता है। चुनाव में जिस दल को बहुमत प्राप्त होता है उसी दल की सरकार बनती है। सरकार की स्थापना करने के पश्चात् सत्तारूढ़ दल अपनी नीतियों तथा चुनाव में किए गए वायदों को व्यावहारिक रूप देने का प्रयत्न करता है। बहुमत दल शासन को अच्छी तरह चलाने का प्रयत्न करता है ताकि अगले चुनाव में भी बहुमत प्राप्त कर सके।

6. विरोधी दल बनाना (To form Opposition)-चुनाव में जिन दलों को बहुमत प्राप्त नहीं होता, वे विरोधी दल के रूप में कार्य करते हैं। विरोधी दल सरकार की आलोचना करके सरकार को निरंकुश बनने से रोकता है और सरकार की बुराइयों को जनता के सामने रखता है। विरोधी दल केवल विरोध करने के लिए ही सरकार की आलोचना नहीं करता बल्कि रचनात्मक आलोचना करता है और संकटकाल में सरकार का पूर्ण सहयोग करता है। संसदीय सरकार में विरोधी दल सत्तारूढ़ दल को हटाकर स्वयं सरकार बनाने के लिए प्रयत्न करता रहता है। लोकतन्त्र की सफलता के लिए एक संगठित तथा शक्तिशाली विरोधी दल का होना बहुत आवश्यक है।

7. अपने विधायकों पर नियन्त्रण करता है (Control over the Legislators)-राजनीतिक दल विधानमण्डल के सदस्यों पर नियन्त्रण रखता है तथा उन्हें संगठित करता है। एक दल के सदस्य विधानमण्डल में एक टोली के रूप में कार्य करते हैं और दल के आदेशों के अनुसार अपने मतों का प्रयोग करते हैं। संसदीय सरकार में बहुमत दल के सदस्य सरकार का सदा समर्थन करते हैं और विरोधी दल के सदस्य सरकार की नीतियों के विपक्ष में वोट डालते हैं।

8. आर्थिक तथा सामाजिक सुधार (Economic and Social Reforms)-राजनीतिक दल राजनीतिक कार्यों के साथ-साथ आर्थिक एवं सामाजिक सुधार के भी कार्य करते हैं। राजनीतिक दल सामाजिक कुरीतियों जैसे कि छुआछूत, दहेज प्रथा, नशीली वस्तुओं आदि के विरुद्ध प्रचार करते हैं तथा उन्हें समाप्त करने का प्रयास करते हैं। जब कभी लोगों पर किसी प्रकार का संकट आ जाए उस समय भी राजनीतिक दल ही जनता की सेवा करने के लिए मैदान में आते हैं और संगठित रूप में लोगों की सहायता करते हैं, प्राकृतिक आपत्तियों-बाढ़, अकाल, युद्ध आदि के कारण पीड़ित लोगों की भी राजनीतिक दल सहायता करते हैं।

9. कार्यपालिका और विधानपालिका में सहयोग उत्पन्न करना (To Create Harmony betweent the Executive and the Legislature)-अध्यक्षात्मक शासन में कार्यपालिका और व्यवस्थापिका में कोई कानूनी सम्बन्ध नहीं होता। सरकार के ये दोनों अंग एक-दूसरे से पृथक और स्वतन्त्र होते हैं। ऐसी दशा में इन अंगों में गतिरोध होने की सम्भावना रहती है। ऐसे अवसरों पर राजनीतिक दल बहुत लाभकारी सिद्ध होते हैं। चूंकि दोनों अंगों में राजनीतिक दलों के सम्बन्धित व्यक्ति होते हैं, ये आपस में सामंजस्य तथा सहयोग स्थापित कर सकते हैं। अपने राजनीतिक दल के उन सदस्यों के द्वारा जो विधानपालिका में होते हैं, अध्यक्ष अपने विचारों आदि को वहां तक पहुंचा सकता है। यह सदस्य अध्यक्ष और विधानपालिका के बीच एक कड़ी का काम करते हैं।

10. जनता और सरकार के बीच कड़ी का काम करना (To Serve as a Link between People and the Government)-राजनीतिक दल जनता और सरकार के बीच कड़ी का काम करता है। जिस दल की सरकार होती है वह जनता में सरकार के कार्यक्रमों का प्रचार करता है। राजनीतिक दल जनता की तकलीफों और उनकी शिकायतों को भी सरकार तक पहुंचाते हैं और उनको दूर करवाने का प्रयत्न करते रहते हैं।

11. केन्द्र तथा इकाइयों में ताल-मेल करना (To create Harmony between the Centre and the Units)—संघात्मक शासन में केन्द्र तथा इकाइयों में शक्तियों का विभाजन होता है जिसके कारण केन्द्र तथा इकाइयों में गतिरोध उत्पन्न होने की सम्भावना बनी रहती है। राजनीतिक दलों ने गतिरोध की सम्भावना को कम कर दिया है। जब केन्द्र तथा इकाइयों में एक ही दल की सरकार होती है तब मतभेद उत्पन्न होने की कोई सम्भावना नहीं रहती।

12. राष्ट्रीय एकता का साधन (Means of National Unity)-संघात्मक राज्यों में राजनीतिक दल राष्ट्रीय एकता का एक महत्त्वपूर्ण साधन है। संघात्मक शासन में शक्तियों के केन्द्र तथा इकाइयों में विभाजन के कारण दोनों अपने-अपने क्षेत्र में स्वतन्त्र होते हैं। कई बार केन्द्र तथा इकाइयों में झगड़े उत्पन्न हो जाते हैं जिससे राष्ट्रीय एकता खतरे में पड़ सकती है। ऐसी स्थिति में राजनीतिक दल केन्द्र तथा इकाइयों में कड़ी होने के कारण राष्ट्रीय एकता स्थापित करने में सहायता करते हैं।

निष्कर्ष (Conclusion)-आज के युग में, राजनीतिक दलों का बड़ा महत्त्व है और प्रजातन्त्र की सफलता के लिए राजनीतिक दल अनिवार्य हैं। लॉर्ड ब्राइस (Lord Bryce) का कहना है कि, “इनके बिना कोई देश कार्य नहीं कर सकता। कोई भी आज तक यह नहीं दिखा सका है कि लोकतन्त्र सरकारें इनके बिना कैसे कार्य कर सकती हैं।” जब अमेरिकन संविधान बना तो वहां कोई राजनीतिक दल नहीं था और न ही संविधान निर्माताओं को इसकी सम्भावना थी, परन्तु कुछ समय के बाद ही वहां दल प्रणाली ने अपना स्थान बना लिया। देश में क्या हो रहा है और क्या होना चाहिए इसकी जानकारी जनता को देने का श्रेय राजनीतिक दलों को ही है। प्रो० ब्रोगन (Prof. Brogan) ने लिखा है कि, “बिना दलीय व्यवस्था के अमेरिका के राष्ट्रपति जैसे किसी राष्ट्रीय महत्त्व के अधिकारी का निर्वाचन शायद असम्भव हो जाता और यह भी निश्चित है कि अमेरिका के संवैधानिक इतिहास में सबसे बड़ा गतिरोध अथवा गृह-युद्ध केवल उसी समय हुआ जब वहां दल व्यवस्था नष्ट हो चुकी थी।”

प्रश्न 3. दल प्रणाली की किस्मों का वर्णन कीजिए। आपको कौन-सी दल प्रणाली पसन्द है व क्यों ? (Describe the types of Party System. Which party system do you like and why ?)
उत्तर-आज लोकतन्त्र का युग है और लोकतान्त्रिक शासन प्रणाली राजनीतिक दलों के बिना कार्य नहीं कर सकती है। दल प्रणाली कई प्रकार की होती है
(क) एक दलीय प्रणाली (ख) दो दलीय प्रणाली (ग) बहु-दलीय प्रणाली।
नोट-एक दलीय प्रणाली, दो दलीय प्रणाली तथा बहु-दलीय प्रणाली की व्याख्या-

यदि किसी राज्य में केवल एक ही राजनीतिक दल राजनीति में भाग ले रहा हो और अन्य राजनीतिक दलों को संगठित होने का कार्य करने की स्वतन्त्रता एवं अधिकार प्राप्त न हो तो ऐसी दल-प्रणाली को एक दलीय प्रणाली कहा जाता है। अधिनायकतन्त्र देशों में प्रायः एक दल प्रणाली प्रचलित होती है। 1917 की क्रान्ति के बाद रूस में एक दल प्रणाली स्थापित की गई। सोवियत संघ में साम्यवादी दल के अतिरिक्त और किसी दल की स्थापना नहीं की जा सकती थी। प्रथम महायुद्ध के पश्चात् इटली और जर्मनी में एक-दलीय प्रणाली स्थापित की गई। इटली में फासिस्ट पार्टी के अतिरिक्त अन्य कोई पार्टी स्थापित नहीं की गई। जर्मनी में केवल नाज़ी पार्टी थी। 1991 में सोवियत संघ, रूमानिया, पोलैण्ड आदि देशों में एक दलीय शासन समाप्त हो गया। आजकल चीन, वियतनाम, क्यूबा, उत्तरी कोरिया आदि देशों में एक दलीय प्रणाली (साम्यवादी) पाई जाती है।

एक दलीय प्रणाली के गुण (MERITS OF ONE PARTY SYSTEM) –

एक दलीय प्रणाली में निम्नलिखित गुण पाए जाते हैं-

1. राष्ट्रीय एकता-एक दलीय प्रणाली में राष्ट्रीय एकता बनी रहती है क्योंकि विभिन्न दलों में संघर्ष नहीं होता। सभी नागरिक एक ही विचारधारा में विश्वास रखते हैं और एक ही नेता के नेतृत्व में कार्य करते हैं जिससे राष्ट्रीय एकता की भावना उत्पन्न होती है।
2. स्थायी सरकार-एक दलीय प्रणाली के कारण सरकार स्थायी होती है। मन्त्रिमण्डल के सदस्य एक ही दल से होते हैं और विधानसभा के सभी सदस्य सरकार का समर्थन करते हैं।
3. दृढ़ शासन-एक दलीय प्रणाली में शासन दृढ़ होता है। किसी दूसरे दल के न होने के कारण सरकार की आलोचना नहीं होती। इस शासन से देश की उन्नति होती है।
4. दीर्घकालीन योजनाएं सम्भव-एक दलीय प्रणाली में सरकार स्थायी होने के कारण दीर्घकालीन योजनाएं बनानी सम्भव होती हैं जिससे देश की आर्थिक उन्नति बहुत होती है।
5. शासन में दक्षता-सरकार के सदस्यों में पारस्परिक विरोध न होने के कारण शासन प्रणाली के निर्णय शीघ्रता से लिए जाते हैं जिससे शासन में दक्षता आती है।
6. राष्ट्रीय उन्नति–राजनीतिक दलों के पारस्परिक झगड़े, आलोचना और सत्ता के लिए खींचातानी में समय नष्ट नहीं होता और जो भी योजना बन जाती है उसको ज़ोरों से लागू किया जाता है, जिससे देश की उन्नति तेज़ी से होती है।

एक दलीय प्रणाली के दोष (DEMERITS OF ONE PARTY SYSTEM)

एक दलीय प्रणाली में निम्नलिखित दोष पाए जाते हैं-

1. लोकतन्त्र के विरुद्ध-यह प्रणाली लोकतन्त्र के अनुकूल नहीं है। इसमें नागरिकों को अपने विचार व्यक्त करने की स्वतन्त्रता नहीं होती और न ही उन्हें संगठन बनाने की स्वतन्त्रता होती है।
2. नाममात्र के चुनाव-एक दलीय प्रणाली में चुनाव केवल दिखावे के लिए होते हैं। नागरिकों को अपने प्रतिनिधि चुनने की स्वतन्त्रता नहीं होती। ___3. तानाशाही की स्थापना-एक दलीय प्रणाली में तानाशाही का बोलबाला रहता है। विरोधियों को सख्ती से दबाया जाता है अथवा उन्हें समाप्त कर दिया जाता है।
4. सरकार उत्तरदायी नहीं रहती-सरकार की आलोचना और विरोध करने वाला कोई और दल नहीं होता जिसके कारण सरकार उत्तरदायी नहीं रहती।
5. व्यक्तित्व का विकास नहीं होता-मनुष्यों को स्वतन्त्रता प्राप्त नहीं होती जिसके कारण वे अपने व्यक्तित्व का विकास नहीं कर पाते।
6. सभी हितों को प्रतिनिधित्व नहीं मिलता-एक दलीय प्रणाली के कारण सभी वर्गों को मन्त्रिमण्डल में प्रतिनिधित्व नहीं मिलता। सभी नागरिकों के विचारों का सही प्रतिनिधित्व एक दलीय प्रणाली में नहीं हो सकता।
7. लोगों को राजनीतिक शिक्षा नहीं मिलती-विरोधी दलों के अभाव के कारण चुनाव के दिनों में भी कोई विशेष हलचल नहीं होती। एक दल होने के कारण यह सदा सरकार की अच्छाइयों का प्रचार करता है। जनता को सरकार की बुराइयों का पता नहीं चलता।
8. विरोधी दल का अभाव-एक दलीय प्रणाली में विरोधी दल का अभाव रहता है। सरकार को निरंकुश बनाने से रोकने के लिए तथा सरकार की गलत नीतियों की आलोचना करने के लिए विरोधी दल का होना अति आवश्यक है। बिना विरोधी दल के बिना लोकतन्त्र सम्भव नहीं है।
9. संवैधानिक साधनों से सरकार को बदलना कठिन कार्य है-एक दलीय प्रणाली का एक महत्त्वपूर्ण दोष ये हैं कि इसमें सरकार को संवैधानिक तथा शान्तिपूर्ण साधनों द्वारा बदला नहीं जा सकता। सरकार को केवल क्रान्तिकारी तरीकों से ही बदला जा सकता है।

द्वि-दलीय प्रणाली के अन्तर्गत केवल दो मुख्य महत्त्वपूर्ण दल होते हैं। दो मुख्य दलों के अतिरिक्त और भी दल होते हैं, परन्तु उनका कोई महत्त्व नहीं होता। सत्ता मुख्य रूप में दो दलों में बदलती रहती है। इंग्लैण्ड और अमेरिका में द्वि-दलीय प्रणाली प्रचलित है। इंग्लैण्ड के मुख्य दलों के नाम हैं-अनुदार दल तथा श्रमिक दल। अमेरिका में दो महत्त्वपूर्ण दल हैं-रिपब्लिकन पार्टी तथा डैमोक्रेटिक दल।

द्वि-दलीय प्रणाली के गुण (MERITS OF BI-PARTY SYSTEM)
द्वि-दलीय प्रणाली में निम्नलिखित गुण पाए जाते हैं-

1. सरकार आसानी से बनाई जा सकती है-द्वि-दलीय प्रणाली का सबसे बड़ा गुण यह है कि इसमें सरकार आसानी से बनाई जा सकती है। दोनों दलों में एक दल का विधानमण्डल में बहुमत होता है। बहुमत दल अपना मन्त्रिमण्डल बनाता है और दूसरा दल विरोधी दल बन जाता है। जिस समय सत्तारूढ़ दल चुनाव में हार जाता है अथवा विधानमण्डल में बहुमत का विश्वास खो देता है तब विरोधी दल को सरकार बनाने का अवसर मिलता है।

2. स्थिर सरकार-बहुमत दल की सरकार बनती है और दूसरा दल विरोधी दल बन जाता है। मन्त्रिमण्डल तब तक अपने पद पर रहता है जब तक उसे विधानमण्डल में बहुमत प्राप्त रहता है। दल में कड़ा अनुशासन पाया जाता है जिसके कारण मन्त्रिमण्डल के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव पास करके मन्त्रिमण्डल को हटाया नहीं जा सकता। इस तरह सरकार अगले चुनाव तक अपने पद पर रहती है।

3. दृढ़ सरकार तथा नीति में निरन्तरता-सरकार स्थिर होने के कारण शासन में दृढ़ता आती है। सरकार अपनी नीतियों को दृढ़ता से लागू करती है। सरकार स्थायी होने के कारण लम्बी योजनाएं बनाई जा सकती हैं और इससे नीति में भी निरन्तरता बनी रहती है।

4. जनता स्वयं सरकार चुनती है-द्वि-दलीय प्रणाली में जनता स्वयं प्रत्यक्ष रूप से सरकार का चुनाव करती है। दोनों दलों के कार्यक्रम और दोनों दलों के नेताओं को जनता अच्छी तरह जानती है। अतः जनता जिस दल को शक्ति सौंपना चाहती है उस दल के पक्ष में निर्णय दे दिया जाता है। जनता दो दलों में से जिस दल को सत्तारूढ़ दल बनाना चाहे बना सकती है।

5. निश्चित उत्तरदायित्व-द्वि-दलीय प्रणाली में बहुमत दल की सरकार होती है जिससे सरकार की बुराइयों के लिए सत्तारूढ़ को जिम्मेवार ठहराया जा सकता है। परन्तु जब मन्त्रिमण्डल में विभिन्न दलों के सदस्य होते हैं तब मन्त्रिमण्डल के बुरे प्रशासन के लिए किसी एक दल को जिम्मेवार नहीं ठहराया जा सकता।

6. प्रधानमन्त्री की शक्तिशाली स्थिति-प्रधानमन्त्री को संसद् में स्पष्ट बहुमत का समर्थन प्राप्त होता है, जिसके कारण वह दृढ़ता से शासन कर सकता है। इंग्लैण्ड में द्वि-दलीय प्रणाली के कारण ही प्रधानमन्त्री बहुत शक्तिशाली है।

7. संगठित विरोधी दल-द्वि-दलीय प्रणाली में संगठित विरोधी दल होता है जो सरकार की रचनात्मक आलोचना करके सरकार को निरंकुश बनने से रोकता है। सत्तारूढ़ दल को विरोधी दल की आलोचना को ध्यान से सुनना पढ़ता है और कई बार सत्तारूढ़ दल को विरोधी दल के सुझाव को मानना पड़ता है।

8. सरकार आसानी से बदली जा सकती है-सत्तारूढ़ दल के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव पास करके उसे हटाया जा सकता है और विरोधी दल को सरकार बनाने का अवसर प्राप्त हो जाता है। इस प्रकार सरकार बदलने में कोई कठिनाई नहीं होती।

9. राजनीतिक एकरूपता-द्वि-दलीय प्रणाली में मन्त्रिमण्डल के सभी सदस्य एक ही दल से लिए जाते हैं जिस कारण मन्त्रियों के राजनीतिक विचारों में एकरूपता पाई जाती है।

10. संसदीय सरकार के लिए लाभदायक-द्वि-दलीय प्रणाली संसदीय सरकार को सफल बनाने में सहायक सिद्ध होती है क्योंकि संसदीय सरकार दलों पर आधारित होती है। जहां पर दो दल पाए जाते हैं वहां पर स्पष्ट होता है कि किस दल को संसद् में बहुमत प्राप्त है। अत: इस बात पर विवाद पैदा नहीं होता कि किस दल को सरकार बनाने के लिए आमन्त्रित किया जाए।

द्वि-दलीय प्रणाली के दोष (DEMERITS OF BI-PARTY SYSTEM)
द्वि-दलीय प्रणाली में निम्नलिखित दोष पाए जाते हैं-

1. मन्त्रिमण्डल की तानाशाही-दलीय मन्त्रिमण्डल की तानाशाही स्थापित हो जाती है। मन्त्रिमण्डल को विधानमण्डल में बहुमत का समर्थन प्राप्त होने के कारण मन्त्रिमण्डल जो चाहे कर सकता है। विरोधी दल की आलोचना का मन्त्रिमण्डल पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता। विरोधी दल सरकार की कितनी ही आलोचना क्यों न कर ले पर जब वोटें ली जाती हैं तब बहुमत सरकार के समर्थन में ही होता है। इंग्लैण्ड में आजकल मन्त्रिमण्डल की तानाशाही स्थापित हो चुकी है।

2. विधानमण्डल के महत्त्व की कमी-मन्त्रिमण्डल को विधानमण्डल में बहुमत प्राप्त होने के कारण कोई भी बिल पास करवाना कठिन नहीं होता। विधानमण्डल मन्त्रिमण्डल की इच्छाओं को रजिस्टर करने वाली एक संस्था बन जाती है।

3. मतदाताओं की सीमित स्वतन्त्रता-द्वि-दलीय प्रणाली में मतदाताओं की इच्छा सीमित हो जाती है। मतदाताओं को दो दलों के कार्यक्रमों में से एक को पसन्द करना पड़ता है। परन्तु कई मतदाता दोनों में से किसी को भी पसन्द नहीं करते पर उनके सामने कोई और विकल्प (Alternative) नहीं होता।

4. सभी हितों को प्रतिनिधित्व नहीं मिलता-समाज में विभिन्न वर्गों के लोग रहते हैं जिनके हित तथा विचार भी भिन्न-भिन्न हैं। द्वि-दलीय प्रणाली के कारण इन वर्गों को प्रतिनिधित्व नहीं मिलता।

5. राष्ट्र दो विरोधी गुटों में बंट जाता है-द्वि-दलीय प्रणाली से राष्ट्र दो विरोधी गुटों में बंट जाता है जो एक-दूसरे से ईर्ष्या करते हैं। दोनों गुटों का एक नीति पर सहमत होना कठिन होता है जिससे राष्ट्रीय एकता को खतरा हो जाता है।

6. कानून दलीय हितों को समक्ष रख कर बनाए जाते हैं-सत्तारूढ़ दल सदैव अपने दलीय हितों को समक्ष रखते हुए नीति का निर्माण करता है और कानून बनाता है। इससे राष्ट्रीय हितों को हानि पहुंचती है।

निष्कर्ष (Conclusion)-द्वि-दलीय प्रणाली के अनेक दोषों के बावजूद भी इसे अच्छा समझा जाता है। संसदीय सरकार की सफलता के लिए द्वि-दलीय प्रणाली का होना आवश्यक है। इंग्लैण्ड और अमेरिका में प्रजातन्त्र की सफलता का कारण द्वि-दलीय प्रणाली ही है।

बहु-दलीय प्रणाली में दो से अधिक दलों का राजनीतिक क्षेत्र में भाग होता है। प्रायः इन दलों में से कोई दल इतना अधिक शक्तिशाली नहीं होता कि वह बिना किसी दल की सहायता के सरकार बनाने में समक्ष हो। भारत, फ्रांस, इटली, जापान, जर्मनी आदि देशों में बहु-दलीय प्रणाली प्रचलित है।

बहु-दलीय प्रणाली के गुण (MERITS OF MULTI-PARTY SYSTEM)
बहु-दलीय प्रणाली में निम्नलिखित गुण पाए जाते हैं-

1. विभिन्न मतों का प्रतिनिधित्व-बहु-दलीय प्रणाली से सभी वर्गों तथा हितों को प्रतिनिधित्व मिल जाता है। इस प्रणाली से सच्चे लोकतन्त्र की स्थापना होती है।
2. मतदाताओं को अधिक स्वतन्त्रता-अधिक दलों के कारण मतदाताओं को अपनी वोट का प्रयोग करने के लिए अधिक स्वतन्त्रता होती है। मतदाताओं के लिए अपने विचारों से मिलते-जुलते दल को वोट देना आसान हो जाता है।
3. राष्ट्र दो गुटों में नहीं बंटता-बहु-दलीय प्रणाली का महत्त्वपूर्ण गुण यह है कि इससे राष्ट्र दो गुटों में नहीं बंटता। जहां बहु-दलीय प्रणाली होती है वहां अनेक प्रकार के विचार प्रचलित होते हैं और दलों में कठोर अनुशासन नहीं होता यदि कोई सदस्य अपने दल को छोड़ दे या उसे निकाल दिया जाए तो वह अपने विचारों से मिलता-जुलता दल ढूंढ़ लेता है।
4. मन्त्रिमण्डल की तानाशाही स्थापित नहीं होती-बहु-दलीय प्रणाली में अनेक दल मिलकर मन्त्रिमण्डल का निर्माण करते हैं जिस कारण मन्त्रिमण्डल तानाशाह नहीं बन सकता। मन्त्रिमण्डल में शामिल होने वाले दल एक-दूसरे से विचार-विमर्श करके तथा समझौते की नीति अपना कर कार्य करते हैं।
5. सरकार बिना चुनाव के बदली जा सकती है-बहु-दलीय प्रणाली में चुनाव से पहले भी सरकार को बड़ी आसानी से बदला जा सकता है। यदि एक दल भी मन्त्रिमण्डल से बाहर आ जाए तो सरकार हट जाती है और नई सरकार का निर्माण करना पड़ता है।
6. विधानमण्डल मन्त्रिमण्डल के हाथों में कठपुतली नहीं बनता-बहु-दलीय प्रणाली में मन्त्रिमण्डल का निर्माण कई दल मिलकर करते हैं। जिस कारण मन्त्रिमण्डल को अपने अस्तित्व के लिए एक दल पर निर्भर न रहकर विधानमण्डल पर निर्भर रहना पड़ता है।

बहु-दलीय प्रणाली के दोष (DEMERITS OF MULTI-PARTY SYSTEM)
बहु-दलीय प्रणाली में निम्नलिखित दोष पाए जाते हैं-

1. निर्बल तथा अस्थायी सरकार-विभिन्न दल मिल कर मन्त्रिमण्डल का निर्माण करते हैं जो किसी भी समय टूट सकता है। मिली-जुली सरकार शासन की नीतियों को दृढ़ता से लागू नहीं कर सकती।

2. दीर्घकालीन आयोजन असम्भव-सरकार अस्थायी होने के कारण लम्बी योजनाएं नहीं बनाई जाती क्योंकि सरकार का पता नहीं होता कि यह कितने दिन चलेगी।

3. सरकार के बनाने में कठिनाई-बहु-दलीय प्रणाली में किसी दल को बहुमत प्राप्त न होने के कारण सरकार का बनाना कठिन हो जाता है। मन्त्रिमण्डल को बनाने के लिए विभिन्न दलों में कई प्रकार की सौदेबाज़ी होती है। कई सदस्य मन्त्री बनने के लिए दल भी बदल जाते हैं, इसमें दल बदली को बढ़ावा मिलता है।

4. संगठित विरोधी दल का अभाव-बहु-दलीय प्रणाली में संगठित विरोधी दल का अभाव होता है जिस कारण सरकार की नीतियों की प्रभावशाली आलोचना नहीं हो पाती। अत: सरकार के लिए मनमानी करना तथा विरोधी दल की अपेक्षा करना सम्भव हो जाता है।

5. प्रधानमन्त्री की कमज़ोर स्थिति-मिली-जुली सरकार में प्रधानमन्त्री की स्थिति कमज़ोर होती है। प्रधानमन्त्री को उन दलों को साथ लेकर चलना पड़ता है। जो मन्त्रिमण्डल में शामिल होते हैं। प्रधानमन्त्री के लिए सभी दलों को प्रसन्न करना कठिन होता है। इस प्रकार प्रधानमन्त्री विभिन्न दलों की दया पर निर्भर रहता है।

6. उत्तरदायित्व निश्चित नहीं-बहु-दलीय प्रणाली में मिली-जुली सरकार होने के कारण बुरे प्रशासन के लिए किसी दल को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।

7. शासन में अदक्षता-मन्त्रिमण्डल के सदस्यों में सहयोग न होने के कारण शासन दक्षतापूर्ण नहीं चलाया जा सकता। इसके अतिरिक्त सरकार अस्थायी होने के कारण कर्मचारी शासन को ठीक तरह से नहीं चलाते और न ही शासन में दिलचस्पी लेते हैं।

8. जनता प्रत्यक्ष रूप से सरकार नहीं चुनती-बहु-दलीय प्रणाली में सरकार के निर्माण में जनता का प्रत्यक्ष हाथ नहीं होता। मतदान के समय जनता को यह पता नहीं होता कि किस दल का मन्त्रिमण्डल बनेगा। मिश्रित मन्त्रिमण्डल में न जाने कौन-कौन से दलों का समझौता हो और किसकी सरकार बने ?

9. नौकरशाही के प्रभाव में वृद्धि-इस प्रणाली के अन्तर्गत सरकार की अस्थिरता तथा मन्त्रियों के नियन्त्रण बदलने के कारण शासन का संचालन वास्तविक रूप में सरकारी अधिकारियों के द्वारा किया जाता है। इससे नौकरशाही के प्रभाव मे वृद्धि होती है और मन्त्रियों का प्रभाव कम हो जाता है। शासन की बागडोर अधिकारी वर्ग के हाथ में होने के कारण शासन में नौकरशाही के सभी अवगुण उत्पन्न हो जाते हैं।

10. भ्रष्टाचार में वृद्धि-बहु-दलीय प्रणाली में कई प्रकार के भ्रष्टाचारों की वृद्धि होती है। बहु-दलीय प्रणाली में सरकार को बनाए रखने के लिए विधायकों को कई प्रकार के लालच देकर साथ रखने का प्रयास किया जाता है। विभिन्न दलों का समर्थन प्राप्त करने के लिए सरकार उन्हें अनेक प्रकार का लालच देती है।

11. राजनीतिक एकरूपता का अभाव-बहु-दलीय प्रणाली में मन्त्रिमण्डल प्रायः विभिन्न दलों द्वारा मिलकर बनाया जाता है। इसलिए मन्त्रिमण्डल के सदस्यों में राजनीतिक एकरूपता नहीं पाई जाती। मन्त्रिमण्डल के सदस्य विभिन्न विचारधाराओं के होने के कारण कई बार एक दूसरे की भी आलोचना कर देते हैं।

प्रश्न 4. एक पार्टी प्रणाली से क्या भाव है ? इसके गुणों और अवगुणों की चर्चा कीजिए। (What is meant by one Party System ? Discuss its merits and demerits.)
अथवा
एक दलीय प्रणाली के गुण और अवगुण की व्याख्या करो। (Explain the merits and demerits of Single Party System.)
उत्तर-यदि किसी राज्य में केवल एक ही राजनीतिक दल राजनीति में भाग ले रहा हो और अन्य राजनीतिक दलों को संगठित होने का कार्य करने की स्वतन्त्रता एवं अधिकार प्राप्त न हो तो ऐसी दल-प्रणाली को एक दलीय प्रणाली कहा जाता है। अधिनायकतन्त्र देशों में प्रायः एक दल प्रणाली प्रचलित होती है। 1917 की क्रान्ति के बाद रूस में एक दल प्रणाली स्थापित की गई। सोवियत संघ में साम्यवादी दल के अतिरिक्त और किसी दल की स्थापना नहीं की जा सकती थी। प्रथम महायुद्ध के पश्चात् इटली और जर्मनी में एक-दलीय प्रणाली स्थापित की गई। इटली में फासिस्ट पार्टी के अतिरिक्त अन्य कोई पार्टी स्थापित नहीं की गई। जर्मनी में केवल नाज़ी पार्टी थी। 1991 में सोवियत संघ, रूमानिया, पोलैण्ड आदि देशों में एक दलीय शासन समाप्त हो गया। आजकल चीन, वियतनाम, क्यूबा, उत्तरी कोरिया आदि देशों में एक दलीय प्रणाली (साम्यवादी) पाई जाती है।

एक दलीय प्रणाली के गुण (MERITS OF ONE PARTY SYSTEM) –

एक दलीय प्रणाली में निम्नलिखित गुण पाए जाते हैं-

1. राष्ट्रीय एकता-एक दलीय प्रणाली में राष्ट्रीय एकता बनी रहती है क्योंकि विभिन्न दलों में संघर्ष नहीं होता। सभी नागरिक एक ही विचारधारा में विश्वास रखते हैं और एक ही नेता के नेतृत्व में कार्य करते हैं जिससे राष्ट्रीय एकता की भावना उत्पन्न होती है।
2. स्थायी सरकार-एक दलीय प्रणाली के कारण सरकार स्थायी होती है। मन्त्रिमण्डल के सदस्य एक ही दल से होते हैं और विधानसभा के सभी सदस्य सरकार का समर्थन करते हैं।
3. दृढ़ शासन-एक दलीय प्रणाली में शासन दृढ़ होता है। किसी दूसरे दल के न होने के कारण सरकार की आलोचना नहीं होती। इस शासन से देश की उन्नति होती है।
4. दीर्घकालीन योजनाएं सम्भव-एक दलीय प्रणाली में सरकार स्थायी होने के कारण दीर्घकालीन योजनाएं बनानी सम्भव होती हैं जिससे देश की आर्थिक उन्नति बहुत होती है।
5. शासन में दक्षता-सरकार के सदस्यों में पारस्परिक विरोध न होने के कारण शासन प्रणाली के निर्णय शीघ्रता से लिए जाते हैं जिससे शासन में दक्षता आती है।
6. राष्ट्रीय उन्नति–राजनीतिक दलों के पारस्परिक झगड़े, आलोचना और सत्ता के लिए खींचातानी में समय नष्ट नहीं होता और जो भी योजना बन जाती है उसको ज़ोरों से लागू किया जाता है, जिससे देश की उन्नति तेज़ी से होती है।

एक दलीय प्रणाली के दोष (DEMERITS OF ONE PARTY SYSTEM)

एक दलीय प्रणाली में निम्नलिखित दोष पाए जाते हैं-

1. लोकतन्त्र के विरुद्ध-यह प्रणाली लोकतन्त्र के अनुकूल नहीं है। इसमें नागरिकों को अपने विचार व्यक्त करने की स्वतन्त्रता नहीं होती और न ही उन्हें संगठन बनाने की स्वतन्त्रता होती है।
2. नाममात्र के चुनाव-एक दलीय प्रणाली में चुनाव केवल दिखावे के लिए होते हैं। नागरिकों को अपने प्रतिनिधि चुनने की स्वतन्त्रता नहीं होती। ___3. तानाशाही की स्थापना-एक दलीय प्रणाली में तानाशाही का बोलबाला रहता है। विरोधियों को सख्ती से दबाया जाता है अथवा उन्हें समाप्त कर दिया जाता है।
4. सरकार उत्तरदायी नहीं रहती-सरकार की आलोचना और विरोध करने वाला कोई और दल नहीं होता जिसके कारण सरकार उत्तरदायी नहीं रहती।
5. व्यक्तित्व का विकास नहीं होता-मनुष्यों को स्वतन्त्रता प्राप्त नहीं होती जिसके कारण वे अपने व्यक्तित्व का विकास नहीं कर पाते।
6. सभी हितों को प्रतिनिधित्व नहीं मिलता-एक दलीय प्रणाली के कारण सभी वर्गों को मन्त्रिमण्डल में प्रतिनिधित्व नहीं मिलता। सभी नागरिकों के विचारों का सही प्रतिनिधित्व एक दलीय प्रणाली में नहीं हो सकता।
7. लोगों को राजनीतिक शिक्षा नहीं मिलती-विरोधी दलों के अभाव के कारण चुनाव के दिनों में भी कोई विशेष हलचल नहीं होती। एक दल होने के कारण यह सदा सरकार की अच्छाइयों का प्रचार करता है। जनता को सरकार की बुराइयों का पता नहीं चलता।
8. विरोधी दल का अभाव-एक दलीय प्रणाली में विरोधी दल का अभाव रहता है। सरकार को निरंकुश बनाने से रोकने के लिए तथा सरकार की गलत नीतियों की आलोचना करने के लिए विरोधी दल का होना अति आवश्यक है। बिना विरोधी दल के बिना लोकतन्त्र सम्भव नहीं है।
9. संवैधानिक साधनों से सरकार को बदलना कठिन कार्य है-एक दलीय प्रणाली का एक महत्त्वपूर्ण दोष ये हैं कि इसमें सरकार को संवैधानिक तथा शान्तिपूर्ण साधनों द्वारा बदला नहीं जा सकता। सरकार को केवल क्रान्तिकारी तरीकों से ही बदला जा सकता है।

प्रश्न 5. द्वि-दलीय प्रणाली किसे कहते हैं ? इसके गुणों और अवगुणों का वर्णन करें।
(What is Bi-Party System ? Discuss its merits and demerits.)
अथवा
द्वि-दलीय प्रणाली के गुण और अवगुण लिखो। (Write down the merits and demerits of Bi-party System.)
उत्तर-द्वि-दलीय प्रणाली के अन्तर्गत केवल दो मुख्य महत्त्वपूर्ण दल होते हैं। दो मुख्य दलों के अतिरिक्त और भी दल होते हैं, परन्तु उनका कोई महत्त्व नहीं होता। सत्ता मुख्य रूप में दो दलों में बदलती रहती है। इंग्लैण्ड और अमेरिका में द्वि-दलीय प्रणाली प्रचलित है। इंग्लैण्ड के मुख्य दलों के नाम हैं-अनुदार दल तथा श्रमिक दल। अमेरिका में दो महत्त्वपूर्ण दल हैं-रिपब्लिकन पार्टी तथा डैमोक्रेटिक दल।

द्वि-दलीय प्रणाली के गुण (MERITS OF BI-PARTY SYSTEM)
द्वि-दलीय प्रणाली में निम्नलिखित गुण पाए जाते हैं-

1. सरकार आसानी से बनाई जा सकती है-द्वि-दलीय प्रणाली का सबसे बड़ा गुण यह है कि इसमें सरकार आसानी से बनाई जा सकती है। दोनों दलों में एक दल का विधानमण्डल में बहुमत होता है। बहुमत दल अपना मन्त्रिमण्डल बनाता है और दूसरा दल विरोधी दल बन जाता है। जिस समय सत्तारूढ़ दल चुनाव में हार जाता है अथवा विधानमण्डल में बहुमत का विश्वास खो देता है तब विरोधी दल को सरकार बनाने का अवसर मिलता है।

2. स्थिर सरकार-बहुमत दल की सरकार बनती है और दूसरा दल विरोधी दल बन जाता है। मन्त्रिमण्डल तब तक अपने पद पर रहता है जब तक उसे विधानमण्डल में बहुमत प्राप्त रहता है। दल में कड़ा अनुशासन पाया जाता है जिसके कारण मन्त्रिमण्डल के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव पास करके मन्त्रिमण्डल को हटाया नहीं जा सकता। इस तरह सरकार अगले चुनाव तक अपने पद पर रहती है।

3. दृढ़ सरकार तथा नीति में निरन्तरता-सरकार स्थिर होने के कारण शासन में दृढ़ता आती है। सरकार अपनी नीतियों को दृढ़ता से लागू करती है। सरकार स्थायी होने के कारण लम्बी योजनाएं बनाई जा सकती हैं और इससे नीति में भी निरन्तरता बनी रहती है।

4. जनता स्वयं सरकार चुनती है-द्वि-दलीय प्रणाली में जनता स्वयं प्रत्यक्ष रूप से सरकार का चुनाव करती है। दोनों दलों के कार्यक्रम और दोनों दलों के नेताओं को जनता अच्छी तरह जानती है। अतः जनता जिस दल को शक्ति सौंपना चाहती है उस दल के पक्ष में निर्णय दे दिया जाता है। जनता दो दलों में से जिस दल को सत्तारूढ़ दल बनाना चाहे बना सकती है।

5. निश्चित उत्तरदायित्व-द्वि-दलीय प्रणाली में बहुमत दल की सरकार होती है जिससे सरकार की बुराइयों के लिए सत्तारूढ़ को जिम्मेवार ठहराया जा सकता है। परन्तु जब मन्त्रिमण्डल में विभिन्न दलों के सदस्य होते हैं तब मन्त्रिमण्डल के बुरे प्रशासन के लिए किसी एक दल को जिम्मेवार नहीं ठहराया जा सकता।

6. प्रधानमन्त्री की शक्तिशाली स्थिति-प्रधानमन्त्री को संसद् में स्पष्ट बहुमत का समर्थन प्राप्त होता है, जिसके कारण वह दृढ़ता से शासन कर सकता है। इंग्लैण्ड में द्वि-दलीय प्रणाली के कारण ही प्रधानमन्त्री बहुत शक्तिशाली है।

7. संगठित विरोधी दल-द्वि-दलीय प्रणाली में संगठित विरोधी दल होता है जो सरकार की रचनात्मक आलोचना करके सरकार को निरंकुश बनने से रोकता है। सत्तारूढ़ दल को विरोधी दल की आलोचना को ध्यान से सुनना पढ़ता है और कई बार सत्तारूढ़ दल को विरोधी दल के सुझाव को मानना पड़ता है।

8. सरकार आसानी से बदली जा सकती है-सत्तारूढ़ दल के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव पास करके उसे हटाया जा सकता है और विरोधी दल को सरकार बनाने का अवसर प्राप्त हो जाता है। इस प्रकार सरकार बदलने में कोई कठिनाई नहीं होती।

9. राजनीतिक एकरूपता-द्वि-दलीय प्रणाली में मन्त्रिमण्डल के सभी सदस्य एक ही दल से लिए जाते हैं जिस कारण मन्त्रियों के राजनीतिक विचारों में एकरूपता पाई जाती है।

10. संसदीय सरकार के लिए लाभदायक-द्वि-दलीय प्रणाली संसदीय सरकार को सफल बनाने में सहायक सिद्ध होती है क्योंकि संसदीय सरकार दलों पर आधारित होती है। जहां पर दो दल पाए जाते हैं वहां पर स्पष्ट होता है कि किस दल को संसद् में बहुमत प्राप्त है। अत: इस बात पर विवाद पैदा नहीं होता कि किस दल को सरकार बनाने के लिए आमन्त्रित किया जाए।

द्वि-दलीय प्रणाली के दोष (DEMERITS OF BI-PARTY SYSTEM)
द्वि-दलीय प्रणाली में निम्नलिखित दोष पाए जाते हैं-

1. मन्त्रिमण्डल की तानाशाही-दलीय मन्त्रिमण्डल की तानाशाही स्थापित हो जाती है। मन्त्रिमण्डल को विधानमण्डल में बहुमत का समर्थन प्राप्त होने के कारण मन्त्रिमण्डल जो चाहे कर सकता है। विरोधी दल की आलोचना का मन्त्रिमण्डल पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता। विरोधी दल सरकार की कितनी ही आलोचना क्यों न कर ले पर जब वोटें ली जाती हैं तब बहुमत सरकार के समर्थन में ही होता है। इंग्लैण्ड में आजकल मन्त्रिमण्डल की तानाशाही स्थापित हो चुकी है।

2. विधानमण्डल के महत्त्व की कमी-मन्त्रिमण्डल को विधानमण्डल में बहुमत प्राप्त होने के कारण कोई भी बिल पास करवाना कठिन नहीं होता। विधानमण्डल मन्त्रिमण्डल की इच्छाओं को रजिस्टर करने वाली एक संस्था बन जाती है।

3. मतदाताओं की सीमित स्वतन्त्रता-द्वि-दलीय प्रणाली में मतदाताओं की इच्छा सीमित हो जाती है। मतदाताओं को दो दलों के कार्यक्रमों में से एक को पसन्द करना पड़ता है। परन्तु कई मतदाता दोनों में से किसी को भी पसन्द नहीं करते पर उनके सामने कोई और विकल्प (Alternative) नहीं होता।

4. सभी हितों को प्रतिनिधित्व नहीं मिलता-समाज में विभिन्न वर्गों के लोग रहते हैं जिनके हित तथा विचार भी भिन्न-भिन्न हैं। द्वि-दलीय प्रणाली के कारण इन वर्गों को प्रतिनिधित्व नहीं मिलता।

5. राष्ट्र दो विरोधी गुटों में बंट जाता है-द्वि-दलीय प्रणाली से राष्ट्र दो विरोधी गुटों में बंट जाता है जो एक-दूसरे से ईर्ष्या करते हैं। दोनों गुटों का एक नीति पर सहमत होना कठिन होता है जिससे राष्ट्रीय एकता को खतरा हो जाता है।

6. कानून दलीय हितों को समक्ष रख कर बनाए जाते हैं-सत्तारूढ़ दल सदैव अपने दलीय हितों को समक्ष रखते हुए नीति का निर्माण करता है और कानून बनाता है। इससे राष्ट्रीय हितों को हानि पहुंचती है।

निष्कर्ष (Conclusion)-द्वि-दलीय प्रणाली के अनेक दोषों के बावजूद भी इसे अच्छा समझा जाता है। संसदीय सरकार की सफलता के लिए द्वि-दलीय प्रणाली का होना आवश्यक है। इंग्लैण्ड और अमेरिका में प्रजातन्त्र की सफलता का कारण द्वि-दलीय प्रणाली ही है।

प्रश्न 6. बहु-दलीय प्रणाली के गुण और अवगुण का वर्णन करो। (Write down the merits and demerits of Multi-Party System.)
अथवा
बहु-दलीय प्रणाली के गुणों और दोषों की व्याख्या करें। (Discuss the merits and demerits of Multi-Party System.)
उत्तर-बहु-दलीय प्रणाली में दो से अधिक दलों का राजनीतिक क्षेत्र में भाग होता है। प्रायः इन दलों में से कोई दल इतना अधिक शक्तिशाली नहीं होता कि वह बिना किसी दल की सहायता के सरकार बनाने में समक्ष हो। भारत, फ्रांस, इटली, जापान, जर्मनी आदि देशों में बहु-दलीय प्रणाली प्रचलित है।

बहु-दलीय प्रणाली के गुण (MERITS OF MULTI-PARTY SYSTEM)
बहु-दलीय प्रणाली में निम्नलिखित गुण पाए जाते हैं-

  • विभिन्न मतों का प्रतिनिधित्व-बहु-दलीय प्रणाली से सभी वर्गों तथा हितों को प्रतिनिधित्व मिल जाता है। इस प्रणाली से सच्चे लोकतन्त्र की स्थापना होती है।
  • मतदाताओं को अधिक स्वतन्त्रता-अधिक दलों के कारण मतदाताओं को अपनी वोट का प्रयोग करने के लिए अधिक स्वतन्त्रता होती है। मतदाताओं के लिए अपने विचारों से मिलते-जुलते दल को वोट देना आसान हो जाता है।
  • राष्ट्र दो गुटों में नहीं बंटता-बहु-दलीय प्रणाली का महत्त्वपूर्ण गुण यह है कि इससे राष्ट्र दो गुटों में नहीं बंटता। जहां बहु-दलीय प्रणाली होती है वहां अनेक प्रकार के विचार प्रचलित होते हैं और दलों में कठोर अनुशासन नहीं होता यदि कोई सदस्य अपने दल को छोड़ दे या उसे निकाल दिया जाए तो वह अपने विचारों से मिलता-जुलता दल ढूंढ़ लेता है।
  • मन्त्रिमण्डल की तानाशाही स्थापित नहीं होती-बहु-दलीय प्रणाली में अनेक दल मिलकर मन्त्रिमण्डल का निर्माण करते हैं जिस कारण मन्त्रिमण्डल तानाशाह नहीं बन सकता। मन्त्रिमण्डल में शामिल होने वाले दल एक-दूसरे से विचार-विमर्श करके तथा समझौते की नीति अपना कर कार्य करते हैं।
  • सरकार बिना चुनाव के बदली जा सकती है-बहु-दलीय प्रणाली में चुनाव से पहले भी सरकार को बड़ी आसानी से बदला जा सकता है। यदि एक दल भी मन्त्रिमण्डल से बाहर आ जाए तो सरकार हट जाती है और नई सरकार का निर्माण करना पड़ता है।
  • विधानमण्डल मन्त्रिमण्डल के हाथों में कठपुतली नहीं बनता-बहु-दलीय प्रणाली में मन्त्रिमण्डल का निर्माण कई दल मिलकर करते हैं। जिस कारण मन्त्रिमण्डल को अपने अस्तित्व के लिए एक दल पर निर्भर न रहकर विधानमण्डल पर निर्भर रहना पड़ता है।

बहु-दलीय प्रणाली के दोष (DEMERITS OF MULTI-PARTY SYSTEM)
बहु-दलीय प्रणाली में निम्नलिखित दोष पाए जाते हैं-

1. निर्बल तथा अस्थायी सरकार-विभिन्न दल मिल कर मन्त्रिमण्डल का निर्माण करते हैं जो किसी भी समय टूट सकता है। मिली-जुली सरकार शासन की नीतियों को दृढ़ता से लागू नहीं कर सकती।

2. दीर्घकालीन आयोजन असम्भव-सरकार अस्थायी होने के कारण लम्बी योजनाएं नहीं बनाई जाती क्योंकि सरकार का पता नहीं होता कि यह कितने दिन चलेगी।

3. सरकार के बनाने में कठिनाई-बहु-दलीय प्रणाली में किसी दल को बहुमत प्राप्त न होने के कारण सरकार का बनाना कठिन हो जाता है। मन्त्रिमण्डल को बनाने के लिए विभिन्न दलों में कई प्रकार की सौदेबाज़ी होती है। कई सदस्य मन्त्री बनने के लिए दल भी बदल जाते हैं, इसमें दल बदली को बढ़ावा मिलता है।

4. संगठित विरोधी दल का अभाव-बहु-दलीय प्रणाली में संगठित विरोधी दल का अभाव होता है जिस कारण सरकार की नीतियों की प्रभावशाली आलोचना नहीं हो पाती। अत: सरकार के लिए मनमानी करना तथा विरोधी दल की अपेक्षा करना सम्भव हो जाता है।

5. प्रधानमन्त्री की कमज़ोर स्थिति-मिली-जुली सरकार में प्रधानमन्त्री की स्थिति कमज़ोर होती है। प्रधानमन्त्री को उन दलों को साथ लेकर चलना पड़ता है। जो मन्त्रिमण्डल में शामिल होते हैं। प्रधानमन्त्री के लिए सभी दलों को प्रसन्न करना कठिन होता है। इस प्रकार प्रधानमन्त्री विभिन्न दलों की दया पर निर्भर रहता है।

6. उत्तरदायित्व निश्चित नहीं-बहु-दलीय प्रणाली में मिली-जुली सरकार होने के कारण बुरे प्रशासन के लिए किसी दल को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।

7. शासन में अदक्षता-मन्त्रिमण्डल के सदस्यों में सहयोग न होने के कारण शासन दक्षतापूर्ण नहीं चलाया जा सकता। इसके अतिरिक्त सरकार अस्थायी होने के कारण कर्मचारी शासन को ठीक तरह से नहीं चलाते और न ही शासन में दिलचस्पी लेते हैं।

8. जनता प्रत्यक्ष रूप से सरकार नहीं चुनती-बहु-दलीय प्रणाली में सरकार के निर्माण में जनता का प्रत्यक्ष हाथ नहीं होता। मतदान के समय जनता को यह पता नहीं होता कि किस दल का मन्त्रिमण्डल बनेगा। मिश्रित मन्त्रिमण्डल में न जाने कौन-कौन से दलों का समझौता हो और किसकी सरकार बने ?

9. नौकरशाही के प्रभाव में वृद्धि-इस प्रणाली के अन्तर्गत सरकार की अस्थिरता तथा मन्त्रियों के नियन्त्रण बदलने के कारण शासन का संचालन वास्तविक रूप में सरकारी अधिकारियों के द्वारा किया जाता है। इससे नौकरशाही के प्रभाव मे वृद्धि होती है और मन्त्रियों का प्रभाव कम हो जाता है। शासन की बागडोर अधिकारी वर्ग के हाथ में होने के कारण शासन में नौकरशाही के सभी अवगुण उत्पन्न हो जाते हैं।

10. भ्रष्टाचार में वृद्धि-बहु-दलीय प्रणाली में कई प्रकार के भ्रष्टाचारों की वृद्धि होती है। बहु-दलीय प्रणाली में सरकार को बनाए रखने के लिए विधायकों को कई प्रकार के लालच देकर साथ रखने का प्रयास किया जाता है। विभिन्न दलों का समर्थन प्राप्त करने के लिए सरकार उन्हें अनेक प्रकार का लालच देती है।

11. राजनीतिक एकरूपता का अभाव-बहु-दलीय प्रणाली में मन्त्रिमण्डल प्रायः विभिन्न दलों द्वारा मिलकर बनाया जाता है। इसलिए मन्त्रिमण्डल के सदस्यों में राजनीतिक एकरूपता नहीं पाई जाती। मन्त्रिमण्डल के सदस्य विभिन्न विचारधाराओं के होने के कारण कई बार एक दूसरे की भी आलोचना कर देते हैं।

प्रश्न 7. लोकतंत्र में विरोधी दल की भूमिका लिखें।
(Write down the role of Opposition Party in Democracy.)
अथवा
प्रजातन्त्रीय ढांचे में विपक्षी दलों की भूमिका की व्याख्या करें।
(Discuss the role of opposition parties in a democratic set up.)
अथवा
लोकतन्त्र में विरोधी दलों की भूमिका लिखें। (Explain the role of opposition Parties in Democracy.)
उत्तर-आज का युग दल प्रणाली का युग है। लोकतन्त्र के लिए राजनीतिक दल अनिवार्य है। शासन पर जिस दल का नियन्त्रण होता है उसे सत्तारूढ़ दल कहा जाता है और अन्य दलों को विरोधी दल कहा जाता है। इंगलैण्ड में दो मुख्य दल हैं-श्रमिक दल और अनुदार दल। आजकल इंग्लैण्ड में अनुदार दल की सरकार है और श्रमिक दल विरोधी दल है। अमेरिका में दो मुख्य दल हैं-रिपब्लिकन पार्टी तथा डेमोक्रेटिक पार्टी। चुनावों में सदा इन दोनों दलों का मुकाबला होता है। भारत में अनेक राष्ट्रीय स्तर के दल पाए जाते हैं। 1977 में जनता पार्टी की सरकार बनी और कांग्रेस को मान्यता प्राप्त विरोधी दल का दर्जा प्राप्त हुआ। 1980 के चुनाव में कांग्रेस (इ) सत्तारूढ़ हुई और अन्य दल विरोधी दल कहलाए। 1984 के चुनाव में कोई भी विरोधी दल मान्यता प्राप्त विरोधी दल नहीं था। 1989 के चुनाव में राष्ट्रीय मोर्चा की सरकार बनी और कांग्रेस (इ) को मान्यता प्राप्त विरोधी दल का दर्जा प्राप्त हुआ।

जून, 2004 में भारतीय जनता पार्टी को 14वीं लोकसभा में प्रमुख विरोधी दल की मान्यता प्रदान की गई। अप्रैल-मई, 2009 में हुए 15वीं लोकसभा के चुनावों के पश्चात् भी भारतीय जनता पार्टी को विरोधी दल के रूप में मान्यता प्रदान की गई। 2014 के 16वीं लोकसभा के चुनावों के पश्चात् किसी भी दल को मान्यता प्राप्त विरोधी दल का दर्जा नहीं दिया गया। लोकतन्त्र में विरोधी दल का बड़ा महत्त्व होता है। वास्तव में जिस प्रकार लोकतन्त्र के लिए दलों का होना आवश्यक है, उसी तरह विरोधी दल का अस्तित्व भी प्रजातन्त्र के लिए आवश्यक समझा जाता है। इंग्लैण्ड में विरोधी दल का महत्त्व इतना अधिक है कि उसे रानी का विरोधी दल (Her Majestry’s Opposition) कहा जाता है। इसका अर्थ यह है कि इंग्लैण्ड में विरोधी दल को सरकार मान्यता प्राप्त है। लोकतन्त्र में विरोधी दल अनेक कार्य करता है और जिनमें महत्त्वपूर्ण निम्नलिखित हैं

1. आलोचना (Criticism)-विरोधी दल का मुख्य कार्य सरकार की नीतियों की आलोचना करना है। विरोधी दल यह आलोचना मन्त्रिमण्डल के सदस्यों से विभिन्न प्रश्न पूछ कर, वाद-विवाद तथा अविश्वास प्रस्ताव पेश करके करता है। जब सत्तारूढ़ दल संसद् में बजट पेश करता है, तब विरोधी दल की आलोचना अपनी चरम सीमा पर पहुंच जाती है। विरोधी दल सरकार से प्रत्येक तरह की जानकारी प्राप्त कर सकता है। विरोधी दल सरकार की आलोचना करके उस समुदाय को जागरूक कर देता है जिस पर सरकार की नीतियों का प्रभाव पड़ना होता है। इसके अतिरिक्त मतदाताओं को सरकार की कार्यकुशलता और नीतियों के सम्बन्ध में अपनी राय बनाने में सुविधा हो जाती है।

2. उत्तरदायी आलोचना (Responsible Criticism)—विरोधी दल के सदस्य केवल आलोचना करने के लिए ही आलोचना नहीं करते बल्कि सत्तारूढ़ दल को शासन अच्छे ढंग से चलाने के लिए भी सुझाव देते हैं और कई बार उन के सुझाव मान भी लिए जाते हैं। आवश्यकता पड़ने पर विरोधी दल सरकार को पूर्ण सहयोग भी देते हैं । सत्तारूढ़ दल भी कई बार संसद् के कार्य और राष्ट्रीय समस्याओं के बारे में विरोधी दल से सलाह-मशवरा करता है। विशेष कर संकटकालीन समय में जब देश की रक्षा का प्रश्न होता है, विरोधी दल सरकार को सहयोग देता है और सरकार भी प्रत्येक कार्य विरोधी दल को विश्वास में लेकर करती है।

3. अस्थिर मतदाता को अपील करना (Appeal to Floating Voters)-विरोधी दल संसद् में अविश्वास प्रस्ताव पेश करता है ताकि सत्तारूढ़ दल को अपने पद से हटा कर स्वयं सरकार बना सके। परन्तु द्वि-दलीय प्रणाली वाले देशों में अविश्वास प्रस्ताव पास होना आसान नहीं है।
भारत में अविश्वास प्रस्ताव पास होना बहु कठिन है। इसलिए विरोधी दल आम चुनावों में सत्तारूढ़ दल को हराने का प्रयत्न करता है। विरोधी दल सत्तारूढ़ दल की आलोचना करके मतदाताओं के सामने यह प्रमाणित करने का प्रयत्न करता है कि यदि उसे अवसर दिया जाए तो वह देश का शासन सत्तारूढ़ दल की अपेक्षा अच्छा चला सकता है। जैनिंग्स (Jennings) ने ठीक ही कहा है, “विरोधी दल अपने वोटों के आधार पर कभी यह आशा नहीं करता कि सत्तारूढ़ दल को अपने पद से हटा सकेगा। यह तो अस्थायी मतदाताओं (Floating Voters) को समझाने और प्रभावित करने का प्रयत्न करता है ताकि अगले आम चुनाव में उनकी सहायता से शासन पर अधिकार किया जा सके।”

4. शासन नीति को प्रभावित करना (To Influence the policy of the Administration)-विरोधी दल सरकार की नीतियों की आलोचना करके सरकार की नीतियों को प्रभावित करता है। सत्तारूढ़ दल बड़ा सोच-समझ करके अपनी नीतियों का संचालन करता है ताकि विरोधी दल को आलोचना का अवसर ही न मिले, परन्तु विरोधी दल इस ताक में रहता है कि किस तरह सरकार की आलोचना की जाए।

5. विरोधी दल सरकार को निरंकुश बनने से रोकता है (Opposition checks the despotism of the Government) विरोधी दल सरकार को सत्ता का दुरुपयोग करने से रोकता है। विरोधी दल सरकार की विधानमण्डल में तथा उसके बाहर आलोचना करके उसे अनुचित कार्य करने से रोकता है। विरोधी दल सरकार की त्रुटियों को प्रकाशित करके नागरिकों को यह बताने की चेष्टा करता है कि निर्वाचित प्रतिनिधियों को जो विश्वास सौंपा गया है उसका दुरुपयोग हो रहा है। विरोधी दल की उपस्थिति में सरकार मनमानी नहीं कर सकती।

6. जनता को राजनीतिक शिक्षा (Political Education to the People)-विरोधी दल जनता को राजनीतिक शिक्षा देता है। सरकार के सभी दोषों की जानकारी उसकी आलोचना द्वारा जनता तक पहुंचती है। जनता को सरकार के कार्यों पर सोचने और इसके बारे में कोई निर्णय करने का अवसर मिलता रहता है।

7. अधिकारों और स्वतन्त्रताओं की रक्षा (Protection of Rights and Freedoms)-लोकतान्त्रिक राज्यों में नागरिकों को कई प्रकार के अधिकार और स्वतन्त्रताएं प्राप्त होती हैं। विरोधी दल नागरिकों को उनके अधिकारों एवं स्वतन्त्रताओं का ज्ञान कराता है। यदि सरकार नागरिक के अधिकारों का उल्लंघन करती है तो विरोधी दल सरकार के विरुद्ध कदम आवाज़ उठाता है। विरोधी दल जनमत को जागृत एवं संगठित करके अधिकारों एवं स्वतन्त्रताओं की रक्षा करते हैं।

8. जनता की शिकायतों को प्रकट करना (Ventilation of the grievances of the People)-जनता को शासन से कई प्रकार की शिकायतें होती हैं। विरोधी दल जनता की शिकायतों को प्रकट करते हैं और सरकार तक पहुंचाते है। विरोधी दल जलसों द्वारा, समाचार-पत्रों द्वारा और विधानमण्डलों के अन्दर भाषण देकर जनता की शिकायतों को दूर करने के लिए दबाव डालते हैं।

9. विशेषज्ञों की समितियों की नियुक्ति (Appointment of Committees of Experts) कई बार देश के अन्दर कोई महत्त्वपूर्ण घटना घट जाती है या देश के सामने कोई महत्त्वपूर्ण समस्या खड़ी हो जाती है, उस समय विरोधी दल उस घटना या समस्या की जांच-पड़ताल के लिए विशेषज्ञों की समिति नियुक्त करता है। विशेषज्ञों की समिति की रिपोर्ट के आधार पर विरोधी दल अपनी नीति तय करते हैं और कई बार श्वेत-पत्र (White-Paper) भी प्रकाशित करते हैं।

10. लोकतन्त्र की सुरक्षा (To Safeguard Democracy)-विरोधी दल अपने उपर्युक्त कार्यों से लोकतन्त्र की सुरक्षा के महान् कार्य को बहुत हद तक सम्पादित करता है। वह जनता के कष्टों का वर्णन करके सरकार का ध्यान उनकी तरफ करता है ताकि कष्टों को दूर किया जा सके। विरोधी दल सरकार को बाध्य करता है ताकि वह अपनी नीतियों को कल्याणकारक रूप प्रदान करे।

11. सरकार के साथ सहयोग करना (Co-operation with the Govt.)-यद्यपि विरोधी दल सरकार की आलोचना तथा विरोध करते हैं, परन्तु कई बार राष्ट्रीय समस्याओं के हल के लिए सरकार को पूर्ण सहयोग व समर्थन देते हैं। राष्ट्रीय उद्देश्यों की पूर्ति के लिए सत्ताधारी दल भी विरोधी दलों से विचार-विमर्श करते रहते हैं और राष्ट्रीय समस्याओं पर राष्ट्रीय सहमति बनाने का प्रयास करते हैं।

12. वैकल्पिक सरकार प्रदान करना (To provide Alternative Govt.)—प्रजातन्त्र में विरोधी दल सदैव वैकल्पिक सरकार बनाने के लिए तैयार रहते हैं। विरोधी दल हमेशा इस ताक में रहते हैं, कि कब सत्ताधारी दल सत्ता छोड़े, तथा वे सत्ताहीन हों। सामान्यतः देखा गया है कि जब भी सत्तारूढ़ दल ने शासन छोड़ा है, तब विपक्षी दल को सरकार बनाने के लिए आमन्त्रित किया जाता है।

निष्कर्ष (Conclusion)-निःसन्देह लोकतन्त्र में विरोधी दल का बहुत महत्त्व है। विरोधी दल सरकार की आलोचना करके सरकार को मनमानी करने से रोकता है और नागरिकों के अधिकारों तथा स्वतन्त्रताओं की रक्षा करता है। हॉग क्विटन (Hogg Quintin) ने ठीक ही कहा, “संगठित विरोधी दल के अभाव और पूर्ण तानाशाही में कोई अधिक फासला नहीं है।” (It is not along step from the absence of an organised opposition to a complete dictatorship.”) भारत में अनेक विरोधी दल होने के बावजूद संगठित विरोधी दल का अभाव है।

लघु उत्तरीय प्रश्न-

प्रश्न 1. राजनीतिक पार्टी किसे कहते हैं ?
उत्तर-राजनीतिक दल ऐसे नागरिकों का समूह है जो सार्वजनिक मामलों पर एक-से विचार रखते हों और संगठित होकर अपने मताधिकार द्वारा सरकार पर अपना नियन्त्रण स्थापित करना चाहते हों ताकि अपने सिद्धान्तों को लागू कर सकें।

  • गिलक्राइस्ट के शब्दानुसार, “राजनीतिक दल ऐसे नागरिकों का संगठित समूह है जिनके राजनीतिक विचार एक से हों और एक राजनीतिक इकाई के रूप में कार्य करके सरकार पर नियन्त्रण रखने का प्रयत्न करते हों।”
  • मैकाइवर का कहना है कि, “राजनीतिक दल किसी सिद्धान्त या नीति के समर्थन के लिए संगठित वह समुदाय है जो संवैधानिक ढंग से उस सिद्धान्त या नीति को शासन के आधार पर बनाना चाहता है।”
  • गैटेल के अनुसार, “राजनीति दल उन नागरिकों का कम या अधिक संगठित समूह है जो एक राजनीतिक इकाई की तरह काम करते हों और अपने मतों के द्वारा सरकार पर नियन्त्रण करना तथा अपने सिद्धान्तों को लागू करना चाहते हों।”
    भारतीय जनता पार्टी तथा भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस महत्त्वपूर्ण राजनीतिक दल हैं।

प्रश्न 2. राजनीतिक दलों के कोई चार कार्यों का वर्णन करें।
अथवा
राजनीतिक दलों के कोई चार कार्य लिखो।
उत्तर-

  • सार्वजनिक नीतियों का निर्माण-राजनीतिक दल देश के सामने आने वाली समस्याओं पर विचार करते हैं तथा अपनी नीति निर्धारित करते हैं। राजनीतिक दल अन्तर्राष्ट्रीय समस्याओं पर भी सोच-विचार करते हैं और अपनी नीति बनाते हैं।
  • राजनीतिक शिक्षा-राजनीतिक दल देश की समस्याओं को सुलझाने के लिए अपनी नीतियों का निर्माण करते हैं और उन नीतियों का जनता में प्रचार करते हैं । इससे जनता को देश की समस्याओं की जानकारी होती है तथा विभिन्न दलों की नीतियों का पता चलता है।
  • चुनाव लड़ना-राजनीतिक दलों का मुख्य कार्य चुनाव लड़ना है। राजनीतिक दल अपने उम्मीदवार खड़े करते हैं और उनको चुनाव में विजयी कराने के लिए उनके पक्ष में प्रचार करते हैं।
  • सरकार बनाना-चुनाव में जिस दल को बहुमत प्राप्त होता है उसी दल की सरकार बनती है। सरकार की स्थापना करने के पश्चात् सत्तारूढ़ दल अपनी नीतियों तथा चुनाव के लिए किए गए वायदों को व्यावहारिक रूप देने का प्रयत्न करता है।

प्रश्न 3. राजनीतिक दल की कोई चार विशेषताएं लिखें।
उत्तर-

  • संगठन-राजनीतिक दल के निर्माण के लिए संगठन का होना आवश्यक है। जब तक एक से विचार रखने वाले सदस्य पूर्ण रूप से संगठित न हों तब तक राजनीतिक दल का निर्माण नहीं हो सकता।
  • मूल सिद्धान्तों पर सहमति-राजनीतिक दल के सदस्यों की मूल सिद्धान्तों पर सहमति होनी चाहिए। समान राजनीतिक विचार रखने वाले व्यक्ति ही राजनीतिक दल का निर्माण कर सकते हैं। सिद्धान्तों के विस्तार में थोड़ा-बहुत मतभेद हो सकता है परन्तु मूल सिद्धान्त पर कोई मतभेद नहीं होना चाहिए।
  • शासन पर नियन्त्रण की इच्छा-राजनीतिक दल का उद्देश्य शासन पर नियन्त्रण करना होता है। अपने इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए राजनीतिक दल जनमत का समर्थन प्राप्त करने के प्रयास करते हैं।
  • प्रत्येक राजनीतिक दल का एक निश्चित कार्यक्रम होता है।

प्रश्न 4. दल प्रणाली की भिन्न-भिन्न किस्में लिखिए।
उत्तर-सभी लोकतान्त्रिक देशों में राजनीतिक दल पाए जाते हैं और अधिनायकतन्त्रीय राज्यों में भी राजनीतिक दल मिलते हैं। दल प्रणाली कई प्रकार की होती है-एक दलीय प्रणाली, द्वि-दलीय प्रणाली तथा बहु-दलीय प्रणाली।

  • एक-दलीय प्रणाली-यदि किसी राज्य में केवल एक ही राजनीतिक दल राजनीति में भाग ले रहा हो और अन्य दल संगठित करने का अधिकार न हो तो ऐसी दल प्रणाली को एक-दलीय प्रणाली तथा बहु-दलीय प्रणाली कहते हैं।
  • द्वि-दलीय प्रणाली-द्वि-दलीय प्रणाली के अन्तर्गत केवल दो महत्त्वपूर्ण दल होते हैं। अन्य दलों का कोई विशेष महत्त्व नहीं होता। अमेरिका और इंग्लैण्ड में द्वि-दलीय प्रणाली पाई जाती है।
  • बहु-दलीय प्रणाली-बहु-दलीय प्रणाली में दो से अधिक राजनीतिक दल पाए जाते हैं। भारत, फ्रांस, इटली, स्विट्ज़रलैण्ड में बहु-दलीय प्रणाली पाई जाती है।

प्रश्न 5. बहु-दलीय प्रणाली के कोई चार गुण लिखो।
उत्तर-बहु-दलीय प्रणाली में निम्नलिखित गुण पाए जाते हैं-

  • विभिन्न मतों का प्रतिनिधित्व-बहु-दलीय प्रणाली में सभी वर्गों तथा हितों को प्रतिनिधित्व मिल जाता है। इस प्रणाली में सच्चे लोकतन्त्र की स्थापना होती है।
  • मतदाताओं को अधिक स्वतन्त्रता-अधिक दलों के कारण मतदाताओं को अपने मत का प्रयोग करने के लिए अधिक स्वतन्त्रता होती है। मतदाताओं के लिए अपने विचारों से मिलते-जुलते दल को वोट देना आसान हो जाता है।
  • राष्ट्र दो गुटों में नहीं बंटता-बहु-दलीय प्रणाली का महत्त्वपूर्ण गुण यह है कि इससे राष्ट्र दो गुटों में नहीं बंटता। जहां बहु-दलीय प्रणाली होती है वहां अनेक प्रकार के विचार प्रचलित होते हैं लेकिन दलों में कठोर अनुशासन नहीं होता है।
  • बहुदलीय प्रणाली में मन्त्रिमण्डल की तानाशाही स्थापित नहीं होती है।

प्रश्न 6. राजनीतिक दलों के कोई चार अवगुण लिखिए। .
उत्तर-यद्यपि दल-प्रणाली के गुण अत्यन्त प्रभावशाली हैं, परन्तु दूसरी ओर इसके दोष भी कम भयानक नहीं हैं। राजनीतिक दलों का उचित संगठन न हो तो अनेक दोष भी निकल सकते हैं। इसके मुख्य दोष निम्नलिखित हैं-

  • राष्ट्रीय एकता को खतरा-राजनीतिक दलों के कारण राष्ट्रीय एकता को सदैव खतरा बना रहता है। दलों के द्वारा देश में गुटबन्दी की भावना उत्पन्न होती है जिसके द्वारा सारा देश उतने विभागों में बंट जाता है जितने कि राजनीतिक दल होते हैं।
  • राजनीतिक दल भ्रष्टाचार फैलाते हैं-चुनाव के दिनों में दल चुनाव जीतने के लिए जनता को कई प्रकार का प्रलोभन देते हैं। चुनाव जीतने के पश्चात् सत्तारूढ़ दल उन लोगों को अनुचित लाभ पहुंचाता है जिन्होंने चुनाव के समय उसकी पूरी मदद की होती है।
  • राजनीतिक दल नैतिक स्तर को गिराते हैं-राजनीतिक दल अपनी नीतियों का प्रसार करने के लिए तथा दूसरे दलों को नीचा दिखाने के लिए झूठा प्रचार करते हैं। विशेषकर चुनाव के दिनों में एक दल दूसरे दलों पर इतना कीचड़ उछालते हैं कि नैतिक स्तर बहुत गिर जाता है।
  • साम्प्रदायिक भावना को बढ़ाना-राजनीतिक दल अपने लाभ के लिए देश में साम्प्रदायिक भावना को बढ़ावा देते हैं।

प्रश्न 7. राजनीतिक दलों के कोई चार गुणं लिखो।
उत्तर-राजनीतिक दलों में निम्नलिखित गुण पाए जाते हैं-

  • राजनीतिक दल मानवीय प्रकृति के अनुसार हैं-मनुष्य की प्रकृति में विभिन्नता दलों द्वारा प्रकट होना अनिवार्य है। कुछ लोग उदार विचारों के होते हैं और कुछ अनुदार विचारों के होते हैं।
  • राजनीतिक दल लोकतन्त्र के लिए आवश्यक हैं-राजनीतिक दलों के बिना लोकतन्त्र की सफलता सम्भव नहीं है।
  • दृढ़ सरकार की स्थापना में सहायक-जिस दल को भी चुनाव में बहुमत प्राप्त है, उस दल की सरकार बनती है ! ऐसे दल को यह विश्वास होता है कि जनता का बहुमत उसके साथ है और वे दल की नीतियों का समर्थन करते हैं।
  • राजनीतिक दल लोगों को राजनीतिक शिक्षा प्रदान करते हैं।

प्रश्न 8. बहु-दलीय प्रणाली के कोई चार दोष लिखो।
अथवा
बहु-दलीय प्रणाली के कोई तीन दोष लिखो।
उत्तर- बहु-दलीय प्रणाली में निम्नलिखित दोष पाए जाते हैं-

  • निर्बल तथा अस्थायी सरकार-विभिन्न दल मिलकर मन्त्रिमण्डल का निर्माण करते हैं जो किसी भी समय टूट सकता है। मिली-जुली सरकार शासन की नीतियों को दृढ़ता से लागू नहीं कर सकती।
  • दीर्घकालीन आयोजन असम्भव-सरकार अस्थायी होने के कारण लम्बी योजनाएं नहीं बनाई जाती क्योंकि सरकार का पता नहीं होता कि यह कितने दिन चलेगी।
  • सरकार बनाने में कठिनाई-बहु-दलीय प्रणाली में किसी भी दल को बहुमत प्राप्त न होने के कारण सरकार का बनाना कठिन हो जाता है। मन्त्रिमण्डल को बनाने के लिए विभिन्न दलों में कई प्रकार की सौदेबाज़ी होती है। कई सदस्य मन्त्री बनने के लिए दल भी बदल लेते हैं, जिससे दल बदली को बढ़ावा मिलता है।
  • बहुदलीय प्रणाली में संगठित विरोधी दल का अभाव होता है।

प्रश्न 9. एक-दलीय प्रणाली के चार गुणों का वर्णन कीजिए।
उत्तर-एक-दलीय प्रणाली में निम्नलिखित गुण पाए जाते हैं-

  • राष्ट्रीय एकता-एक-दलीय प्रणाली में राष्ट्रीय एकता बनी रहती है क्योंकि विभिन्न दलों में संघर्ष नहीं होता। सभी नागरिक एक ही विचारधारा में विश्वास रखते हैं और एक ही नेता के नेतृत्व में कार्य करते हैं जिससे राष्ट्रीय एकता की भावना उत्पन्न होती है। .
  • स्थायी सरकार-एक-दलीय प्रणाली के कारण सरकार स्थायी होती. है। मन्त्रिमण्डल के सदस्य एक ही दल से होते हैं और विधानमण्डल में सभी सदस्य सरकार का समर्थन करते हैं।
  • दृढ़ शासन-एक-दलीय प्रणाली में शासन दृढ़ होता है। किसी दूसरे दल के न होने के कारण सरकार की आलोचना नहीं होती। इस शासन से देश की उन्नति होती है।
  • एक दलीय प्रणाली में सरकार स्थायी होने के कारण दीर्घकालीन योजनाएं बनानी सम्भव होती हैं।

प्रश्न 10. एक दल प्रणाली के कोई चार दोष लिखो।
उत्तर-एक-दलीय प्रणाली में निम्नलिखित दोष पाए जाते हैं-

  • लोकतन्त्र के विरुद्ध-यह प्रणाली लोकतन्त्र के अनुकूल नहीं है। इसमें नागरिकों को अपने विचार व्यक्त करने की स्वतन्त्रता नहीं होती और न ही उन्हें संगठन बनाने की स्वतन्त्रता होती है।
  • नाममात्र के चुनाव-एक-दलीय प्रणाली में चुनाव केवल दिखावे के लिए होते हैं। नागरिकों को अपने प्रतिनिधि चुनने की स्वतन्त्रता नहीं होती।
  • तानाशाही की स्थापना-एक-दलीय प्रणाली में तानाशाही का बोलबाला रहता है। विरोधियों को सख्ती से दबाया जाता है अथवा उन्हें समाप्त कर दिया जाता है।
  • एक दलीय प्रणाली में सरकार उत्तरदायी नहीं होती।

प्रश्न 11. ‘द्वि-दलीय’ (Two Party) प्रणाली का क्या अर्थ है ?
उत्तर-द्वि-दलीय प्रणाली उसे कहते हैं जब किसी राज्य में केवल दो मुख्य तथा महत्त्वपूर्ण दल हों परन्तु इसका यह अर्थ नहीं कि द्वि-दलीय प्रणाली में तीसरा दल हो ही नही सकता। दो मुख्य दलों के अतिरिक्त और दल भी हो सकते हैं परन्तु उनका कोई महत्त्व नहीं होता। इंग्लैण्ड और अमेरिका में द्वि-दलीय प्रणाली को अपनाया गया है । इंग्लैण्ड में दो मुख्य दलों के नाम है-अनुदार दल तथा श्रमिक दल। इंग्लैण्ड में इन दलों के अतिरिक्त और दल भी हैं जैसे कि उदारवादी तथा साम्यवादी दल परन्तु इन दलों का राजनीति में कोई महत्त्व नहीं है। वास्तव में अनुदार दल तथा श्रमिक दल का ही राजनीति में महत्त्व है। अमेरिका में भी दो दल ही महत्त्वपूर्ण हैं। इनके नाम हैं-रिपब्लिकन दल तथा डैमोक्रेटिक दल।

प्रश्न 12. द्वि-दलीय प्रणाली के कोई चार गुण लिखो।
उत्तर-द्वि-दलीय प्रणाली में निम्नलिखित गुण पाए जाते हैं-

  • सरकार आसानी से बनाई जा सकती है-द्वि-दलीय प्रणाली का सबसे बड़ा गुण यह है कि इसमें सरकार आसानी से बनाई जा सकती है। दोनों दलों में से एक दल का विधानमण्डल में बहुमत होता है। बहुमत दल अपना मन्त्रिमण्डल बनाता है और दूसरा दल विरोधी दल बन जाता है।
  • स्थिर सरकार-बहुमत दल की सरकार बनती है और दूसरा दल विरोधी दल बन जाता है। मन्त्रिमण्डल तब तक अपने पद पर रहता है और जब तक उसे विधानमण्डल में बहुमत प्राप्त होता है। दल में कड़ा अनुशासन पाया जाता है जिसके कारण मन्त्रिमण्डल के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव करके मन्त्रिमण्डल को हटाया नहीं जा सकता। इस तरह सरकार अगले चुनाव तक अपने पद पर रहती है।
  • दृढ़ सरकार तथा नीति में निरन्तरता-सरकार स्थिर होने के कारण शासन में दृढ़ता आती है। सरकार अपनी नीतियों को दृढ़ता से लागू करती है। सरकार स्थायी होने के कारण लम्बी योजनाएं बनाई जा सकती हैं और इससे नीति में भी निरन्तरता बनी रहती है।
  • द्वि-दलीय प्रणाली में प्रधानमन्त्री की स्थिति शक्तिशाली होती है।

प्रश्न 13. बाएं-पक्षीय राजनीतिक दल कौन-से होते हैं ?
उत्तर- बाएं-पक्षीय राजनीतिक दल साम्यवादी विचारधारा से प्रभावित होते हैं । वामपंथी दल विचारधारा की दृष्टि से वे दल होते हैं जो क्रान्तिकारी सामाजिक तथा आर्थिक परिवर्तनों का समर्थन करते हैं और दूसरे वे जो समाजवाद का समर्थन करते हैं। भारत में भारतीय साम्यवादी दल मार्क्सवादी दल बाएं-पक्षीय राजनीतिक दल माने जाते हैं।

प्रश्न 14. दाएं-पक्षीय राजनीतिक दल कौन-से होते हैं ?
उत्तर-राजनीतिक प्रणाली में दाएं पक्षीय या दक्षिणपंथी राजनीतिक दल भी पाए जाते हैं। दक्षिणपंथी दल विचारधारा की दृष्टि से वे दल होते हैं जो यथास्थिति को बनाये रखने के लिए रूढ़िवादी स्थिति का समर्थन करते हैं।

प्रश्न 15. लोकतन्त्र में विपक्ष पार्टी की भूमिका का वर्णन करें।
उत्तर-

  • आलोचना-विरोधी दल का मुख्य कार्य सरकार की नीतियों की आलोचना करना है।
  • शासन नीति को प्रभावित करना-विरोधी दल सरकार की नीतियों की आलोचना करके सरकार की नीतियों को प्रभावित करता है।
  • विरोधी दल सरकार को निरंकुश बनने से रोकता है-विरोधी दल सरकार को सत्ता का दुरुपयोग करने से रोकता है।
  • विरोधी दल नागरिकों के अधिकारों एवं स्वतन्त्रताओं की रक्षा करते हैं।

अति लघु उत्तरीय प्रश्न-

प्रश्न 1. राजनीतिक दल किसको कहा जाता है?
उत्तर-राजनीतिक दल ऐसे नागरिकों का समूह है जो सार्वजनिक मामलों पर एक-से विचार रखते हों और संगठित होकर अपने मताधिकार द्वारा सरकार पर अपना नियन्त्रण स्थापित करना चाहते हों ताकि अपने सिद्धान्तों को लागू कर सकें।
(1) गिलक्राइस्ट के शब्दानुसार, “राजनीतिक दल ऐसे नागरिकों का संगठित समूह है जिनके राजनीतिक विचार एक से हों और एक राजनीतिक इकाई के रूप में कार्य करके सरकार पर नियन्त्रण रखने का प्रयत्न करते हों।”

प्रश्न 2. राजनीतिक दलों के कोई दो कार्य लिखो।
उत्तर-

  • लोकमत तैयार करना-लोकतन्त्रात्मक देश में राजनीतिक दल जनमत के निर्माण में बहुत सहायता करते हैं। .
  • सार्वजनिक नीतियों का निर्माण-राजनीतिक दल देश के समाने आने वाली समस्याओं पर विचार करते हैं तथा अपनी नीति निर्धारित करते हैं।

प्रश्न 3. बहु-दलीय प्रणाली के कोई दो गुण लिखो।
उत्तर-

  • विभिन्न मतों का प्रतिनिधित्व-बहु-दलीय प्रणाली में सभी वर्गों तथा हितों को प्रतिनिधित्व मिल जाता है। इस प्रणाली में सच्चे लोकतन्त्र की स्थापना होती है।
  • मतदाताओं को अधिक स्वतन्त्रता-अधिक दलों के कारण मतदाताओं को अपने मत का प्रयोग करने के लिए अधिक स्वतन्त्रता होती है।

प्रश्न 4. राजनीतिक दलों के कोई से दो दोष बताएं।
उत्तर-

  • राष्ट्रीय एकता को खतरा-राजनीतिक दलों के कारण राष्ट्रीय एकता को सदा खतरा बना रहता है।
  • राजनीतिक दल भ्रष्टाचार फैलाते हैं-चुनाव के दिनों में दल चुनाव जीतने के लिए जनता को कई प्रकार का प्रलोभन देते हैं।

प्रश्न 5. दो दलीय प्रणाली के दो देशों के नाम बताएं।
उत्तर-

  1. इंग्लैण्ड
  2. संयुक्त राज्य अमेरिका।

प्रश्न 6. एक दलीय प्रणाली के दो प्रमुख देशों के नाम बताएं।
उत्तर-

  1. चीन
  2. क्यूबा ।

प्रश्न 7. बहु-दलीय प्रणाली के किन्हीं दो दोषों का वर्णन कीजिए।
उत्तर-

  • निर्बल तथा अस्थायी सरकार-विभिन्न दल मिलकर मन्त्रिमण्डल का निर्माण करते हैं जो किसी भी समय टूट सकता है। मिली-जुली सरकार शासन की नीतियों को दृढ़ता से लागू नहीं कर सकती।
  • दीर्घकालीन आयोजन असम्भव-सरकार अस्थायी होने के कारण लम्बी योजनाएं नहीं बनाई जाती क्योंकि सरकार का पता नहीं होता कि यह कितने दिन चलेगी।

वस्तुनिष्ठ प्रश्न-

प्रश्न I. एक शब्द/वाक्य वाले प्रश्न-उत्तर

प्रश्न 1. एक दलीय प्रणाली से आपका क्या अभिप्राय है?
उत्तर-जिस देश की राजनीतिक व्यवस्था पर केवल एक ही दल का नियन्त्रण हो तथा अन्य दलों के संगठित होने और कार्य करने पर प्रतिबन्ध हो तो उसे एक दलीय प्रणाली कहते हैं।

प्रश्न 2. एक-दलीय प्रणाली वाले दो देशों के नाम लिखो।
उत्तर-

  1. चीन
  2. क्यूबा।

प्रश्न 3. द्वि-दलीय प्रणाली वाले दो देशों के नाम लिखो।
अथवा
किसी एक देश का नाम लिखो जिसमें द्वि-दलीय प्रणाली पाई जाती है?
उत्तर- इंग्लैण्ड और अमेरिका में द्वि-दलीय प्रणाली पाई जाती है।

प्रश्न 4. किसी एक देश का नाम लिखो, जिनमें बहु-दल प्रणाली पाई जाती है ?
उत्तर-भारत।

प्रश्न 5. बहु-दलीय प्रणाली का क्या अर्थ है?
अथवा
बहुदल प्रणाली से आपका क्या अभिप्राय है?
अथवा
बहु-दलीय प्रणाली से क्या भाव है ?
उत्तर-जहां तीन या तीन से अधिक राजनीतिक दलों का अस्तित्व हो उस प्रणाली को बहु-दलीय प्रणाली का नाम दिया जाता है।

प्रश्न 6. विरोधी दल का क्या अर्थ है ?
उत्तर-विधानपालिका में सत्ता पक्ष का विरोध करने वाले दलों को विरोधी दल कहा जाता है।

प्रश्न 7. सत्तारूढ़ दल किसको कहा जाता है?
उत्तर-सत्तारूढ़ दल उसे कहा जाता है, जिसने चुनावों में जीतने के पश्चात् सरकार का निर्माण किया हो।

प्रश्न 8. चीन में कौन-सी दल-प्रणाली पाई जाती है ?
उत्तर-चीन में एक दलीय प्रणाली पाई जाती है।

प्रश्न 9. द्वि-दलीय प्रणाली का कोई एक दोष लिखें।
उत्तर-द्वि-दलीय प्रणाली से राष्ट्र दो विरोधी गुटों में बंट जाता है, जो एक-दूसरे से ईर्ष्या करते हैं।

प्रश्न 10. द्वि-दलीय प्रणाली से आपका क्या अभिप्राय है?
उत्तर-किसी देश में दो बड़े और महत्त्वपूर्ण दल हों और शेष महत्त्वहीन हों।

प्रश्न 11. राजनीतिक दलों का एक गुण लिखो।
उत्तर-राजनीतिक दल जनमत निर्माण में मदद करते हैं।

प्रश्न 12. राजनीतिक दलों का एक अवगुण लिखो।
उत्तर-राजनीतिक दल राष्ट्रीय हितों की अपेक्षा दलीय हितों को बढ़ावा देते हैं।

प्रश्न 13. राजनीतिक दलों के गठन का एक आधार लिखो।
उत्तर-राजनीतिक दलों के गठन का एक आधार राजनीतिक है।

प्रश्न II. खाली स्थान भरें-

1. आधुनिक प्रजातन्त्र राज्यों में ……….. का होना अनिवार्य समझा जाता है।
2. जे० ए० शूम्पीटर के अनुसार राजनीतिक दल एक ऐसा गुट या समूह है, जिसके सदस्य ……….. प्राप्ति के लिए संघर्ष व होड़ में संलग्न है।
3. राजनीतिक दल के सदस्यों में ………… पर सहमति होनी चाहिए।
4. प्रत्येक राजनीतिक दल का एक निश्चित ……….. होता है।
5. राजनीतिक दल का उद्देश्य ………… शक्ति प्राप्त करना होता है।
6. राजनीतिक दल .. ……………… की जान कहलाते हैं।
उत्तर-

  1. राजनीतिक दलों
  2. सत्ता
  3. मूल सिद्धान्त
  4. कार्यक्रम
  5. राजनीतिक
  6. लोकतन्त्र।

प्रश्न III. निम्नलिखित वाक्यों में से सही एवं ग़लत का चुनाव करें-

1. संघात्मक राज्यों में राजनीतिक दल राष्ट्रीय एकता का एक महत्त्वपूर्ण साधन होते हैं।
2. प्रजातन्त्र में राजनीतिक दलों का अधिक महत्त्व नहीं होता।
3. प्रत्येक राजनीतिक दल चुनाव के लिए अपने-अपने उम्मीदवार खड़े करता है।
4. जिस दल को बहुमत प्राप्त होता है, वह विपक्ष में बैठता है।
5. आधुनिक राज्य में राजनीतिक दल लोगों को राजनीतिक शिक्षा प्रदान करते हैं।
उत्तर-

  1. सही
  2. ग़लत
  3. सही
  4. ग़लत
  5. सही।

प्रश्न IV. बहुविकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1. दलीय प्रणाली निम्नलिखित प्रकार की होती है-
(क) एक दलीय
(ख) द्वि-दलीय
(ग) बहु दलीय
(घ) उपरोक्त सभी।
उत्तर-(घ) उपरोक्त सभी।

प्रश्न 2. निम्नलिखित एक देश में एक दलीय प्रणाली पाई जाती है-
(क) भारत
(ख) इंग्लैण्ड
(ग) चीन
(घ) अमेरिका।
उत्तर-(ग) चीन

प्रश्न 3. निम्नलिखित एक देश में द्वि-दलीय प्रणाली पाई जाती है-
(क) अमेरिका
(ख) भारत
(ग) चीन
(घ) जापान।
उत्तर-(क) अमेरिका

प्रश्न 4. निम्नलिखित एक देश में बहुदलीय प्रणाली पाई जाती है-
(क) इंग्लैण्ड
(ख) अमेरिका
(ग) भारत
(घ) चीन।
उत्तर-(ग) भारत

प्रश्न 5. निम्नलिखित में से कौन-सा राजनीतिक दल का कार्य नहीं है-
(क) जनमत तैयार करना
(ख) राजनीतिक शिक्षा देना
(ग) सड़कें एवं पुल बनवाना
(घ) चुनाव लड़ना।
उत्तर-(ग) सड़कें एवं पुल बनवाना